बालिग और नाबालिग मुजरिम के बीच फासले का क्या हो?

संपादकीय
5 जून  2016
दिल्ली में कुछ दिन पहले लापरवाही से कार चलाते हुए एक रईस नौजवान ने एक दूसरे नौजवान को कुचलकर मार डाला था। यह लापरवाह नौजवान मौके से फरार भी हो गया था। वह बालिग होने की उम्र से चार दिन छोटा था, और उसके खिलाफ नाबालिग किशोरों पर लगने वाले कानूनों के तहत ही मुकदमा चल सकता था। लेकिन किशोर न्याय बोर्ड ने एक फैसले में कहा कि घटना के वक्त और उसके बाद इस नाबालिग आरोपी का बर्ताव बताता है कि वह अपने ऊपर लगे आरोपों से पूरी तरह वाकिफ था, दूसरों की जिंदगी के प्रति बिल्कुल गंभीर नहीं था, और हादसे के दिन भी उसने जुर्म के नतीजों को समझने की समझ थी, इसलिए उसके खिलाफ बालिग की तरह मुकदमा चलाना ठीक होगा।
यह देश में अपनी तरह का अकेला मामला है लेकिन इस बारे में पिछले कम से कम दो बरस से देश में यह बहस चल रही है कि क्या कुछ किस्म के जुर्म के लिए बालिग होने की उम्र सीमा को घटाया जाए? लोगों को याद होगा कि जब दिल्ली में देश का सबसे चर्चित निर्भया बलात्कार हुआ, तो उसमें सबसे खूंखार बलात्कारी एक नाबालिग था, और वह कड़ी सजा से इसीलिए बच गया कि उसकी उम्र 18 बरस नहीं हुई थी। उस समय से इस बात को लेकर समाजशास्त्रियों, मानव शरीर के जानकार लोगों, मनोवैज्ञानिकों, और कानून के विशेषज्ञों के बीच बहस चल रही है कि किशोरावस्था के अपराधों में से किस नौबत में किसके कैसे अपराध के लिए उन्हें बालिग मान लिया जाए। और यह बहस बहुत आसान इसलिए नहीं है क्योंकि कुछ बहुत ही भयानक किस्म के अपराधों को देखकर जब ऐसी मांग उठती है, तो यह भी लगता है कि क्या समाज के व्यापक हित में ऐसी हड़बड़ी ठीक होगी?
लेकिन भारत को दुनिया के कुछ दूसरे देशों को देखना होगा जहां पर 14 बरस की उम्र से ड्राइविंग लाइसेंस दिए जाते हैं, कई जगहों पर 16 बरस की उम्र से वोट डालने की इजाजत या तो है, या उस पर विचार चल रहा है। दरअसल दुनिया में अब समझ और परिपक्वता की उम्र घटकर नीचे आ गई है। आज बच्चे जल्दी किशोर हो रहे हैं, और किशोर जल्दी बालिग समझ पा रहे हैं। इसलिए कई मामलों में उन्हें 18 बरस का इंतजार करवाना ठीक नहीं है, न ही उनके गाड़ी चलाने देने के लिए, और न ही उन्हें सजा पाने के लिए। आज भारत में दुपहिया गाड़ी चलाने के लिए भी किशोरों का 18 बरस का होना जरूरी है। लेकिन शायद ही कोई ऐसे लड़के-लड़की हों जो कि 16 बरस की उम्र के बाद दुपहिया न चलाते हों। आज स्कूल और उसके बाद की कोचिंग क्लास से लेकर खेल के मैदानों तक की भागदौड़ साइकिलों पर नहीं हो सकती, इसलिए स्कूली बच्चे भी स्कूटर-मोटरसाइकिल चलाते हैं। भारत को कम ताकतवर इंजन वाले दुपहियों के लिए 16 बरस की उम्र से ड्राइविंग लाइसेंस देने का एक सुधार करना चाहिए। इसी तरह कुछ अपराधों के लिए भी बालिग होने की सीमा को घटाकर 16 बरस करना ठीक होगा।
अभी दिल्ली का यह फैसला पता नहीं आगे की अदालत तक जाकर टिक पाएगा या नहीं, क्योंकि जिस रईस की औलाद किसी को कुचलकर, मारकर करोड़ों की गाड़ी लेकर भाग निकलती है, उस रईस के वकील बड़ी आसानी से ऐसा लागू नहीं होने देंगे। लेकिन इससे एक नई बहस जरूर छिड़ी है जो आगे तक जाएगी। जिसे मां-बाप की दी हुई महंगी और बड़ी गाड़ी चलाना आता है, वह 18 बरस से चार दिन छोटा होने की वजह से कमअक्ल या कमसमझ नहीं हो जाता। इसी तरह सेक्स-अपराध के मामले में 18 बरस से कम और 16 बरस से ज्यादा उम्र के लोगों के लिए एक अलग इंतजाम रहना चाहिए लेकिन उन्हें नाबालिग की रियायत देना बिल्कुल भी ठीक नहीं होगा। 

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