बेकसूर देशभक्तों को गद्दार कहकर आखिर भेजेंगे कहां?

संपादकीय
4 अप्रैल 2016

दुनिया में सबसे ताकतवर मुस्लिम देश सऊदी अरब, जहां पर कि हज यात्रा करने के लिए दुनिया भर के मुस्लिम मक्का जाते हैं, वहां पहुंचे हुए भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वहां के शासक को भारत की पहली मस्जिद की सोने से बनाई हुई नकल तोहफे में दी। यह एक बड़ी सूझ-बूझ का नमूना है कि केरल में सैकड़ों बरस पहले की इस मस्जिद के पहले ढांचे की ऐसी कॉपी बनाकर उसे सऊदी अरब को भेंट करना। लेकिन जब नरेन्द्र मोदी वहां यह धार्मिक सद्भाव दिखा रहे थे, और सऊदी अरब के साथ भारत के लिए बहुत ही महत्व के कारोबारी रिश्ते मजबूत कर रहे थे, उसी वक्त भारत में उनकी पार्टी के बड़े-बड़े नेता, और मंत्री-मुख्यमंत्री घूम-घूमकर यह भड़काऊ बात कह रहे थे कि जो लोग भारत माता की जय नहीं बोल सकते, उन्हें इस देश में रहने का कोई हक नहीं है, वे देशद्रोही हैं, और उन्हें देश छोड़कर चले जाना चाहिए। कुछ महीने पहले तक तो यह बात हमलावर हिंदुत्व के भगवाधारी बोलते थे, लेकिन कुछ हफ्ते पहले महाराष्ट्र की विधानसभा ने एक मुस्लिम विधायक इस निलंबित कर दिया कि उसने यह नारा लगाने से इंकार कर दिया था। उस वक्त भी हमने इसके खिलाफ लिखा था, लेकिन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडनवीस ने कल हमले को आगे बढ़ाते हुए यह सार्वजनिक बयान दिया है कि भारत माता की जय न बोलने वाले गद्दारों को देश में रहने का कोई हक नहीं है। दो दिन पहले छत्तीसगढ़ की एक बड़ी भाजपा नेता, भूतपूर्व सांसद सरोज पांडेय ने भी भारत माता की जय न बोलने वालों को देशद्रोही कहा है, और कहा है कि उनको भारत में रहने का कोई हक नहीं है। वे कानून पढ़ी हुई हैं, और उनका यह बयान भारी निराशा पैदा करने वाला है। 
अब सवाल यह उठता है कि इस देश से दसियों करोड़ लोगों को कहां भेजा जाएगा, और उन्हें दुनिया का कौन सा देश जगह देगा? जो लोग धार्मिक आधार पर ऐसा नारा लगाने से असहमत हैं, और हमारी तरह के जो लोग वैचारिक रूप से किसी नारे की बंदिश के, नारे को थोपने के खिलाफ हैं, उन करोड़ों लोगों को भाजपा के ये नेता, मंत्री और मुख्यमंत्री किस देश भेजेंगे? किसी संवैधानिक शपथ वाली कुर्सी पर न बैठे लोग तो जब ऐसे बयान देते हैं, तो वे महज जुर्म रहते हैं, लेकिन जब शपथ वाली कुर्सी पर बैठे मुख्यमंत्री इस तरह के बयान देते हैं, तो वे पद की शपथ के खिलाफ भी काम करते हैं, और हमारा मानना है कि अगर सुप्रीम कोर्ट इस मामले में ईमानदारी से विश्लेषण करेगा, तो उसका फैसला ऐसे लोगों को कुर्सी से हटाने वाला होगा। जो लोग किसी एक धर्म को लेकर ऐसी हमलावर बातें करते हैं, और बाकी तमाम धर्मों के लोगों को, अपने ही धर्म के असहमत लोगों को गद्दार कहते हैं, देशद्रोही और राष्ट्रद्रोही कहते हैं, वे संविधान के खिलाफ काम करते हैं, और उनको शपथ से जुड़ी हुई किसी कुर्सी पर रहने का हक नहीं है। 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दुनिया के जिन बाकी देशों के साथ संबंध मजबूत करना चाहते हैं, कारोबार बढ़ाना चाहते हैं, उन देशों की भी अपनी धार्मिक भावनाएं हैं, और भारत में जिन बेकसूरों को, जिन देशभक्तों को दिन में दस-दस बार गद्दार कहा जा रहा है, और देश से निकालने की बात कही जा रही है, उस तनाव को भी वे तमाम देश देख रहे हैं। भारत के भीतर यह साम्प्रदायिक बखेड़ा खड़ा होने से नरेन्द्र मोदी की आर्थिक नीतियां, और उनकी आर्थिक प्राथमिकताएं भी अपनी संभावनाएं खोकर किनारे बैठ जाएंगी। आज अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल अगर मिट्टी के मोल न मिलता होता, तो इस देश की अर्थव्यवस्था का भट्टा बैठ गया होता। लेकिन आज भी साम्प्रदायिक तनाव के चलते हुए देश में विश्वास का जो संकट खड़ा हो रहा है, वह अर्थव्यवस्था को सीधे प्रभावित कर रहा है, और लंबे समय के लिए समाज की एकता में एक दरार खड़ी कर रहा है। इससे नरेन्द्र मोदी की बनती हुई अंतरराष्ट्रीय छवि भी तबाह हो रही है। वे अपने मुंह से ऐसी बातों को नहीं कह रहे हैं, लेकिन उनके जो लोग इन बातों को रात-दिन कह रहे हैं, उनके खिलाफ भी उनका मुंह नहीं खुल रहा है। देश के लिए यह हालत बहुत फिक्र की है, और इतिहास इसे दर्ज करते चल रहा है। 

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