होनहार का हक छीनने वाले सस्ती सजा में न छूटा करें

संपादकीय
7 जून  2016
बिहार में स्कूल के आखिरी इम्तिहान के बोर्ड की मेरिट लिस्ट में सबसे ऊपर आए हुए एक लड़के और एक लड़की के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज की गई है। इन दोनों को जब मीडिया ने इंटरव्यू किया तो इन्हें अपने विषयों की जानकारी भी नहीं थी, और नाम भी नहीं मालूम थे। ऐसे में सरकार ने जांच करवाई तो पता लगा कि घपला करके इन दोनों को मेरिट में अव्वल लाया गया था। अब सरकार इनके, स्कूलों के, और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, और उनका रिजल्ट रद्द कर दिया गया है।
सवाल यह उठता है कि जो नीतीश कुमार बिहार से भ्रष्टाचार घटाने के नाम पर  सत्ता पर लौटकर आए थे, वहां पर ऐसा संगठित अपराध फिर कैसे होने लगा, जिसमें होनहार बच्चों का हक छीनकर ताकतवर मां-बाप अपने जाहिर तौर पर कमअक्ल बच्चों को मेरिट में अव्वल ला रहे हैं? देश की एक सामान्य जनधारणा को देखें तो बहुत से लोग यह मान रहे होंगे कि लालू यादव के सरकार में आ जाने के बाद अब ईमानदारी की गुंजाइश नीतीश सरकार में बचेगी भी कैसे? यह कुछ उसी तरह की बात है कि मनमोहन सिंह तो एक सज्जन प्रधानमंत्री माने जाते थे, लेकिन उनके मंत्रिमंडल में एक से बढ़कर एक मुजरिम मंत्री थे जो कि अव्वल दर्जे के संगठित भ्रष्टाचार में लगे हुए थे, और मनमौन सिंह यह सब देखते हुए चुप्पी साधे रखते थे। यूपीए-2 सरकार का कार्यकाल ऐसा था जिसमें प्रधानमंत्री को छोड़ बाकी तमाम देश को मंत्रियों के भ्रष्टाचार मालूम थे, और दिख रहे थे। ऐसी अनदेखी करने के लिए मनमोहन सिंह की जगह जेल छोड़ और कुछ नहीं हो सकती थी, लेकिन उनकी साख उनको अब तक बचा ले गई है, लेकिन आगे क्या होगा यह तो वक्त ही बताएगा।
फिलहाल हम भ्रष्टाचार के घिसे-पिटे मुद्दे पर एक बार और नहीं लिख रहे हैं, हम पढ़ाई में होने वाले घोटाले को लेकर बात करना चाहते हैं क्योंकि इसी बिहार की वे तस्वीरें दुनिया भर में कुख्यात हैं जिनमें नकल करवाने के लिए दर्जनों लोग इमारत पर बाहर से चढ़कर अपने लोगों की मदद कर रहे हैं। और अकेले बिहार की क्यों बात करें, मध्यप्रदेश में इतना बड़ा व्यापम घोटाला हुआ है जिसमें लाखों होनहार बच्चों के हक छीनकर राजनीति और पैसों की ताकत रखने वाले उन चुनिंदा सैकड़ों लोगों को मेडिकल दाखिला दिया गया जो कि आज अदालती निगरानी में चल रही जांच में फंसे हुए हैं। छत्तीसगढ़ में इतना बड़ा न सही, लेकिन छोटा-मोटा पीएमटी-पर्चा आउट होने की जांच चल ही रही है।
हमारा ख्याल है कि होनहार और मेहनतकश बच्चों का हक छीनने में जो बड़े लोग लगे रहते हैं, वैसे ताकतवर-बालिग लोगों के लिए अधिक बड़ी सजा का इंतजाम किया जाना चाहिए। ऐसा न होने पर लोकतंत्र और न्याय पर से लोगों को भरोसा उठते जा रहा है, और लोग सरकार के खिलाफ एक हिकारत और नफरत पाल चुके हैं कि कोई भी काम ईमानदारी से होता नहीं है, और ईमानदार का कोई हक रहता नहीं है। देश के लिए ऐसी नौबत बहुत ही शर्मनाक है, और भारत का अगर यही हाल रहा तो दुनिया भर में मेड-इन-इंडिया डिग्री की भी कोई इज्जत नहीं रहेगी, और ऐसी डिग्री तक पहुंचने वाले लोग भी देश के सबसे होनहार बच्चे नहीं रहेंगे।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें