झूठ और नफरत को आगे बढ़ाने के पहले परख लें..

संपादकीय
1 जून  2016
पिछले दो-चार दिनों से लगातार सोशल मीडिया पर मुंबई के एक गरीब क्रिकेट खिलाड़ी प्रणव धनावड़े को टीम में न लेने की खबरें बनी हुई हैं। प्रणव ने एक स्कूली मैच में एक हजार रन बनाए थे, और मुंबई की अंडर-16 क्रिकेट टीम में सचिन तेंदुलकर के बेटे अर्जुन तेंदुलकर को लिया गया है। अब इसे लेकर सचिन पर, उनके बेटे पर लगातार हमले हो रहे हैं और एकलव्य की मिसाल दी जा रही है जिसका अंगूठा कटवाकर गुरू द्रोणाचार्य ने उच्च जाति के कुछ लोगों को आगे बढऩे का मौका दिलवाया था। लोग एक-दूसरे की पोस्ट की हुई बातों को और आगे बढ़ाते जा रहे हैं, और इस बीच हकीकत को कुचलकर खत्म कर दिया जा रहा है।
ऐसे झूठ की एक मिसाल देने के लिए इस मामले पर आज हम यहां लिख रहे हैं। इस बारे में प्रणव धनावड़े ने यह कहा है कि अर्जुन तेंदुलकर को इस टीम के लिए उस वक्त चुन लिया गया था जब उसने (प्रणव ने) हजार रन वाली पारी नहीं खेली थी। दूसरी बात यह कि इस टीम में आने के लिए मुंबई की तरफ से खेलना जरूरी था, और प्रणव के पिता ने एक टीवी चैनल पर कहा है कि उनके बेटे ने उस टीम से खेला ही नहीं था कि उसका चयन हो सकता। प्रणव ने यह भी कहा है कि अर्जुन तेंदुलकर बहुत मेहनती है, और उन्होंने साथ-साथ प्रैक्टिस भी की है, लेकिन उसका चयन अपनी प्रतिभा की वजह से हुआ है, न कि पिता की वजह से।
सोशल मीडिया पर झूठ को बदनीयत के साथ सोच-समझकर शुरू करने की, और फिर उसे आगे बढ़ाने की बहुत सी मिसालें हवा में तैरती हैं, और हम लोगों को ऐसी जालसाजी, धोखाधड़ी, और साजिशों से बचाने के लिए हर कुछ महीनों में नई मिसालों के साथ यहां पर लिखते हैं। अभी एक दूसरा झूठ फैलाया जा रहा है कि एक विख्यात शरबत, रूहअफ्जा बनाने वाली कंपनी हमदर्द के बहिष्कार के लिए लगातार सोशल मीडिया पर यह झूठ फैलाया जा रहा है कि इस कंपनी की दवाओं और इसके बाकी उत्पादों का बहिष्कार इसलिए किया जाना चाहिए कि इसमें हर कर्मचारी का मुस्लिम होना जरूरी है, और इसके डीलर बनने के लिए, डिस्ट्रीब्यूटर बनने के लिए भी मुस्लिम होना जरूरी है। और लोग इस झूठ को चारों तरफ फैलाए जा रहे हैं। दूसरी तरफ इस कंपनी में काम करने वाले ढेर सारे हिन्दू अफसरों ने इस झूठ के खिलाफ वीडियो बयान जारी किए हैं, और इस कंपनी की वेबसाइट को देखें तो इसके बहुत से विभागों में बहुत सी बड़ी कुर्सियों पर हिन्दू लोग काम कर रहे हैं। इन सबके नाम वेबसाइटों पर हैं, लेकिन झूठ फैलाने वाले इस बात को भी छुपा जाते हैं कि दशकों पहले राकेश नैय्यर और अब्दुल मुईद नाम के दो दोस्तों ने मिलकर हमदर्द नाम की इस कंपनी को आगे बढ़ाया था जिसे कि अब्दुलके पिता हकीम अब्दुल हमीद ने 1906 में शुरू किया था। अब एक  सदी से जिस कंपनी को हिन्दू और मुस्लिम दोनों कर्मचारियों और अधिकारियों ने मिलकर आगे बढ़ाया है, उसके आज इस तरह के साम्प्रदायिक बहिष्कार के पीछे की सोच तो जाहिर है ही, लेकिन जो लोग बिना जांचे-परखे ऐसे झूठ को आगे बढ़ाते हैं, वे लोग भी साम्प्रदायिक नफरत फैलाने के बराबरी के जिम्मेदार हैं।
आज इंटरनेट की मेहरबानी से हर किसी को यह सहूलियत हासिल है कि वे झूठ पर भरोसा करने के पहले उसे परख सकते हैं, और उसे आगे बढ़ाने के बजाय उसका भांडाफोड़ कर सकते हैं। लेकिन ऐसा न करके जब किसी जाति, धर्म, या रंग, नस्ल या क्षेत्र, देश के खिलाफ नफरत फैलाई जाती है, तो उसकी हिंसक प्रतिक्रिया भी झेलनी पड़ती है। जो झूठ यहां पर किसी दूसरे देश के लोगों के खिलाफ फैलाया जाता है, उसका भुगतान उस दूसरे देश में बसे हुए हिन्दुस्तानियों को तनाव की शक्ल में, हिंसा की शक्ल में झेलना पड़ता है।
इसलिए किसी भी नकारात्मक बात को, अपमानजनक बात को आगे बढ़ाने के पहले उसे परख लेने में ही समझदारी है। ऐसा न करके उसे आगे बढ़ाने वाले लोग अपने आपको गैरजिम्मेदार या उससे भी अधिक, मुजरिम साबित करते हैं। 

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