भारतीय फौज घटना अच्छा संकेत, फौजी खर्च और घटे

संपादकीय
9 मई  2016
भारतीय सेना नॉन कॉम्बेट सेक्शन में कर्मचारियों की संख्या कम करने की तैयारी कर रही है। सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह सुहाग ने इस पर एक टीम बनाकर स्टडी करने के लिए आदेश दिए हैं। इस फैसले की वजह खर्च कम करना और सेना को सही आकार में लाना है। भारतीय सेना में फिलहाल 10.2 लाख कर्मचारी हैं। भारतीय सेना दुनिया की दुनिया सबसे बड़ी आर्मी है। 2005 से 2013 के बीच आर्मी में 14 हजार नौकरियां पहले ही कम की जा चुकी हैं।
यह एक मायने में एक अच्छी खबर हो सकती है अगर भारत के चारों तरफ अलग-अलग देशों के साथ उसके रिश्ते ऐसे सुधरें कि इन तमाम देशों को अपनी फौज घटाना ठीक लगने लगे, तो उससे हिन्द महासागर के इस पूरे इलाके में गरीबी दूर हो सकती है। इस पूरे क्षेत्र में अगर एक-दूसरे के सामने मोर्चे पर डटने वाले देश हैं, तो वे महज तीन हैं। भारत, चीन, और पाकिस्तान। इसमें से भी आपसी तालमेल जाहिर तौर पर कुछ ऐसा है कि चीन और पाकिस्तान के बीच कोई टकराव न आज है, न आने वाले दिनों में उसका कोई आसार दिखता है। इसलिए पाकिस्तान को महज भारत के खिलाफ फौजी तैयारी करनी पड़ती है। लेकिन भारत को पाकिस्तान के अलावा चीन के खिलाफ भी तैयारी रखनी है, और इसलिए भारत की फौज इतनी बड़ी भी है।
हमारा यह मानना है कि परमाणु हथियारों के इस जमाने में बहुत बड़ी थलसेना किसी काम की नहीं है, और समझदार देशों को अपने पड़ोसियों से रिश्ते ठीक रखकर फौजी खर्च घटाना भी चाहिए। पाकिस्तान तो अपनी अर्थव्यवस्था से परे अमरीका से मिलने वाली मदद से ही फौजी तैयारी बढ़ाता है, और देश की अर्थव्यवस्था चौपट पड़ी है। पाकिस्तान अपने भीतर के फौजी, साम्प्रदायिक, और आतंकी तनावों से अगर उबर सके, तो वह भारत के साथ तनाव घटा सकता है, और अपना खर्च भी खासा घटा सकता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय मामले इतने आसान नहीं रहते हैं जितने कि हम उनको देखना चाहते हैं। हो सकता है कि चीन भारत को उलझाए रखने के लिए पाकिस्तान को फौजी मोर्चे पर अधिक तैयारी के साथ डटाकर रखना चाहता हो। लेकिन भारत और पाकिस्तान ऐसे किसी तीसरे उकसावे या भड़कावे से दूर रहकर अपनी जनता को देखना चाहिए, न कि हथियारों के सौदागरों को फायदा पहुंचाकर दलाली और कमीशन खाने के।
इन दोनों ही देशों में आजादी से लेकर अब तक गरीबी और भुखमरी, कुपोषण और अशिक्षा का बुरा हाल है। लेकिन तनाव के चलते ये दोनों देश परमाणु ताकत बने हुए हैं, और शायद ये परमाणु ताकत रखने वाले दुनिया के सबसे गरीब देश भी हैं। ये ऐसे महंगे हथियारों के ऐसे ऊंचे जखीरों पर बैठे हुए देश हैं, जो कि केवल विकसित देशों के न्यूक्लियर क्लब के पास रहते थे। इन तमाम बातों को हम निहायत फिजूल मानते हैं, और यह सिलसिला थमना चाहिए। भारतीय सेना में अभी जो कसावट लाई जा रही है हम उसकी बारीकियों को नहीं समझते, लेकिन भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार ऐसी कोशिशें जारी रहना चाहिए और खर्च के साथ-साथ तनाव भी घटते जाने से दोनों देश एक-दूसरे के विकास में अधिक काम आ सकेंगे, और दोनों के बीच कारोबार से जनता का फायदा होगा। 

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