सेक्स भुगतान का झगड़ा बलात्कार न मानना सही

संपादकीय
12 अक्टूबर 2016
सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में बलात्कार के आरोप से तीन लोगों को बरी किया और कहा कि अगर कोई सेक्सकर्मी भुगतान के किसी झगड़े में ग्राहक के खिलाफ बलात्कार की रिपोर्ट दर्ज कराए तो वह बलात्कार नहीं कहा जा सकता। दो जजों की बेंच ने यह भी कहा कि महिला के दिए गए सुबूतों को महत्व दिया जाना चाहिए, लेकिन उसे परम सत्य की तरह नहीं मानना चाहिए। यह मामला बेंगलुरू का था जिसमें बीस साल से यह मुकदमा चल रहा था।
इस फैसले से कुछ और भी पहलू फिर बहस में आएंगे। किसी सेक्सकर्मी के भुगतान का मामला ग्राहक और कर्मी के बीच का भुगतान का लेन-देन का झगड़ा माना गया है, और यह सही भी है। लेकिन हमारा मानना है कि इसके अलावा एक और किस्म का मामला आए दिन सामने आता है जिस पर भी सुप्रीम कोर्ट को गौर करना चाहिए, और एक ज्यादती खत्म करनी चाहिए। हर कुछ दिनों में कहीं न कहीं बलात्कार की एक ऐसी रिपोर्ट दर्ज होती है जिसमें शादी का वायदा करके बनाए गए शारीरिक संबंधों के बारे में लड़की या महिला की तरफ से कहा जाता है कि उसके साथ बलात्कार हुआ है। हम शादी का वायदा करके बनाए गए संबंधों को बलात्कार नहीं मानते। इसे भी अगर बलात्कार मान लिया गया तो फिर वायदाखिलाफी शब्द का कहां इस्तेमाल होगा? और वायदे से परे भी यह तो मानकर चलना चाहिए कि जो लोग आज किसी के साथ शादी का इरादा रखते हैं, जरूरी नहीं है कि कुछ समय बाद भी उन्हें उनसे शादी करना ठीक लगे। लोगों के खयालात समय और हालात के मुताबिक बदलते हैं, और यही वजह है कि सगाई होने के बाद भी टूट जाती हैं, शादी हो जाने के बाद भी तलाक हो जाते हैं। तो जिस तरह शादी के बाद तलाक होता है, उसी तरह शादी के पहले के प्रेम संबंध भी टूट सकते हैं, और उसे बलात्कार से जोडऩा पूरी तरह नाजायज है।
आज दहेज का कानून, बलात्कार का कानून, कामकाज की जगह पर शोषण का कानून महिलाओं के पक्ष में बहुत हद तक झुका हुआ है, और यह बात जायज भी है। लेकिन यह बात नाजायज है कि प्रेम संबंध टूट जाने पर या शादी न करने पर पहले के देह संबंधों को बलात्कार करार दिया जाए। आज का कानून ऐसे बहुत से लोगों को गिरफ्तार करके जेल में डाल देता है, और बरसों तक वे लोग मुकदमा झेलते रहते हैं। किसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फैसला दिया हो, तो वह अभी हमें नहीं मालूम है, लेकिन किसी वजह से अगर शादी का वायदा पूरा नहीं किया जाता है, तो उसे किसी भी तरह का अपराध मानना गलत होगा। अभी सेक्सकर्मी के भुगतान के विवाद को लेकर जो फैसला आया है, उसकी भावना भी कुछ इसी किस्म की है। वह मिसाल तो अलग है लेकिन उस आधार पर वायदाखिलाफी जैसे मामलों पर भी गौर किया जाना चाहिए।

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