पाकिस्तान से परमाणु खतरा न सिर्फ भारत को, बल्कि अमरीका सहित पूरी दुनिया को

संपादकीय
1 अक्टूबर 2016
भारत और पाकिस्तान के बीच चल रहे मौजूदा तनाव को लेकर हम बार-बार कुछ अधिक लिखना तो नहीं चाहते, लेकिन एक मुद्दा ऐसा है जिसे ऐतिहासिक संदर्भों में देखते हुए उस पर लिखना ही होगा। यह तनाव बढ़ता है तो भी यह लिखना माकूल होगा, और अगर खत्म होता है, तो भी। पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान की सरकार के बड़े-बड़े ओहदों पर बैठे हुए गैरफौजी लोगों ने भी परमाणु हथियारों को लेकर बड़ी गैरजिम्मेदारी के बयान दिए हैं। वहां के मंत्रियों ने भी यह साफ-साफ कहा कि पाकिस्तान ने परमाणु हथियार रखने के लिए नहीं बनाए हैं, जरूरत पडऩे पर वह उनका इस्तेमाल भी करेगा। और ऐसे ही बयानों को देखते हुए अमरीका ने आज एक आम नसीहत दी है कि परमाणु हथियारों के बारे में उनसे लैस देशों को बयान भी जिम्मेदारी से देने चाहिए। यह बात सिर्फ पाकिस्तान पर इसलिए लागू होती है कि भारत में सरकार और फौज की तरफ से परमाणु हथियार शब्द का भी इस्तेमाल नहीं हुआ है। और इस देश के एक बहुत ही भयानक बड़बोले और गैरजिम्मेदार भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने जरूर यह कहा है कि भारत को पाकिस्तान पर परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करना चाहिए और परमाणु युद्ध में भारत के दस करोड़ लोग मारे जाएं तो भी परवाह नहीं करनी चाहिए क्योंकि पाकिस्तान पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। सुब्रमण्यम स्वामी के बयानों को खुद भाजपा के भीतर कोई गंभीरता से नहीं लेते हैं क्योंकि वे आए दिन अपनी ही पार्टी की सरकार के खिलाफ भयानक सनसनीखेज आरोप लगाते रहते हैं, और मंत्रियों को हटाने की मांग करते रहते हैं। इसलिए स्वामी के बयान को न तो भाजपा का बयान माना जा सकता है, न ही मोदी सरकार का।
अभी दो दिन पहले ही हमने एक खबर छापी है कि अगर भारत और पाकिस्तान में परमाणु युद्ध होता है तो करीब दो करोड़ लोग मारे जाएंगे, और इससे मौसम पर जो असर पड़ेगा, उससे फसल पर पडऩे वाली मार से दसियों करोड़ लोग दुनिया में और मारे जाएंगे। ये आंकड़े मोटे तौर पर दोनों देशों के पास मौजूद परमाणु हथियारों के अंदाज को लेकर निकाले जाते हैं, और दुनिया यह उम्मीद करती है कि ऐसी नौबत नहीं आएगी, और इन दोनों देशों के जो मददगार या दोस्त देश हैं, उनमें से अमरीका, चीन और रूस जैसी महाशक्तियां तनाव को उतना बढऩे से रोकने के लिए बहुत कुछ करेंगी। लेकिन आज ही अमरीकी मीडिया में वहां के राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार हिलेरी क्लिंटन का भी एक ऑडियो तैर रहा है जिसमें अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रत्याशी हिलेरी क्लिंटन ने इस आशंका को लेकर चिंता व्यक्त की है कि पाकिस्तान में जेहादियों की पहुंच यदि परमाणु हथियारों तक हो गई तो वहां से परमाणु आत्मघाती हमलावर तैयार हो सकते हैं। उन्होंने कहा- हम इस भय में जीते हैं कि वहां एक तख्तापलट होगा, यह कि जेहादी सरकार पर अपना नियंत्रण कर लेंगे, वे परमाणु हथियारों तक पहुंच बनाएंगे और आपको आत्मघाती परमाणु हमलावरों से जूझना पड़ेगा।
दुनिया को अब यह लगभग भूल चला है कि एक वक्त भारत परमाणु हथियारों के खिलाफ चलने वाले आंदोलन का एक बड़ा प्रमुख नेता था। और कुछ दशक पहले परमाणु निशस्त्रीकरण शब्द लगातार खबरों में बने रहता था क्योंकि दूर की सोचने वाले लोगों को यह अंदाज था कि ऐसी बेकाबू नौबत किसी दिन आ सकती है। और अगर आज भारत और पाकिस्तान से परे देखें, तो उत्तर कोरिया का बददिमाग तानाशाह लगातार अमरीका को परमाणु हथियारों की धमकी देते रहता है, और यह धमकी बहुत फर्जी भी नहीं है, क्योंकि उत्तर कोरिया ने परमाणु हमले की ताकत हासिल कर रखी है।
पाकिस्तान एक बहुत ही कमजोर लोकतंत्र है, और वहां पर कोई बददिमाग या बेदिमाग फौजी अफसर या तानाशाह, या कि कोई धर्मांध आतंकी गिरोह आत्मघाती अंदाज में परमाणु हथियारों पर कब्जा करके उनका इस्तेमाल सबसे करीबी निशाने, हिन्दुस्तान पर कर सकते हैं। यह खतरा एक हकीकत है, और ऐसे खतरे के चलते हुए हिंदुस्तान की सरकार अगर पाकिस्तान के ऐसे परमाणु ठिकानों के खिलाफ कोई फौजी कार्रवाई करती है, तो वह वैसी ही होगी जैसी कि इराक पर अमरीका ने की थी। इराक के खिलाफ तो बुश ने गढ़े हुए झूठे सुबूतों के सहारे हमले को न्यायसंगत ठहराया था, लेकिन पाकिस्तान के खतरे को तो अमरीका सहित बाकी दुनिया ठीक से जान रही है। और एक नौबत ऐसी भी आ सकती है कि भारत नहीं, दुनिया के दूसरे देश पाकिस्तान की परमाणु क्षमता पर ठीक उसी तरह की रोक लगाने को मजबूर हों, जैसी रोक अभी ईरान की परमाणु क्षमता पर अमरीका और बाकी देशों ने लगाई हुई है। अमरीका को पता नहीं यह कब समझ आएगा कि उससे मिलने वाली मदद से पाकिस्तान एक ऐसा खतरा बन रहा है जो कि किसी दिन अमरीका पर हमला करने वाले आतंकी लोगों को हथियार दे सकता है।

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