ऐसे हिंदुस्तान का तो ऊपरवाला ही मालिक

संपादकीय
3 जुलाई  2016
पंजाब के एक आम आदमी पार्टी विधायक के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज किया है कि उसने किसी को एक करोड़ रुपए में एक धार्मिक ग्रंथ जलाने का ठेका दिया था। अकाली दल की सरकार की पुलिस ने जुर्म दर्ज कर लिया है और ऐसी आशंका है कि जल्द ही इस विधायक की गिरफ्तारी हो सकती है। जहां तक हमारी आम समझ साथ देती है, तो हमें यह बात गले नहीं उतरती कि ऐसा काम करने के लिए कोई विधायक इतनी बढ़ी रकम का ठेका देगा। और यह आशंका अधिक लगती है कि पंजाब में सामने खड़े चुनावों को देखते हुए कोई साजिश ऐसी शिकायत के पीछे हो।
हिन्दुस्तान की हालत देखें तो लगता है कि यह देश बारूद के ढेर पर बैठा हुआ है। चार दिन पहले ही छत्तीसगढ़ के कवर्धा में एक शिवलिंग तोड़़ दिया गया और भारी तनाव खड़ा हो गया। बड़े-बड़े अफसरों को जाकर वहां डेरा डालना पड़ा और हालात मरने-मारने के हो चुके थे। यह तो कवर्धा की जिला पुलिस ने तेजी से काम करके एक हिंदू नौजवान पुजारी को गिरफ्तार किया जिसने कि कोई सिद्धि प्राप्त करने के लिए शिवलिंग को तोड़ा था। अब सवाल यह है कि इस पूरे देश में हर एक-आधी मील पर कोई न कोई धर्मस्थल है जो कि बिना किसी हिफाजत के है। ऐसे में किसी भी जगह किसी जानवर को मारकर फेंकना साम्प्रदायिक दंगा भड़काने के लिए काफी है। अलग-अलग धर्म अलग-अलग जानवरों को लेकर भारी संवेदनशील हैं, और अलग-अलग धर्मों के गं्रथ भी ऐसे हैं कि उनके कुछ पन्नों को सड़क पर फेंककर या आग लगाकर दंगा फैलाया जा सकता है। इनमें से कोई भी बात हिफाजत में नहीं आ सकती। धार्मिक किताबें बाजार में हैं, लावारिस जानवर सड़कों पर हैं, और धर्मस्थल खुले हुए हैं। ये तीन चीजें मिलकर देश के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन सकती हैं, और शरारत या साजिश करने वाले लोग, या कोई सिरफिरे या विक्षिप्त लोग अनजाने में भी ऐसी हरकत कर सकते हैं जिससे कि दंगा हो जाए।
भारत को धर्मांधता से, कट्टरता और अंधविश्वास से उबरना होगा। लेकिन हालत यह है कि नेहरू के वक्त से लेकर आज तक लगातार देश में अंधविश्वास बढ़ा है, और नेताओं ने, पार्टियों ने थोक में धर्मांधता भी बढ़ाई है। नेहरू ने हिंदुस्तानियों में जो वैज्ञानिक सोच विकसित करने की कोशिश की थी, उसे उनकी बेटी भी आगे नहीं बढ़ा पाई। और जब इंदिरा गांधी ने जाकर मचान पर टंगे हुए देवरहा बाबा के पांव तले अपना सिर रखा था, तब यह जाहिर हो गया था कि नेहरू का युग इस देश में खत्म हो गया। और आज तो हाल यह है कि बड़े-बड़े नेता और बड़ी-बड़ी पार्टियां लगातार लोगों के बीच कट्टरता को बढ़ाते हुए दिखती हैं। यह देश धर्म में डूबा हुआ देश है, और 21वीं सदी में पहुंचने से इनकार कर रहा है। इसके लोगों को लगातार कट्टरता में भिगाकर रखा जा रहा है, और ये लोग पेट्रोल में भीगे हुए खतरनाक लोगों की तरह हैं, और ये बारूद के ढेर पर बैठे हुए हैं। ऐसे देश का, आस्थावान लोगों की जुबान में, ऊपरवाला ही मालिक है।

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