केजरीवाल ऐसी जुबानी-गंदगी फैलाकर लंबा नहीं चल सकते

संपादकीय
8 सितंबर 2016
दिल्ली और पंजाब में लगातार महिलाओं के आरोप झेलते हुए, कहीं वीडियो तो कहीं ऑडियो रिकॉर्डिंग से बदनामी पाते हुए आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविंद केजरीवाल आज जब पंजाब चुनाव प्रचार पर गए, तो जाते हुए दिल्ली स्टेशन पर ही उन्हें महिलाओं का विरोध झेलना पड़ा, और पंजाब पहुंचने पर भी स्टेशन पर वे पुलिस के घेरे में ही स्टेशन से बाहर निकल पाए। और जैसी कि उम्मीद थी, आम आदमी पार्टी की तरफ से यह कहा गया कि नरेन्द्र मोदी ने यह विरोध करवाया है। दूसरी तरफ गुजरात में लंबा पटेल आंदोलन चलाने वाले हार्दिक पटेल के भाई का एक स्टिंग ऑपरेशन अभी सामने आया जिसमें वे एक व्यापारी से रूपए ले रहे हैं, तो हार्दिक ने कहा कि इस वीडियो को नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के इशारे पर फैलाया जा रहा है।
केजरीवाल काफी अरसे से इस बात के लिए बदनाम हैं कि वे अपने खिलाफ होने वाली हर बात को लेकर मोदी पर हमला करते हैं, उन पर तोहमत लगाते हैं। हो सकता है कि केजरीवाल के खिलाफ हर साजिश के पीछे मोदी हों, क्योंकि राजनीति में कानून तोड़े बिना जितने तरह की साजिशें हो सकती हैं, वे सब तो मान्यता प्राप्त हो ही चुकी हैं, कभी कोई पार्टी स्टिंग ऑपरेशन करती है, तो कभी कोई दूसरी पार्टी। अब सवाल यह है कि केजरीवाल के मंत्री अगर किसी महिला के ऐसे आरोपों के घेरे में हैं कि राशन कार्ड बनवाने के लिए उस मंत्री ने महिला का देह शोषण किया, और खुद ही उसकी खुफिया-रिकॉर्डिंग भी कर ली, तो इसमें मोदी और अमित शाह क्या करें, या राहुल गांधी क्या करें? राजनीतिक विरोध अपनी जगह ठीक है, और राजनीतिक साजिशें भी चलती ही रहती हैं, लेकिन अगर केजरीवाल का कोई मंत्री विदेशी महिलाओं को पीटता है, कोई अपनी बीवी को पीटता है, कोई किसी और तरह का जुर्म करता है, तो क्या इसे आम आदमी पार्टी के विरोधी बंदूक की नोंक पर करवाते हैं? अभी दो दिन पहले ही मध्यप्रदेश में भाजपा से जुड़े हुए एक ऐसे नेता को सेक्स-रैकेट में गिरफ्तार किया गया है जो कि मोदी-सेना नाम का एक संगठन चलाता था, और जिसकी मोदी और बाकी मंत्रियों, भाजपा नेताओं के साथ तस्वीरों से उसका फेसबुक पेज पटा हुआ है। तो अब भाजपा की सरकार में भाजपा से जुड़े इस सेक्स-कारोबारी की गिरफ्तारी किसकी साजिश कही जाए? अभी-अभी गुजरात की खबर आई है कि वहां पर भाजपा सरकार के मातहत काम करने वाली सीआईडी ने अदालत में अपनी जांच-रिपोर्ट में कहा है कि वहां ऊना में दलितों पर गोमांस का आरोप लगाकर उनकी जो पिटाई की गई थी, उसमें पुलिस ने अपराध किया था, और कई पुलिसवालों को गिरफ्तार करके सीआईडी ने अदालत में पेश भी कर दिया है। अब सवाल यह उठता है कि मोदी और अमित शाह के राज में वहीं की सीआईडी, वहीं की पुलिस को, गौरक्षकों की हिंसा और उनके जुर्म में भागीदार मानते हुए गिरफ्तार करके अदालत में पेश कर रही है, तो इसे किसके इशारे पर किया हुआ काम माना जाए? अभी महाराष्ट्र खबरों में बना हुआ है जहां पर एक धर्मनिरपेक्ष और कट्टरता विरोधी सामाजिक मुखिया की हत्या में सनातन हिन्दू संगठन के लोगों को गिरफ्तार किया गया है, और अदालत में उनका जुर्म साबित किया जा रहा है। यह पूरा काम भी वहां पर भाजपा की सरकार के रहते हुए हुआ है।
केजरीवाल भारतीय राजनीति में गैरजिम्मेदारी से बयानबाजी, अतिबड़बोलेपन, और सनसनीखेज आरोपों का एक अभूतपूर्व सिलसिला चला रहे हैं। धीरे-धीरे जनता उनकी ऐसी जुबानी-गैरजिम्मेदारी से थकती जाएगी, और उनसे भी यह सवाल पूछा जाना चाहिए कि उनके ऐसे आरोपों के पीछे उनकी प्रधानमंत्री बनने की हसरत है, या कि मोदी को बदनाम करने की? हो सकता है कि उनकी ये दोनों हसरतें साथ-साथ चलती हों, लेकिन मीडिया चाहे कितनी ही गैरजिम्मेदारी से ऐसे आरोप दिखाता रहे, देश की जनता ऐसी गंदगी पर बहुत समय तक भरोसा नहीं करती, चाहे उसे किसी पार्टी के, कोई भी नेता फैलाएं। हमारा ख्याल है कि मीडिया को गैरजिम्मेदारी से गंदगी फैलाने के बजाय, ऐसे लोगों से जिम्मेदारी के सवाल करने चाहिए, और इसके बिना अधिकतर पार्टियां महज सनसनीखेज गंदगी बढ़ाते चल रही है।

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