महाराष्ट्र के नेताओं के चुल्लू भर पानी में डूब मरने की जरूरत

संपादकीय
20 अप्रैल 2016
महाराष्ट्र में आत्महत्या करते हुए किसानों की मदद करने के बजाय वहां के नेता और मंत्री तरह-तरह की ओछी बातें इन किसानों के बारे में कर रहे हैं। खेतों को पानी देने के बजाय सरकार वहां क्रिकेट के मैदान सींचने के लिए लगी हुई है, और अदालत को दखल देकर निर्वाचित सरकार को बताना पड़ रहा है कि वह क्या करे, और क्या न करे। ऐसी शर्मनाक नौबत में मुंबई फिल्म उद्योग के एक चर्चित कलाकार, और खासकर नकारात्मक छवि वाले खलनायक की भूमिका करके कामयाब हुए नाना पाटेकर अपने दम पर किसानों को बचाने में लगे हुए हैं। वे अपने पैसे खर्च करके लोगों का हौसला बढ़ा रहे हैं, और जो किसान गुजर गए हैं उनके परिवारों की मदद कर रहे हैं।
यह नौबत देश की राजनीति के लिए धिक्कार है, और खासकर ऐसे महाराष्ट्र के लिए जहां पर तमाम बड़ी पार्टियों के नेता राजनीति के रास्ते अरबपति और खरबपति होते आए हैं, कुछ जेल पहुंच गए हैं, कुछ अदालती कटघरे में हैं, और कुछ अपनी चतुराई से बचे हुए हैं। फिर यह एक ऐसा प्रदेश है जिसने कि बड़ी आक्रामकता के साथ गोवंश की बिक्री पर रोक लगाई है, इससे जहां एक तरफ तो बूढ़े गाय-बैल के मांस से पोषण आहार पाने वाले गरीब मांसाहारी लोग कुपोषण की तरफ बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ खुद भूखे-प्यासे मरने वाले किसान न खुद को बचा पा रहे हैं, न परिवार को, और बूढ़े जानवरों को खिलाने-पिलाने पर बेबस इसलिए हैं कि आंखों के सामने तो उनको मरते देख नहीं सकते, और अगर उन्हें बाहर छोड़ दिया, तो उन्हें ले जाते लोगों के साथ-साथ किसान भी जेल चले जाएंगे कि उन्होंने जानवरों को बेचा है।
गौमाता का आशीर्वाद उन्हें बचा नहीं पा रहा है, और सरकार उन्हें जिंदा रहने नहीं दे रही है। नतीजा यह है कि महाराष्ट्र सूखे, भूख, गरीबी, और खुदकुशी, इन सबका शिकार है, और देश का यह सबसे संपन्न राज्य देश के सबसे अधिक संख्या में खरबपतियों को लिए हुए चल रहा है। यह लोकतंत्र के लिए और राजनीतिक ताकतों के लिए चुल्लू भर पानी में डूब मरने की बात है क्योंकि आज इन ताकतों को तो अपने शक्कर कारखानों के लिए भी भरपेट पानी हासिल है, और अपनी क्रिकेट के सजावटी मैदानों को सींचने के लिए भी।
आज हाल यह है कि फिल्मों का एक खलनायक लोगों की जिंदगी में नायक बनकर आया है, और जो नेता अपने-आपको नायक बताते थकते नहीं हैं, वे सारे नेता असल जिंदगी के खालिस और कामयाब खलनायक साबित हो चुके हैं।

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