क्या भारतीय ओलिंपिक संघ कैदी की पोशाक में गुडविल एम्बेसडरी करवाएगा?

संपादकीय
27 अप्रैल 2016
भारतीय ओलिंपिक संघ द्वारा फिल्म स्टार सलमान खान को अपना गुडविल एम्बेसडर नियुक्त किया गया है, और यह घोषणा सामने आते ही खेल से जुड़े कई लोगों ने इसका विरोध शुरू किया, और उस विरोध का विरोध करते हुए फिल्म उद्योग के कई लोग और फिल्म उद्योग के साथ उठने-बैठने वाले बड़े-बड़े कुछ नामी खिलाडिय़ों ने इसे एक सही फैसला बताते हुए कहा है कि फिल्मों में कामयाब सलमान को गुडविल एम्बेसडर बनाने में कोई बुराई नहीं है, और यह सही फैसला है। और लोगों के साथ-साथ सलमान के पिता, फिल्मों के एक वक्त के कामयाब लेखक सलीम खान भी अपने बेटे की हिमायत में उतर आए हैं, और उन्होंने आलोचना करने वाले मशहूर बुजुर्ग खिलाड़ी मिल्खा सिंह को सोशल मीडिया पर ही कड़ा जवाब दिया है कि मुम्बई फिल्म उद्योग की वजह से ही मिल्खा सिंह गुमनामी से बाहर, शोहरत में आ पाए हैं।
लेकिन अभी बहस इस बात पर आ टिकी है कि फिल्म उद्योग के एक कलाकार को ओलिंपिक के लिए गुडविल एम्बसेडर बनाना ठीक है या नहीं। हमारे हिसाब से बहस का मुद्दा बिल्कुल अलग ही होना चाहिए था, और उस हिसाब से सलमान को भारतीय ओलिंपिक संघ द्वारा मनोनीत करना पूरी तरह से नाजायज है। सलमान अभी हिरणों के शिकार का एक मामला तो झेल ही रहे हैं, अदालती कटघरे में खड़े हैं, और वहां पर उन्हें सजा का खतरा है ही, लेकिन इससे भी बड़ी दूसरी बात यह है कि मुंबई की सड़कों पर नशे की हालत में लोगों को कुचलने, और छोड़कर भाग जाने के मामले में सलमान खान को एक अदालत से सजा हो चुकी है, और ऊपर की अदालतों में अभी मामला बाकी है। ऐसे में सलमान को सरकार या किसी सार्वजनिक संगठन द्वारा गुडविल एम्बेसडर बनाने का मतलब उन गुनाहों को अनदेखा करना है जिसके लिए एक अदालत से सजा हुई, दूसरे से बरी हुए, और अब महाराष्ट्र सरकार सलमान को सजा दिलवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट गई हुई है। अगर सजायाफ्ता या कटघरे में खड़े हुए लोगों को सार्वजनिक जीवन में इस तरह से महिमामंडित करना है, तो फिर सार्वजनिक जीवन में मूल्यों की कोई जरूरत ही नहीं है।
फिर भारतीय ओलिंपिक संघ के सामने सलमान के अलावा और कोई विकल्प न रहा हो, ऐसा भी नहीं है। अकेले मुंबई फिल्म उद्योग में बहुत से ऐसे दूसरे कलाकार हैं जो जुर्म और कोर्ट-कचहरी से दूर हैं, और खेलों से, फिटनेस से जुड़े हुए भी हैं। मिसाल के तौर पर शाहरूख खान हैं जो कि हॉकी पर बनी हुई एक अच्छी फिल्म के प्रमुख अभिनेता रहे, और खेलों पर बनने वाली दूसरी फिल्मों से भी कई बड़े मशहूर कलाकार जुड़े रहे हैं। प्रियंका चोपड़ा ने न सिर्फ ओलिंपिक विजेता मैरीकॉम की भूमिका की, बल्कि वे आज हॉलीवुड में भी मशहूर हो रही हैं। लेकिन हम कोई नाम सुझाना नहीं चाहते, महज इतना कहना चाहते हैं कि जुर्म से जुड़े हुए, कटघरों में खड़़े हुए लोगों से दूर रहना चाहिए। उन तमाम लोगों को भी बराबरी से जीने के अधिकार हैं, लेकिन जब किसी को किसी संगठन का, आयोजन का, या कार्यक्रम का, अभियान का चेहरा बनाकर पेश करना है, तो वैसे चेहरे के नीचे अदालती कटघरा न दिखता रहे, इसका ध्यान जरूर रखना चाहिए। एक समय सार्वजनिक जीवन के लोगों को इतनी शर्म भी रहती थी कि ऐसी नौबत में मिल रहे सम्मान को वे खुद रोककर रखते थे कि अभी उनके खिलाफ मामले-मुकदमे चल रहे हैं, और उन्हें फिलहाल यह मंजूर करना ठीक नहीं लगेगा। लेकिन आज वैसी शर्म खत्म हो गई है, मनोनीत करने वाले लोगों में भी, और मनोनीत होने वाले लोगों मेें भी कल के दिन अगर सलमान खान को इन दोनों चल रहे मामलों में सजा हो जाती है, तो क्या भारतीय ओलिंपिक संघ उनसे कैदी की पोशाक में गुडविल एम्बेसडरी करवाएगा?

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