सेक्स-वीडियो के हीरो पर पहला पत्थर वे चलाएं...

संपादकीय
1 सितंबर 2016
दिल्ली में कल आम आदमी पार्टी की सरकार के एक मंत्री को उनकी कुछ निजी सेक्स-वीडियो, और तस्वीरें सामने आने पर सरकार से बर्खास्त कर दिया गया, और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने बड़ी शर्मिंदगी के साथ कहा है कि किसी के चेहरे पर यह लिखा नहीं होता कि वह गलत है। उनकी पार्टी ने कहा कि यह सीडी मिलते ही आधे घंटे के भीतर इस मंत्री को हटा दिया गया। दूसरी तरफ इस मंत्री ने अपने बचाव में कहा है कि वह दलित समुदाय का है, इसलिए उसके खिलाफ ऐसी साजिश की गई है।
अभी तक जो वीडियो-रिकॉर्डिंग और तस्वीरें खबरों में देखने मिली हैं, उनसे यह तो नहीं लग रहा है कि इस मंत्री ने अपने पद का बेजा इस्तेमाल करते हुए महिलाओं का शोषण किया है। अगर वैसा होता है, या किसी भी महिला की तरफ से यह शिकायत आती है कि इस मंत्री ने उस पर दबाव डालकर ऐसा किया, तो उसके लिए देश के कानून में अलग से कड़ी कैद का इंतजाम भी है। लेकिन दूसरी तरफ जैसा कि कुछ समाचार चैनलों का यह विश्लेषण है कि इस मंत्री ने खुद ही अपनी ऐसी रिकॉर्डिंग की, तस्वीरें खींचीं, तो यह एक अलग मामला बनता है। लोग अपने निजी जीवन की सेक्स की रिकॉर्डिंग कर सकते हैं, उसमें कोई जुर्म नहीं है, जुर्म वहां शुरू होता है जहां पर वह रिकॉर्डिंग करने वाले ही उसका किसी तरह का इस्तेमाल करते हैं, उसे बेचते या बांटते हैं, या शायद उसे दूसरों को भेजने पर भी रोक है। यह बात तो जांच के बाद सामने आएगी, लेकिन फिलहाल यह मामला इसलिए भी अधिक गंभीर लगता है कि केजरीवाल राजनीति में एक अलग तरह की ईमानदारी और पारदर्शिता का नारा लगाते हुए सत्ता तक पहुंचे हैं, और वे देश में महज अपने आपको, महज अपनी पार्टी को ईमानदार मानते हैं, इसलिए उन पर, उनके लोगों पर ईमानदारी और नैतिकता सभी तरह के पैमाने कुछ अधिक कड़ाई से लागू भी होते हैं। और फिर जो मंत्री इस सेक्स रिकॉर्डिंग में पकड़ाया है, वह दिल्ली सरकार का महिला एवं बाल विकास मंत्री भी था, और उससे महिलाओं के प्रति एक संवेदनशील और सम्मान के नजरिए की उम्मीद भी की जाती थी। उसने खुद ही सार्वजनिक रूप से यह कहा था कि उसके मन में महिलाओं के प्रति इतना सम्मान है कि वह रोज सुबह अपनी पत्नी के पैर छूकर ही घर से निकलता है। अब ऐसे में अगर पत्नी से परे की कुछ या कई महिलाओं के साथ उसकी ऐसी अंतरंग तस्वीरें सामने आती हैं, तो जाहिर है कि उसकी निजी जिंदगी एकदम सही तो नहीं है।
और फिर जो लोग सार्वजनिक जीवन में हैं, उनसे जनता थोड़े से अमानवीय आदर्श की उम्मीद भी करती है। यह एक अलग बात है कि देश की शायद ही ऐसी कोई पार्टी हो जिसके नेताओं के बीच सेक्स को लेकर हंगामे न हुए हों। मध्यप्रदेश में ही एक मंत्री नौकर पर बलात्कार में जेल रहकर जमानत पर है, कांग्रेस के नारायण दत्त तिवारी ने आंध्र के राजभवन में रहते हुए कई तरह की वीडियो-उत्तेजना दुनिया को उपलब्ध कराई, और अगर हमारी याद सही है तो कांग्रेस के प्रवक्ता रहे अभिषेक मनु सिंघवी की एक सेक्स-वीडियो में वे शायद एक महिला वकील को जज बनाने जैसी बात कहते हुए भी दर्ज हो चुके हैं, और उन्हें पार्टी का यह ओहदा छोडऩा भी पड़ा था। ऐसी बहुत सी मिसालें हैं, और इसलिए हैं कि राजनीति में जो लोग हैं वे भी इंसान हैं, और इंसान के लिए यह एक आम बात है। लेकिन जनता अपने नेता से आम इंसान के लिए रियायती आम पैमानों से ऊपर एक खास आदर्श की उम्मीद करती है, और जुर्म न रहने पर भी एक बेहतर सामाजिक-नैतिक आचरण उनसे चाहती है।
लोगों को याद होगा कि सेक्स-वीडियो और ऐसी तस्वीरों का बेजा इस्तेमाल नया नहीं है, और इमरजेंसी के बाद बाबू जगजीवन राम को धमकाने के लिए उनके बेटे सुरेश राम की महिला मित्र के साथ की नग्न तस्वीरों को भरकर मेनका गांधी ने अपनी पत्रिका, सूर्या, का एक पूरा अंक ही निकाला था। अब वह तो कांग्रेस की अंदरुनी राजनीति का नतीजा था, एक साजिश थी, और वही मेनका आज अपने बेटे सहित भाजपा के भीतर बड़े ऊंचे दर्जे का मुआवजी-सत्ता सुख भोग रही हैं। इसलिए सार्वजनिक जीवन में निजी सेक्स कुछ वैसा ही है कि जो पकड़ा गया वह चोर, बाकी साहूकार। इसलिए ऐसा भांडाफोड़ होने पर मंत्री के पद से हटा देना तो ठीक है, लेकिन इस मंत्री पर बाहर के, दूसरी पार्टियों के उन्हीं नेताओं को पहला पत्थर चलाना चाहिए जिनकी अपनी पार्टी के नेताओं के चाल-चलन बड़े आदर्श के हैं। हमें लगता है कि ऐसा करने पर यह मंत्री बिना एक खरोंच भी पाए चुपचाप घर पहुंच जाएगा। फिलहाल एक दलित नेता को ऐसी घटिया बात नहीं करना चाहिए कि चूंकि वह दलित है, इसलिए उसके खिलाफ ऐसी साजिश की गई है।

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