लहू सने गौरवपथ

संपादकीय
21 अप्रैल 2016
केन्द्र सरकार के आंकड़े हैं कि देश में पिछले बरस हर दिन चार सौ मौतें सड़क हादसों में हुई हैं। छत्तीसगढ़ में हर दिन अब दर्जन मौतें सुनाई पड़ रही हैं जिनमें बिना हेलमेट के दुपहिया वाले हैं, बाराती गाडिय़ां हैं, और नशे में गाड़ी चलाते लोगों की बात सामने आती है। रईस लोगों की बिगड़ैल औलादें हैं जो कि महंगी और तेज रफ्तार गाडिय़ों को दौड़ाते दूसरों को भी मार रही हैं, और खुद भी मर रही हैं।
कुछ लोग बढ़ती सड़क मौतों के लिए सड़कों पर बढ़ती गाडिय़ों का तर्क देते हैं। लेकिन यह बिल्कुल गलत बात है। गाडिय़ों की भीड़ से रफ्तार घटती है और हादसे भी कम होते हैं। आज के हादसों के पीछे अंधाधुंध रफ्तार और नशे में गाड़ी चलाना सबसे बड़ी वजह हैं और इनको रोकना सरकार की जिम्मेदारी है। यह सरकार के बस की बात भी है। आज छत्तीसगढ़ में बिना हेलमेट वाले दुपहिया चलाते लोगों से अकेली राजधानी में पुलिस एक-एक दिन में लाखों रूपए जुर्माना वसूल करती है। ऐसी कड़ी जांच पूरे राज्य में हो सकती है और नशे में मिले ड्राइवरों को गिरफ्तार करके जेल में डाला जा सकता है, उनके लायसेंस हमेशा के लिए रद्द किए जा सकते हैं।
छत्तीसगढ़ पुलिस के साथ दिक्कत यह है कि उसे राजनीतिक इंतजामों, गैरजरूरी आंदोलनों और मंत्री-अफसरों के घरेलू कामों में झोंक दिया जाता है। ट्रैफिक का इंतजाम भी सबसे पहले लालबत्ती काफिलों के लिए होता है, जुलूसों के लिए होता है, तब जनता की बारी आती है। जब पुलिस ट्रैफिक के बजाय सरकारी और राजनीतिक शादियों में पार्किंग करवाने में लग जाती है तब सड़कों का इंतजाम तो घट ही जाता है। ताकतवर ओहदों पर बैठे लोगों को अपने लिए पुलिस का बेजा इस्तेमाल बंद करना चाहिए।
अब बहुत से ऐसे उपकरण हैं जिनके इस्तेमाल से पुलिस गाडिय़ों की रफ्तार जांच सकती है। ड्राइवर नशे में हों तो उसका पता लगा सकती है। छत्तीसगढ़ में ऐसे उपकरण पुलिस के पास गिने-चुने हैं और उनके खराब पड़े होने की खबरें छपती रहती हैं। यह नौबत उस राज्य में शर्मनाक है जहां पर शहरों को सजाने के लिए हजारों करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। ऐसी सजावट किस काम की जहां सड़कों पर ऐसा इंसानी लहू बिखरा रहे? बेकसूर लोग मारे जाते रहें और पैसों की गुंडागर्दी बेकाबू रहे।
छत्तीसगढ़ सरकार को चाहिए कि कमउम्र जो बच्चे गाडिय़ां चलाते हैं, उन नाबालिगों के मां-बाप पर भी कार्रवाई करे और वैसी गाडिय़ों को भी जनजीवन के लिए खतरा मानकर जब्त करे। जिन लोगों के मन में दूसरों की जिंदगी के लिए सम्मान नहीं है, वे अपनी जिंदगी सड़कों से परे कहीं और खत्म करें, लेकिन बेकसूरों को न मारें।
सड़कों की बददिमागी संक्रामक होती है। सरकार को इसे खत्म करना चाहिए। इसके बिना छत्तीसगढ़ में सजते गौरवपथों का मतलब नहीं।

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