...अमरीकी का वोट इस बार पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा

संपादकीय
28 जुलाई  2016
अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने हिन्दुस्तानी समय के मुताबिक आज सुबह अपनी पार्टी के राजनीतिक सम्मेलन में भारी गर्मजोशी के माहौल में जिस दरियादिली के साथ पार्टी की अगली राष्ट्रपति-प्रत्याशी हिलेरी क्लिंटन की तारीफ की, वह देखने लायक था। हिन्दुस्तान की राजनीति में कभी यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि कोई प्रधानमंत्री अगले चुनाव के पहले अपनी पार्टी के किसी और नेता की ऐसी तारीफ करे और इसकी एक सबसे बड़ी वजह यह है कि हिन्दुस्तान में लोग मरने तक प्रधानमंत्री रह सकते हैं, कई लोग रहे भी हैं। जबकि अमरीकी कानून के मुताबिक वहां एक राष्ट्रपति चार बरस के दो कार्यकाल के बाद किसी भी सरकारी पद पर नहीं आ सकते। इसका नतीजा यह होता है कि लोग अधिकतम 8 बरस के राष्ट्रपति-कार्यकाल के बाद के लिए दिमागी रूप से तैयार रहते हैं कि उन्हें क्या करना है। अधिकतर राष्ट्रपति रिटायर होने के बाद कोई न कोई ट्रस्ट या फाउंडेशन बनाकर अपने विश्वविद्यालय या अपने राज्य के लिए समाजसेवा का कोई बड़ा प्रोजेक्ट शुरू करते हैं, और उनके समर्थक-प्रशंसक उसके लिए चंदा देते हैं। अमरीका में राष्ट्रपति का यह चुनाव एक नया इतिहास इसलिए भी रच रहा है कि हिलेरी क्लिंटन पहली महिला राष्ट्रपति बन सकती हैं। एक अश्वेत बराक ओबामा के बाद एक महिला का राष्ट्रपति बनना एक बड़ा ऐतिहासिक फैसला हो सकता है। इसके अलावा हिलेरी के पति बिल क्लिंटन भी राष्ट्रपति रह चुके हैं, और राष्ट्रपति की जीवनसाथी का राष्ट्रपति बनना भी पहली बार ही शायद होने जा रहा है। फिलहाल जो बात लिखने की है वह यह कि बराक ओबामा ने जिस दरियादिली के साथ हिलेरी की खूबियां गिनाई हैं, वह भारतीय राजनीति में एक अनदेखा और अनसुना काम है।
लेकिन डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर के ऐसे परस्पर-तारीफ के रिश्तों को छोड़ दें, तो एक दूसरी बात सोचने की यह है कि आज दुनिया भर में इस्लामी आतंक के चलते हुए योरप सहित कई पश्चिमी देश जिस तनाव से गुजर रहे हैं, उसमें रिपब्लिकन पार्टी के डोनाल्ड ट्रंप शायद अमरीकी इतिहास के सबसे बड़े युद्धोन्मादी उम्मीदवार हैं, जो कि रंग की नफरत, नस्ल की नफरत, गरीबी से नफरत, प्रवासियों से नफरत, महिलाओं से नफरत, निहत्थों से नफरत, मजदूरों से नफरत, और इस्लाम धर्म से नफरत के साथ मैदान में हैं, और जैसा कि आज सुबह ओबामा ने गिनाया है, डोनाल्ड ट्रंप अमरीकियों में दहशत पैदा करके, उन्हें डराकर जीत तक पहुंचना चाहते हैं। ऐसे नफरतजीवी डोनाल्ड ट्रंप को देखते हुए दुनिया के बाकी लोगों को भी यह समझना चाहिए कि ऐसी नफरत अमरीका में हो या कि किसी और देश में, वह किसी दूसरे देश पर हमला करने के लिए हो, या कि अपने ही देश के लोगों के खिलाफ हो, वह दुनिया के लिए एक नया खतरा लेकर आ रही है, और इसे आज की दुनिया में पैदा करने के लिए दो कार्यकाल पहले के अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश, और उनके ब्रिटिश सहयोगी प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर को जिम्मेदार के तौर पर इतिहास में दर्ज किया गया है। अमरीकी लोगों के सामने यह एक बड़ा मौका है कि वे अमरीका की विविधता वाली संस्कृति का सम्मान करते हुए डोनाल्ड ट्रंप को खारिज करें। ऐसी नफरत और ऐसे युद्धोन्माद के साथ ट्रंप अमरीकी लोगों के लिए एक बहुत खतरा ही बनकर आए हैं, और अगर उन्हें अमरीका में जीत मिलती है तो बाकी दुनिया के नफरजीवी लोग भी ताकत पाएंगे। इसलिए अमरीकी वोटरों का इस बार का वोट न सिर्फ अमरीका को प्रभावित करेगा, बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें