दूसरी जगहों के हादसों से सबक ले अपने को बचाएं

संपादकीय
9 जुलाई  2016
इंडोनेशिया में ईद के मौके पर लोगों की भीड़ सड़कों पर इतनी रहती है कि हाईवे पर इक्कीस किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम तीन दिन से अधिक चलते रहा, और इसमें फंसे लोगों में से बारह लोगों की मौत हो गई, जिनमें बुजुर्ग अधिक थे। हालांकि यह ट्रैफिक जाम दुनिया का सबसे बड़ा कहा जा रहा है, लेकिन लंबाई अधिक न हो, तो भी कई जगहों पर ऐसी नौबत आती है, और यह जरूरी नहीं कि तीन दिन जाम रहने पर भी लोग मरें।
एक जगह के हादसे से बाकी लोगों को सबक लेना चाहिए, और जिस किस्म का हादसा हुआ है, उससे परे के सबक भी लेने चाहिए। हम अपने आसपास छत्तीसगढ़ को ही देखें, तो यहां बस्तर में केसकाल की घाटी में कई बार एक-एक दिन लंबा ट्रैफिक जाम हो चुका है। भारत में और जगहों पर भी लोग इस तरह फंस चुके हैं। इससे कारों में या दूसरी गाडिय़ों में सड़क पर चलने वाले लोगों को ये सबक लेना चाहिए कि मुसीबत में फंसने पर कम से कम एक-दो दिन गुजारने के लायक कुछ ऐसा सूखा और पैक खाना-पीना रखना चाहिए जिसे कि हर कुछ हफ्तों या महीनों के बाद इस्तेमाल करके, उसकी जगह नया सामान रख लिया जाए। हर लंबे सफर में इतना पानी साथ रखना चाहिए कि कम से कम एक दिन तो उसके सहारे गुजर जाए, क्योंकि दो शहरों के बीच, ढाबों से दूर अगर कहीं गाड़ी बिगड़े या ट्रैफिक जाम हो जाए, तो प्यासे न मरना पड़े। इसी तरह गाड़ी में मोबाइल फोन का चार्जर रखना न भूलें, छोटी-मोटी चोट के इलाज के लिए फस्र्टएड किट रखना कानूनी रूप से भी जरूरी है, लेकिन शायद ही कोई इसका ख्याल रखते हों। इसके अलावा एक टॉर्च रखना ही रखना चाहिए क्योंकि अंधेरे में किसी खराबी या हादसे के वक्त वह जान बचा सकती है। आज कल हाईवे के किनारे की दवा दूकानों पर भरोसा करते हुए लोग बिना पूरी दवा रखे रवाना हो जाते हैं, लेकिन रास्ते में कोई शहर बंद हो, या शहर के पहले ही गाड़ी बिगड़े, या ट्रैफिक जाम हो, तो दवा कहां से मिलेगी?
यह बात लोगों को बड़ी मामूली लग सकती है, और यह भी लग सकता है कि विचारों को लिखने के इस कॉलम का ऐसा हल्का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है। लेकिन हमारे हिसाब से जिंदगी को बचाने वाली बातें चाहे दिखने में बड़ी सहज लगती हों, वे हल्की बात नहीं रहतीं, और भारी महत्व की रहती हैं। इसलिए हमारी यह सिफारिश भी है कि लोगों को शहर के बाहर के लंबे सफर पर जाते हुए ऐसी बहुत सी बातों को ध्यान से देखना चाहिए, बजाय रास्ते पर मिल सकने वाली सहूलियतों पर भरोसा करने के। जिन लोगों को बहुत अधिक गर्म इलाके में सफर करना हो, उन्हें लू से बचने के इंतजाम करके चलना चाहिए और उसके हिसाब से खाना-पीना भी रखना चाहिए। जिन लोगों को बहुत ठंड में सफर करना है, उन्हें कारों के हीटर पर भरोसा करने के बजाय कंबल या गर्म कपड़े भी रखना चाहिए, क्योंकि अगर कार ही खराब हो गई, तो उसका हीटर कहां से काम करेगा? जब कभी किसी दूसरी जगह हादसे होते हैं, तो उनसे सबक लेना भी सीखना चाहिए।

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