योग को स्वस्थ जीवन शैली के रूप में बढ़ावा देने की जरूरत

संपादकीय
17 मई  2016
अभी कुछ दिन पहले कबीरधाम के नए पुलिस अधीक्षक डी रविशंकर की अगुवाई में योग शिविर का आयोजन किया गया। जिसमें एसपी दफ्तर, पुलिस लाईन, के अलावा थाने और चौकियों से आए हुए पुलिसकर्मियों, और उनके परिवार के बच्चे शामिल हुए। वहीं योग को हर थाने में सुबह अनिवार्य रूप से लागू किया जा रहा है ताकि पुलिसकर्मियों की शारीरिक और मानसिक शक्तियों का विकास हो सके। एक नए जिले में शुरू हुई इस पहल से प्रदेश के दीगर महकमे भी प्रेरणा ले सकते हैं।
भारत हजारों बरस से योग का उपयोग करते आ रहा है, और भारतीय जीवन शैली में पूरे देश में योग प्रचलित भी है, हम अपने अखबार में कई बार इस बात को लिखते आए हैं कि योग और कसरत जैसी जीवन शैली से बीमारियों से बचा जा सकता है, सेहत को बेहतर रखा जा सकता है, और ऐसा होने पर सरकार का भी इलाज का खर्च घटेगा। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने 21 जून को पूरी दुनिया में विश्व योग दिवस मनाने की घोषणा की है।  
हमारे नियमित पाठकों को याद होगा कि हम विचारों की इसी कॉलम में पहले कई बार इस पर लिख चुके हैं और अभी हमारे सामने 31 मार्च 2012 का संपादकीय है जिसमें हमने लिखा था कि हम समाज और सरकार दोनों के स्तर पर एक सेहतमंद जीवनशैली के लिए जागरूकता के एक बड़े अभियान को तुरंत शुरू करने की मांग करते हैं। इसके तहत हर शहर और कस्बे में लोगों के लिए साफ हवा में घूमने-फिरने, कसरत करने, बीमारियों से बचाव की जानकारी पाने, योग और प्राणायाम के विवादहीन तरीकों को बढ़ावा देने का इंतजाम करना चाहिए। एक योजना के तहत सरकार ही जिला स्तर से शुरू करके बाद में और नीचे के स्तर तक ऐसे प्राकृतिक केंद्र विकसित कर सकती है जिनमें पेड़ों के बीच साफ और खुली हवा में ऐसे तमाम काम चल सकते हों। यह बात हम पहले भी सरकार को सुझा चुके हैं। छत्तीसगढ़ में जहां पर कि एक आयुर्वेदिक डॉक्टर रमन सिंह मुख्यमंत्री हैं, और मंत्रिमंडल में बहुत से लोग गंभीर बीमारियों के शिकार हैं, वहां पर फिर ऐसी जरूरत के लिए जागरूकता आसानी से आनी चाहिए। समाज अपने-आपमें इतने बड़े प्राकृतिक स्वास्थ्य केंद्र खुद तो नहीं बना सकता, लेकिन वह सरकार को इसके लिए  तैयार जरूर कर सकता है।
एक और अलग दिन हमने लिखा था कि आज जब बगीचे और मैदान या तो घटते जा रहे हैं या फिर पैदल घूमने लायक सड़कें गंदगी से भरी हुई हैं, उनमें गाडिय़ों का धुआं छाए रहता है, गड्ढे, गोबर और धूल के चलते जहां चलना मुश्किल होता है, वहां पर सुबह-शाम लोग सैर कर सकें, योग या दूसरे किस्म की कसरत कर सकें, खेलकूद सकें ऐसा इंतजाम होना चाहिए। शहरी योजनाओं में कागजों पर तो ऐसा हो जाता है लेकिन जब हर इलाके के बीच ऐसी साफ-सुथरी और खुली हवा वाली जगह की बात करें तो ये घटती चल रही हैं। सरकार या समाज को एक बड़े पैमाने पर योग और साधारण कसरत की मुफ्त ट्रेनिंग देने का इंतजाम भी करना चाहिए ताकि लोग इस पर अमल करें और सेहतमंद रहें।
भारत में योग को एक स्वस्थ जीवन शैली के रूप में बढ़ावा देने की जरूरत है। योग को धर्म से अलग करके, विवाद और विवादास्पद लोगों से अलग करके हर स्कूल और कॉलेज तक पहुंचाने की जरूरत है। हमने तो बरसों पहले छत्तीसगढ़ सरकार से हर जिले में ऐसे केन्द्र विकसित करने की मांग की थी, और उससे हो सकने वाले फायदों को गिनाया भी था।
राज्य सरकार की नीति में स्कूल शिक्षकों को योग सिखाने की बात तो बरसों से की जा रही है, लेकिन उस पर कोई अमल हो नहीं रहा। और हम स्कूल-कॉलेज से परे भी सभी उम्र के लोगों के लिए मुफ्त योग शिक्षा इसलिए सुझा रहे हैं क्योंकि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे सेहत के खतरे बढ़ते जाते हैं। स्कूल और कॉलेज की उम्र में तो सेहत ऐसी रहती है कि किसी को योग नहीं सूझता। और जब उसकी जरूरत रहती है तो सीखने की उम्र ढलने लगती है। छत्तीसगढ़ को एक सेहतमंद राज्य बनने के लिए बड़े पैमाने पर यह पहल करनी चाहिए, और इसके लिए न तो बिजली लगनी है, न कोई उपकरण लगने हैं, और न ही अधिक खर्च होना है। ऐसा होने पर सरकार का इलाज पर से खर्च घटते भी चले जाएगा।
आज दुनिया में शारीरिक और मानसिक बीमारियां जितनी बढ़ रही हैं, उनकी रोकथाम के लिए योग एक असरदार तरीका हो सकता है, और इससे रोज की जिंदगी की उत्पादकता भी बढ़ सकती है। बिना किसी नारे के, बिना किसी धार्मिक उन्माद के, बिना किसी हमले के योग अधिक शांति के साथ अधिक लोगों के अधिक फायदे का हो सकता है, और वही किया जाना चाहिए।

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