इससे न मायावती का नुकसान, न वेश्या का

संपादकीय
21 जुलाई  2016
उत्तरप्रदेश में चुनाव के ठीक पहले एक तरफ तो भाजपा दलितों को साथ जोडऩे के रास्ते ढूंढ रही है, और दूसरी तरफ उसके प्रदेश उपाध्यक्ष ने देश की सबसे बड़ी दलित राजनेता मायावती के बारे में सार्वजनिक बयान दिया कि वे वेश्या से भी गई बीती हैं। संसद के भीतर भाजपा के एक बड़े मंत्री को इस पर खेद जताना पड़ा, और पार्टी के इस बकवासी नेता को छह बरस के लिए पार्टी से निलंबित करना पड़ा। लेकिन जो नुकसान होना था, वह तो हो चुका है, और यह नुकसान अभी थमने वाला भी नहीं है, क्योंकि गुजरात में दलितों को जिस तरह से गौरक्षकों ने पुलिस की मेहरबानी से मारा है, वह दुनिया के सामने है, वहां दलित उबले हुए हैं, और सड़कों पर हैं। दूसरी तरफ कई महीनों से हैदराबाद यूनिवर्सिटी के रोहित से लेकर जेएनयू के छात्रों तक के खिलाफ स्मृति ईरानी ने जो कुछ किया था, उसे लेकर भी दलित खफा चल ही रहे थे। और कल ही शायद इस जगह पर हमने गोमांस पर रोक को लेकर यह लिखा ही है कि किस तरह इससे देश की एक बड़ी आबादी नाराज है।
लेकिन सवाल यह है कि भाजपा का एक के बाद एक नेता अगर लगातार इस तरह की हिंसक और हमलावर बयानबाजी जारी रखेगा, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विकास और आर्थिक आत्मनिर्भरता का एजेंडा कहां जाएगा? कल जब यह आग लगी ही हुई थी, तो इसी उत्तरप्रदेश में अपनी साम्प्रदायिकता के लिए कुख्यात भाजपा के एक विधायक संगीत सोम ने आजम खां के बनवाए विश्वविद्यालय को लेकर बयान दिया कि वह आतंक का अड्डा है, इस यूनिवर्सिटी को आतंकियों की फौज तैयार करने के लिए बनाया गया है। अब एक तरफ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ रमजान के मौके पर इफ्तार दावत रख रहा है, और मुस्लिमों के साथ बातचीत को आगे बढ़ाना चाहता है, दूसरी तरफ भाजपा के मंत्री, सांसद, विधायक, और पदाधिकारी एक दिन भी बिना किसी नई आग के पार नहीं होने देते हैं। फिर भाजपा से जुड़े हुए दूसरे संगठन इसी तरह के कई हमलावर काम कर रहे हैं। पंजाब में कश्मीर के मुस्लिम ट्रक ड्राइवरों की गाडिय़ों को रोका गया, उन्हें उतारा गया, उनसे पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगवाए गए, भारत माता जिंदाबाद के नारे लगवाए गए, और पाकिस्तान के झंडे उनसे जलवाए गए। यह पूरा सिलसिला देश के भीतर एक निहायत गैरजरूरी तनाव और टकराव खड़ा कर रहा है, और एक तरह का बंटवारा कर रहा है।
लेकिन हम फिर मायावती को दी गई गाली पर लौटें, तो हिन्दू संस्कृति और भारतीय संस्कृति की रात-दिन दुहाई देने वाली भाजपा के इतने बड़े-बड़े नेता अगर  देश की सबसे बड़ी दलित नेता मायावती के बारे में ऐसी गंदी बातें कैमरों के सामने कहते हैं, तो इससे उन्हीं के कंधों पर उठाए हुए हिन्दू धर्म, और उन्हीं के कंधों पर उठाई हुई भारतीय संस्कृति, दोनों की बेइज्जती होती है। किसी भी धर्म या संस्कृति की पहचान उसका झंडा लेकर चलने वाले लोगों के काम से होती है। इस्लाम के नाम पर गैरलोकतांत्रिक देशों में आतंकी खून-खराबे करने वाले लोग खून कम बहाते हैं, इस्लाम का नाम अधिक बदनाम करते हैं। और वैसा ही काम हिन्दुस्तान में हिन्दू धर्म का नाम लेकर राजनीति करने वाले लोग करते हैं, जब वे देश के एक प्रमुख नेता को वेश्या से गई बीती कहते हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उनकी पार्टी, और पार्टी के साथ जुड़े हुए आरएसएस जैसे संगठनों को चाहिए कि अपने साथियों की ऐसी बदजुबानी को बंद करवाने का इंतजाम करें, क्योंकि इससे न मायावती का कोई नुकसान, न वेश्या का कोई नुकसान है, नुकसान है तो ऐसी बकवासियों के संगठनों का ही है। वेश्या तो महज अपनी देह बेचती है, न कि ऐसे बकवासी नेताओं की तरह देश की शांति बेचती है। 

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