शराब का कारोबार और फौलादी सरकारी पकड़

संपादकीय
4 मई  2016
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के इलाके, राजनांदगांव जिले की एक महिला सरपंच ने लोक सुराज अभियान में अधिकारियों को यह अर्जी दी है कि उसके गांव में बंद की गई देशी शराब दुकान दुबारा शुरू की जाए, क्योंकि दुकान बंद होने से अब वहां हर होटल-चायठेले, पानठेले पर शराब बिकने लगी है, और गांव का माहौल बहुत खराब हो गया है। यह चिट्ठी अपने किस्म की कुछ अनोखी है क्योंकि प्रदेश भर में जगह-जगह महिलाएं शराब दुकान बंद करवाने के लिए आंदोलन करते दिखती हैं, और उनकी मांग पर कुछ जगहों पर दुकानें बंद भी हुई हैं।
छत्तीसगढ़ सहित देश के बहुत से प्रदेशों में शराब का कारोबार सरकार की फौलादी जकड़ का शिकार है। इस कारोबार को कानूनी दर्जा है, लेकिन इस पर नियमों और अघोषित नियमों का ऐसा शिकंजा कसा जाता है कि यह कारोबार एक जुर्म की तरह दिखने लगता है। छत्तीसगढ़ सरकार के पास भी बिहार की तरह शराब के धंधे को बंद करने का अधिकार है, लेकिन इस धंधे को चलाते हुए इसे जिस अंदाज में कुचला और निचोड़ा जाता है, वह सरकार के इंस्पेक्टर राज की एक बेमिसाल मिसाल है। सरकार अपनी नीति बनाते हुए इस धंधे के लिए नियम और शर्तों को मनमाने अंदाज में बदलती है, और अधिक कमाई का तर्क गिनाते हुए शराब पीने वाले आम लोगों के लिए भी दिक्कत खड़ी करती है। पिछले कुछ बरसों में सरकार ने कम आबादी के गांवोंं में शराब दुकानें बंद कीं, और नतीजा यह निकला कि एक कानूनी दुकान के बजाय दर्जनों गैरकानूनी कोचियों ने काम करना शुरू कर दिया, जगह-जगह, घर-घर शराब बिकने लगी, और अधिकतर लोगों का यह अनुभव रहा कि महिलाएं भी इस बिक्री में उतर आईं क्योंकि दिन भर में कई सौ रूपए की बचत होने लगी।
इसके अलावा शराब कारोबार में शराबखानों के लिए अजीब किस्म की शर्तें लादी गईं, जिनमें यह भी है कि वहां सिर्फ महंगी शराब पिलाई जा सकेगी, और जो मध्यम वर्ग के लोग हैं, उनकी पहुंच के ब्रांड वहां नहीं रह सकेंगे। इस कारोबार से जुड़ी वसूली और उगाही की बातें हमेशा ही खबरों में रहती हैं, और इस तरह इस विभाग के छोटे-छोटे अफसर ऐसे करोड़पति बन जाते हैं कि उन पर किसी का बस भी नहीं रहता। सरकार को अगर शराबबंदी करनी है तो वह राज्य की जनता के लिए फायदे की बात हो सकती है। लेकिन आज सरकारी नियंत्रण के इस कारोबार में दारू के दो नंबर के धंधे में लगे कारखानेदार और कारोबारी एक तरफ अपनी मनमानी करने को आजाद हैं, दूसरी तरफ व्यक्तिगत पसंद और नापसंद के आधार पर यह विभाग अलग-अलग कारोबारियों को बढ़ाने और कुचलने में लगे रहता है। यह पूरा सिलसिला बड़ी बुरी सार्वजनिक चर्चा का भी रहता है, और इतनी सरकारी दखल की वजह से सरकारी संरक्षण में कारोबारी भारी मनमानी भी करते हैं, और शराब ग्राहकों का नुकसान होता है।
दुनिया के सभ्य और विकसित देशों में शराब के कारोबार का ऐसा सरकारी काबू नहीं होता, और वहां पर शराब से ऐसी बर्बादी भी नहीं होती। छत्तीसगढ़ में शराब के धंधे को दुधारू गाय की तरह दुहा जाता है, और घोषित-अघोषित कमाई के लिए नियम और नियंत्रण लगातार बदले जाते हैं। सरकार को इस काम को पारदर्शी करना चाहिए, और ऐसे तमाम अलोकतांत्रिक, अघोषित, और अनुचित नियंत्रण खत्म करने चाहिए। 

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