सोशल मीडिया पर बदनीयत झूठ पर तेजी से सजा हो

संपादकीय
24 मई  2016
इंटरनेट पर सोशल मीडिया को लेकर कुछ बातों को हम पहले भी कई बार लिख चुके हैं लेकिन आज की जिंदगी में सोशल मीडिया की दखल जितनी बढ़ गई है, उसे देखते हुए एक बार फिर इस पर लिखने की जरूरत है। असम में एक फिल्म अभिनेत्री अंगूरलता डेका भाजपा की टिकट पर चुनाव लडऩे के बाद जीतकर विधायक बन गईं, तो फिल्म निर्माता-निर्देशक रामगोपाल वर्मा ने उनकी एक खूबसूरत तस्वीर के साथ लिखा कि अगर एमएलए इतनी सुंदर हो रही हैं तो राजनीति से  उनकी चिढ़ खत्म हो रही है। लेकिन दूसरी तरफ कुछ लोगों ने भाजपा के खिलाफ हमला बोलने की मुहिम के तहत एक स्वीमिंग पूल में बैठी हुई एक ऐसी महिला की तस्वीर अंगूरलता की बताते हुए पोस्ट की, जिसके हाथ में एक गिलास में शराब सरीखा कुछ दिख रहा है। इसके साथ-साथ यह लिखा गया कि शाम होते ही भाजपा की यह विधायक डूब जाती है शराब और शबाब में। फिर क्या था, बात की बात में भाजपा विरोधी लोगों ने इस तस्वीर को चारों तरफ फैलाना शुरू किया, और हमने अपनी आम आदत के मुताबिक सबसे पहले तो इसे झूठा मानते हुए इसे परखना शुरू किया। नतीजा यह निकला कि पहली नजर में ही यह पता लग गया कि यह महिला अंगूरलता नहीं है।
अब इसके आगे की बात करें तो पल भर के लिए, बहस के लिए यह मान भी लें कि यह भाजपा की विधायक है, तो न तो किसी महिला का स्वीमिंग पूल में बैठना जुर्म है, और अगर वह शराब भी पी रही है, तो वह भी जुर्म नहीं है। ये हमले सिर्फ भाजपा विरोधियों द्वारा भाजपा के लोगों पर नहीं होते, बहुत सी पार्टियों के लोग अपने विरोधियों पर ऐसे हमले करते हैं, और दिल्ली के विधानसभा चुनाव के दौरान बीयर या शराब पीने वाले लोगों को डिजिटल तकनीक से आम आदमी पार्टी की टोपी पहनाकर उन्हें शराबी साबित करने की कोशिश पूरे चुनाव के दौरान होते रही। आज सोशल मीडिया पर हम इसीलिए लिखना चाह रहे हैं कि इस तरह के झूठे, गढ़े हुए, और ओछे हमले जो लोग भी करते हैं, वे किसी और को नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि वे सिर्फ उन लोगों को नुकसान पहुंचाते हैं जिनका भला करने की कोशिश वे करते हैं। आज किसी महिला की तस्वीर को भाजपा विधायक बताकर अगर ओछा हमला किया जा रहा है तो यह झूठ कुछ घंटों से ज्यादा खड़े नहीं रह सकता। और इसके उजागर हो जाने के बाद भाजपा-विरोधियों की ऐसी हरकत से बहुत सी समाचार वेबसाईटें भी उजागर हो रही हैं जो कि इस झूठ को फैला रही थीं।
लोगों को अभी तक भारत के आईटी कानून के खतरे पूरी तरह से समझ नहीं आ रहे हैं। ऐसे झूठ को फैलाने पर कैद हो सकती है, चाहे वह समाचार वेबसाईट हो, या कि ट्विटर और फेसबुक जैसी सोशल मीडिया वेबसाईटें हों। इन पर झूठ फैलाना जितना आसान है, उतना ही आसान ऐसे लोगों को जेल पहुंचाना भी है। हमारा तो यह मानना है कि चाहे किसी भी राजनीतिक या धार्मिक, क्षेत्रीय या राष्ट्रीय विचारधारा के लिए, या उसके विरोध के लिए ऐसे झूठ फैलाने वाले लोगों को तेजी से जेल भेजना चाहिए, ताकि बाकी लोगों को भी यह समझ आए कि यह बदनीयत-शरारत कितनी महंगी पड़ सकती है। हमारी दूसरी सलाह सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों से है कि झूठ का भांडाफोड़ करने में उनको पीछे नहीं रहना चाहिए चाहे झूठ किसी भी विचारधारा का क्यों न हो।

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