अमरीका के कहने के बाद तो अपनी असहिष्णुता देखें

संपादकीय
30 जुलाई  2016
अमरीकी सरकार ने भारत से कहा है कि वह अपने देश में बढ़ती हुई असहिष्णुता पर काबू करने की कोशिश करे। अमरीकी विदेश विभाग के प्रवक्ता से यह सवाल पूछा गया था कि भारत में जिस तरह से गोमांस और गाय से जुड़े हुए मुद्दों पर हिंसा हो रही है उस पर अमरीका का क्या कहना है? इस पर अमरीका ने कहा कि हिंसा और असहिष्णुता की खबरों से वह फिक्रमंद है, और भारत और अमरीका दोनों के हितों में भारत में सहिष्णुता बढ़ाने के लिए अमरीका मदद करने को तैयार है।
भारतीय मीडिया में लगातार पिछले दो बरस से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस बारे में आगाह किया जा रहा है कि देश में असहिष्णुता बढ़ती जा रही है और इसके पीछे मोदी के ही साथी, और साथी-संगठन जिम्मेदार हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने अब तक दर्जन भर बार अपने मन की बात रेडियो-टीवी पर तो बोली, लेकिन इन घटनाओं के बारे में उन्होंने मुंह भी नहीं खोला है और इसे लेकर दुनिया हैरान भी है। जिन हिंसक हमलों को लेकर भारत के लोगों का दिल दहला हुआ है, और भारत में लगातार एक धार्मिक और सामाजिक करार गहरी और चौड़ी होती जा रही है, उस बारे में प्रधानमंत्री का कुछ भी न कहना उतना ही फिक्रमंद है जितना कि हिंसा की ये घटनाएं हैं। ऐसे में अमरीका ने चाहे एक सवाल के जवाब में यह बात कही हो, लेकिन यह बात कोई दबी-छुपी नहीं है कि भारत में बढ़ती हुई धर्मान्धता, और हिंसा-नफरत को बाकी देश भी गौर से देख रहे हैं, और हैरान भी हो रहे हैं।
हम खुद दर्जन भर बार इसी जगह पर लिख चुके हैं कि मुट्ठी भर लोगों के सनातनी-पवित्रतावादी खानपान को लेकर बाकी देश पर इस तरह की बंदिशें लादना अलोकतांत्रिक तो है ही, जिस तरह से भाजपा के राज वाले राज्यों में गौरक्षा के नाम पर हमलावर हिन्दू तबका कानून अपने हाथ में लेकर सड़कों पर कैमरों के सामने हिंसा कर रहा है, उससे पूरा देश हिला हुआ है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमरीका से बड़ी मित्रता है, और इसलिए यह उम्मीद की जानी चाहिए कि अब अमरीकी विदेश विभाग के कहने के बाद शायद भारत इस हिंसा को गंभीरता से लेगा। फिलहाल हम इस बात को याद दिलाना जरूरी समझते हैं कि गाय-भैंस के मांस से, उनकी खाल और हड्डियों से, देश की आबादी का एक बहुत बड़ा हिस्सा जुड़ा हुआ है, और यह हिस्सा सिर्फ मुस्लिम या सिर्फ अल्पसंख्यकों का नहीं है, इसमें दलित, आदिवासी, और हिन्दू समाज के भी कई तबके शामिल हैं, और इससे देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो रही है, और देश में एक बड़ा विभाजन खड़ा हो रहा है।

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