गरीबों को रियायती गैस से हिन्दुस्तानी महिला और बच्चों की सेहत में एक क्रांति संभव

संपादकीय
1 मई  2016
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन देने की जो योजना आज शुरू की है, वह अगर सचमुच कामयाब होती है तो उससे हिन्दुस्तानी महिला और बच्चों की जिंदगी न सिर्फ बदल जाएगी, बल्कि बढ़ भी जाएगी। दुनिया के एक बहुत बड़े वायु-प्रदूषण वैज्ञानिक का भारत का दशकों का शोधकार्य यह बताता है कि तमाम विकासशील और अविकसित देशों में सेहत को सबसे बड़ा खतरा किसी संक्रामक रोग से, किसी जंग से, या किसी हादसे से नहीं है, बल्कि घरेलू चूल्हों से उठने वाले प्रदूषण से महिला और उसके बच्चों को सबसे बुरा और सबसे अधिक नुकसान पहुंचता है। अमरीका के प्रतिष्ठित बर्कले विश्वविद्यालय के प्रोफेसर कर्क स्मिथ दो-दो नोबल पुरस्कारों में भागीदार रहे हैं, और भारत में वे आधी सदी से काम करते आए हैं, उनका यह निष्कर्ष है कि परमाणु बिजलीघर की इतिहास की आज तक की सारी दुर्घटनाओं को मिला दिया जाए, तो भी एक महीने में घरेलू चूल्हे से होने वाली मौतों का आंकड़ा वे नहीं छू सकते। लकड़ी या कोयले के चूल्हे से उठने वाला धुआं महिला और उसके बच्चों को खोखला करके रख देता है। यह देखने के बाद हैरानी होती है कि किस तरह भारत में महिला यह झेलते हुए भी पुरूष के मुकाबले औसत उम्र में खासी आगे है और तीन-चार बरस अधिक जीती है। पता नहीं इस धुएं से बचने के बाद वह महिला पांच-दस बरस अधिक उम्र न पा जाए।
नरेन्द्र मोदी की इस बात के लिए तारीफ की जानी चाहिए कि उन्होंने रसोई गैस पर संपन्न तबके की रियायत को छोडऩे के लिए लोगों का हौसला बढ़ाया, और एक करोड़ लोग इस रियायत को छोड़ चुके हैं। यह संख्या भारत की आबादी के मुकाबले बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन यह सिलसिला एक सही दिशा में बढ़ रहा है, और हो सकता है कि मोदी का कार्यकाल खत्म होने तक चार-छह करोड़ लोग रियायत छोड़ चुके हों, और चार-छह करोड़ गरीब महिलाएं रसोई गैस पा चुकी हों। हमारा यह भी मानना है कि राज्य सरकारों को भी केन्द्र सरकार की इस योजना में मदद करने के लिए अपने-अपने इलाकों में रसोई गैस रियायत की बाजारू और कारखानों की चोरी को रोकना चाहिए, जो कि आज धड़ल्ले से जारी है। बाजार में लोग मशीनें लगाकर रियायती गैस को कारोबारी सिलेंडरों में भरते हैं और बड़े पैमाने पर रियायत की चोरी करते हैं। गरीबों के लिए तय की गई ऐसी रियायत की चोरी पर सजा कड़ी की जानी चाहिए, और राज्य सरकारों को अपनी जिम्मेदारी अधिक गंभीरता से निभानी चाहिए।
जो राज्य जनता की अधिक फिक्र करते हैं, उन्हें चाहिए कि प्रधानमंत्री की लाई गई इस उज्जवला योजना पर अमल के लिए अपने राज्य में तेज रफ्तार से काम करें और सबसे गरीब महिलाओं को, ग्रामीण महिलाओं को इसका फायदा पहुंचाएं। छत्तीसगढ़ में घरेलू चूल्हे को बदलने की बहुत जरूरत है और केन्द्र सरकार के पैमाने पर यहां की दसियों लाख गरीब महिलाएं आ जाएंगी। राज्य सरकार गैस-रियायत के चोरों को तेजी से पकड़े, और गरीबों को फायदा पहुंचाए।

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