इजराइल से सर्जिकल स्ट्राइक नहीं, साइबर सुरक्षा सीखी जाए

संपादकीय
22 अक्टूबर 2016
भारत के बैंक ग्राहकों में से करीब पौन करोड़ के एटीएम कार्ड में विदेशी हैकरों ने सेंध लगा दी है, ऐसी खबर सरकार की तरफ से आई है। और इसमें सारे नामी-गिरामी बड़े-बड़े बैंक हैं जिनके पास अपने कम्प्यूटरों की हिफाजत करने की ताकत होनी चाहिए थी। लेकिन यह दुनिया की एक नई हकीकत है कि कम्प्यूटरों में कुछ भी सुरक्षित नहीं रह सकता, और दुनिया की सबसे बड़ी कम्प्यूटर-ताकत अमरीका सरकार के खुफिया कम्प्यूटरों में भी लगातार घुसपैठ चलती ही रहती है। हमारे पाठकों को याद होगा कि हम ऐसी एक नौबत को लेकर कई बार लिखते हैं कि दुनिया की आने वाली जंग जरूरी नहीं है कि फौजी हथियारों से ही लड़ी जाए, और भारत जैसे देश की सरहद पर फौजी हमले से जितना नुकसान हो सकता है, उससे कहीं अधिक नुकसान एक साइबर हमले से हो सकता है जिससे पल भर में रेल रिजर्वेशन खत्म हो जाए, बैंकों के रिकॉर्ड तहस-नहस हो जाएं, विमानों की सीट बुकिंग के रिकॉर्ड मिट जाएं, और लोगों के ई-मेल पर हमला हो जाए। इससे जो तबाही होगी, उसके जख्म आसानी से भरे भी नहीं जा सकेंगे।
कुछ महीने पहले की बात है कि बांग्लादेश के एक बड़े सरकारी बैंक में बड़ी साइबर डकैती हुई थी, और बैंक को शायद कंगाल बना दिया गया था। आज भारत में यहीं के घरेलू साइबर मुजरिम हर दिन हजारों लोगों के खातों से तरह-तरह की ठगी और जालसाजी करते हैं, और जनता के बीच अपने बैंक खातों के हिफाजत की समझ बड़ी कमजोर है। ऐसे में अगर पौन करोड़ लोगों के बैंक-कार्ड पर हमला हुआ है, तो इससे बैंकों पर लोगों का भरोसा भी उठेगा। और भारतीय अर्थव्यवस्था में आज भी जमीन, शेयर बाजार, या सोने के मुकाबले बैंक मेें जमा रकम को अधिक सुरक्षित माना जाता है और यह नौबत अगर बदलेगी तो बैंकों से हटाए गए पैसे कम सुरक्षित जगहों पर जाएंगे और देश की अर्थव्यवस्था एक अलग किस्म से तबाह होगी।
अभी यह ठीक से मालूम नहीं है कि भारत ऐसे साइबर-हमलों के लिए किस हद तक तैयार है, लेकिन अमरीका की बनी हुई कई रोमांचक अपराध फिल्मों में यह देखने मिलता है कि सरकार और पुलिस के कम्प्यूटरों पर कब्जा करके अपराधियों का एक छोटा सा गिरोह भी एक कमरे में बैठकर पूरे देश के बिजलीघरों को ठप्प कर सकता है, उपग्रह संचार प्रणाली को बैठा सकता है, और सड़कों पर सारे के सारे ट्रैफिक लाईट अपने काबू में ले सकता है। अब ऐसा साइबर खतरा अकेले भारत पर है, ऐसा हम नहीं कहते, लेकिन भारत ऐसे किसी खतरे से निपटने की तैयारी में बड़ा दमखम रखता हो, ऐसा भी नहीं लगता है। एक बात यह भी याद रखनी चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय बाजार व्यवस्था में भारत के कॉल सेंटर दसियों लाख लोगों को रोजगार देते हैं, और ये महंगी कमाई वाले काम है। लेकिन अगर इनकी साइबर सुरक्षा खतरे में रहेगी, तो ये रोजगार भारत से छिन भी सकते हैं।
इन तमाम बातों को देखते हुए भारत को अपने कम्प्यूटरों और इंटरनेट की हिफाजत बड़ी तेजी से बढ़ानी चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो दिन पहले सर्जिकल स्ट्राइक के लिए इजराइल का जिक्र तारीफ के साथ किया है। इजराइल के तमाम हमले बेकसूर और निहत्थे फिलीस्तीनियों पर रहते हैं। अगर इजराइल से कुछ सीखना है तो वह साइबर-सुरक्षा है जिसमें कि इजराइल दुनिया में नंबर वन का देश है।

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