बलात्कार और बकवास

संपादकीय
3 अगस्त  2016
उत्तरप्रदेश में सड़क सफर कर रहे एक परिवार को रोककर अपराधियों ने लूटा और महिलाओं से बलात्कार किया। इसे लेकर एक तरफ तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने जिले के तमाम बड़े अफसरों को बेदखल कर दिया है, लेकिन दूसरी तरफ उनकी पार्टी के एक बड़बोले मंत्री आजम खान ने कहा है कि इस घटना के पीछे राजनीतिक साजिश हो सकती है। लोगों को याद होगा कि ममता बैनर्जी के मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक बलात्कार हुआ था, और पुलिस की जांच शुरू ही पहले ममता ने उसे अपनी सरकार को बदनाम करने के लिए राजनीतिक साजिश करार दिया था, और बाद में उन्हीं की पुलिस ने उस मामले में लोगों को गिरफ्तार करके अदालत से सजा भी दिलवाई थी। अब आजम खान का यह कहना कि वोटों के लिए लोग किसी भी स्तर तक गिर सकते हैं, और जब मुजफ्फरनगर हो सकता है, शामली और कैराना हो सकता है तो यह क्यों नहीं हो सकता। जाहिर है कि ऐसे संवेदनाशून्य बयान पर इस बलात्कार की शिकार नाबालिग के पिता ने जवाब में यह सवाल किया है कि क्या आजम खान के परिवार के साथ ऐसी घटना होती तब भी क्या वे ऐसी बात कहते?
भारत में न सिर्फ राजनीति, बल्कि जिंदगी के किसी भी दायरे में ताकत पा जाने वाले लोगों में से कुछ लोग इतने बददिमाग हो जाते हैं, कि वे न सिर्फ बेदिमागी की, बल्कि हिंसा की भी बातें करने लगते हैं। हम पहले भी इसी कॉलम में लिख चुके हैं कि ऐसी हिंसक और ओछी बकवास के खिलाफ मानवाधिकार आयोग, महिला आयोग जैसे राज्य और केन्द्र के संवैधानिक संगठनों को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए, और अदालतों को भी ऐसे हिंसक बयानों पर नोटिस जारी करना चाहिए। लेकिन राजनीति में एक-एक करके अधिकतर पार्टियों के लोग गंदगी की बातें करते आए हैं, और हरेक के सामने गंदगी के लिए दूसरी पार्टियों और दूसरे नेताओं की मिसाल मौजूद रहती है। लेकिन हमारा मानना है कि सार्वजनिक जीवन के लोगों को ऐसे मामलों पर चुप रहने के बजाय खुलकर बोलना चाहिए, और जब कभी ऐसे बकवासी नेता चुनाव मैदान में रहें, उनके खिलाफ एक अभियान भी छेडऩा चाहिए। किसी नेता के पेट पर लात दो ही मौकों पर पड़ सकती है, जब उसका वोट कमाने का मौका हो, या जब उसका नोट कमाने का मौका हो।
लेकिन बलात्कार को भारत में बहुत से लोग कॉर्टून और लतीफों का सामान भी मान लेते हैं और हमारा मानना है कि सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों का बहिष्कार होना चाहिए। देश की जनता की सामाजिक-राजनीतिक चेतना का दीवाला ऐसा निकला हुआ है कि सलमान खान बलात्कार का मजाक बनाता है, और उसकी फिल्म हिट हो जाती है, जो कि जाहिर है कि महिला दर्शकों के बिना नहीं हो सकती, और ऐसे आदमियों के बिना भी नहीं हो सकती जिनको किसी महिला ने जन्म दिया है। इसलिए जब तक देश की जनचेतना हिंसक बयानों के खिलाफ नहीं होगी, तब तक नेताओं की बेशर्मी जारी रहेगी। हम अगर उत्तरप्रदेश या देश के महिला आयोग की कुर्सी पर होते तो आजम खान को नोटिस जारी करते, और अगर उत्तरप्रदेश या देश की सबसे बड़ी अदालत के जज होते, तो भी आजम खान को बिना किसी रिपोर्ट के अदालती कटघरे में खींच लाते।

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