अदालती कार्रवाई से परे सोनिया पर हमले आत्मघाती साबित होंगे

संपादकीय
10 मई  2016
इटैलियन हेलीकॉप्टर खरीदी में घोटाले को लेकर भारत की राजनीति में चल रही आंधी के तहत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने केरल की चुनावी सभा में सोनिया गांधी पर जब बहुत ही तेज और निजी हमले किए, तो भाजपा की देश की सबसे पुरानी सहयोग पार्टी, शिवसेना भी चुप नहीं रह सकी। पार्टी के नेता उद्धव ठाकरे ने आगाह किया कि अगर सरकार के पास सोनिया गांधी के खिलाफ सबूत हैं, तो नरमी न बरते, लेकिन अगर सबूत नहीं है, तो इस तरह से राजनीतिक हमले करने से सोनिया गांधी को उसी तरह का फायदा हो सकता है, जैसा फायदा जनता पार्टी की सरकार आने के बाद इंदिरा गांधी के पीछे लगने पर इंदिरा को हुआ था, और वे सत्ता पर लौट आई थीं। शिवसेना ने कहा है कि देश की जनता ने इस सरकार को काम करने के लिए मौका दिया है, न कि इस तरह के राजनीतिक अभियान चलाने के लिए।
भाजपा और एनडीए के लिए यह एक अच्छी बात है कि उसके घर के भीतर ही शिवसेना जैसा एक घरेलू ऑडिटर बैठा हुआ है। एनडीए सरकार बनने के बाद से अब तक हम लगातार यह देखते आ रहे हैं कि केंद्र और महाराष्ट्र की सरकार, इन दोनों में भाजपा की भागीदार रहने के बावजूद शिवसेना दोनों सरकारों की हर गलती पर सार्वजनिक रूप से बोलते आ रही है, और यह इन दोनों सरकारों को बड़ी गलतियों को दुहराने से बचने का एक मौका भी है। देश के लोगों को याद होगा कि किस तरह यूपीए-1 में वामपंथी समर्थन सरकार के बाहर से था, लेकिन उस समर्थन के दबाव में यूपीए उन तमाम घोटालों से बची हुई थी, जो कि यूपीए-2 के कार्यकाल में हुए। दरअसल वामपंथी दबाव के चलते यूपीए का चालचलन भी ठीकठाक रहा, और उसकी नीतियां भी जनविरोधी नहीं रही। लेकिन बेकाबू होते ही यूपीए-2 ने वे सारे काम किए जिससे कि वे सरकार के बाहर हो गई।
हम तो किसी भी नेता या पार्टी के भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की वकालत करते आए हैं, लेकिन हमारा यह भी मानना है कि सार्वजनिक जीवन में एक-दूसरे के खिलाफ बिना सबूतों के ओछे हमले नहीं करने चाहिए। वह चाहे सोनिया गांधी के इटैलियन मूल को बार-बार याद दिलाकर उन्हें कुछ कम हिन्दुस्तानी साबित करना हो, या कि मोदी की डिग्री पर बिना सबूतों के सवाल उठाकर उन्हें फर्जी साबित करना हो, हम ऐसी दोनों ही हरकतों के खिलाफ हैं। लेकिन शिवसेना ने जो बात कही है, वह इस देश की अधिकतर जनता के मिजाज की बात है। हम बाकी नीतियों के मामले में शिवसेना से कोसों दूर हैं, लेकिन बहुत से मुद्दों पर शिवसेना भाजपा के लिए निंदक नियरे राखिये के अंदाज में आगाह करने का काम करती है।
लोगों को यह अच्छी तरह याद है कि सोनिया गांधी के इटैलियन मूल का सवाल कई चुनाव पहले जनता से जवाब पा चुका है, और सुषमा स्वराज के सिर मुंडाने की नौबत भी ला चुका है। इसलिए अब अदालती कार्रवाई से परे सोनिया गांधी पर ओछे हमले आत्मघाती ही होंगे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें