भारत के नेता-मीडिया से लेकर डोनाल्ड ट्रम्प तक

संपादकीय
23 अगस्त  2016
सार्वजनिक जीवन के लोग किस-किस तरह की बकवास करते हैं इसकी मिसाल के बिना एक दिन भी नहीं गुजरता। पी वी सिंधु अपने प्रशिक्षक गोपीचंद के साथ रियो ओलंपिक से हिंदुस्तान के लिए एक इतिहास रचकर लौटी और उसके आते ही उसके प्रदेश तेलंगाना के उप मुख्यमंत्री ने परले दर्जे की बेवकूफी और घमंड का बयान दिया कि राज्य सरकार सिंधु के लिए नए प्रशिक्षक का इंतजाम करेगी। सत्ता पर बैठे हुए लोगों की बददिमागी और बेदिमागी की यह एक मिसाल है। न तो सिंधु ने नए प्रशिक्षक की जरूरत बताई है, और न ही खेल को समझने वाले किसी भी और इंसान ने ऐसा कहा है। लेकिन सरकार में बैठे उप मुख्यमंत्री अगर खेल के इतिहास में अपना कुछ जोड़ न सकें, तो उन्हें तसल्ली कैसे होगी? और यह बात ऐसे मौके पर एक बहुत बड़ा अपमान भी उस प्रशिक्षक का है जिसने आग में तपाकर सिंधु नाम के सोने को ऐसा खरा किया कि दोनों ने देश का नाम रौशन किया।
लेकिन गंदगी की बातें करने में नेताओं का कोई एकाधिकार तो है नहीं, इसलिए देश के एक बड़े अखबार ने अभी गोपीचंद की पत्नी के एक इंटरव्यू में एक ऐसी सुर्खी लगाई कि उससे मीडिया का तमाम इज्जतदार तबका पानी-पानी हो गया। गोपीचंद की पत्नी भी अपने वक्त की एक राष्ट्रीय बैडमिंटन खिलाड़ी रही हुई है, और उसने यह कहा कि जब वह खेलती थी तब उन्हें गोपीचंद जैसा प्रशिक्षक नसीब नहीं था। इस बात को इस बड़े अंगे्रजी अखबार ने यह शीर्षक बनाकर छापा- सिंधु के पास वह है, जो मेरे पास नहीं था, मेरा पति।
यह बात इस बेहूदे और सनसनीखेज अंदाज में छापी गई है कि मानो गोपीचंद की पत्नी सिंधु से कोई सौतिया डाह रखती है। जबकि इंटरव्यू में महज खेल की बातें हैं, और यह तो एक तथ्य है ही कि जब गोपीचंद की पत्नी लक्ष्मी खेलती थीं, तो उन्हें गोपीचंद जैसा प्रशिक्षक नहीं मिला हुआ था। इसलिए गंदगी फैलाकर, सनसनी फैलाकर जब दर्शक या पाठक जुटाने की बात आती है, तो देश के मीडिया का लीडर होने का दावा करने वाला टाईम्स ऑफ इंडिया भी अपनी वेबसाईट पर किसी भी प्रमुख महिला की तस्वीर के साथ यह चीखती हुई बात लगाता है कि उसका सीना दिख रहा है। इसलिए मीडिया हो या राजनीति, गंदगी और सनसनी फैलाकर लोगों को ध्यान खींचने से किसी को परहेज नहीं है, और इसका खासा तगड़ा मुकाबला दोनों में चलते रहता है।
अभी उत्तर-भारत में एक सड़क पर गाड़ी रोककर लोगों को उतारकर परिवार की लड़की-महिला के साथ हुए बलात्कार के बाद जिस अंदाज में उत्तर-भारत और दिल्ली के इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने उस परिवार के लोगों की शिनाख्त जाहिर करते हुए, उनका घर-चेहरा दिखाते हुए बार-बार बलात्कार का जिक्र करते हुए, उस बारे में और बताओ-और बताओ के अंदाज में पूछते हुए जैसी पत्रकारिता दिखाई है, उसकी मीडिया के गंभीर और ईमानदार तबके में खासी आलोचना हो रही है।
लेकिन हिंदुस्तान से लेकर अमरीका के डोनाल्ड ट्रम्प तक जिस तरह की गंदगी लोगों के दिल और दिमाग से निकलकर मीडिया के रास्ते तमाम लोगों तक पहुंचती है उससे जाहिर होता है कि इंसानों का असली मिजाज, अधिकतर या कुछ कम गिनती में इंसानों का असली मिजाज ऐसी गंदगी का ही रहता है, और उनमें से कुछ लोग इससे उबरकर बेहतर इंसान बन पाते हैं, बाकी गंदगी फैलाते हैं, और गंदगी का ही मजा लेते हैं।

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