शहादत के मौके पर राहुल की बेमौके की बेतुकी बात

संपादकीय
7 अक्टूबर 2016
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने 26 दिन की किसान यात्रा खत्म होने के बाद जंतर-मंतर पर अपने भाषण में कहा कि पीएम मोदी जवानों की दलाली कर रहे हैं। जो हमारे जवान है, जिन्होंने अपना खून दिया है, जम्मू कश्मीर में जिन्होंने अपना खून दिया है, जिन्होंने हिंदुस्तान के लिए सर्जिकल स्ट्राइक किया है, उनके खून के पीछे आप छुपे हुए हो, उनकी आप दलाली कर रहे हो, ये बिल्कुल गलत है। हिंदुस्तान की सेना ने हिंदुस्तान का काम किया है, आप अपना काम कीजिए, आप हिंदुस्तान के किसान की मदद कीजिए, आप हिंदुस्तान की सेना को सातवें पे कमीशन में पैसा बढ़ा कर दीजिए,ये आपका काम है, ये आपकी जिम्मेदारी है।
राहुल गांधी के इस बेतुके बयान के बाद आज भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मीडिया से बात करते हुए इसे बहुत धिक्कारा और कहा कि राहुल गांधी को देश के मुद्दे समझ ही नहीं आते हैं, उन्हें आलू की खेती के बारे में भी बयान देना चाहिए। आलू से राहुल का अगर कोई छुपा हुआ रिश्ता हो तो पता नहीं, लेकिन अमित शाह का यह बयान सही है कि राहुल गांधी को देश के मुद्दे समझ नहीं आते। वे लगातार बेतुकी बातें करते हैं, और जब देश में पाकिस्तान के साथ जंग की बातें हो रही हैं, सरहद से ताबूत अलग-अलग इलाकों में लौट रहे हैं, शहीदों के बच्चों की रोते-बिलखते तस्वीरें चारों तरफ आ रही हैं, तब राहुल गांधी का दलाली का ऐसा बयान पता नहीं उनकी कौन सी समझ से उपजा है।
कांग्रेस की एक बहुत बड़ी दिक्कत यह है कि वह राहुल से परे देखने की ताकत नहीं रखती, और अगर रखती भी है, तो उसे राहुल से परे देखने की इजाजत नहीं है। खुद सोनिया के परिवार में लंबे समय से उनकी दूसरी संतान के राजनीति में आने के बारे में बातें होती रहती हैं, लेकिन कुल मिलाकर कांग्रेस का भविष्य राहुल गांधी के ही हाथों में दे दिया गया दिखता है। और राहुल का मिजाज, उनका बर्ताव, ये सब देश के नाजुक मौकों पर या तो विदेश में छुट्टी मनाते दिखता है, और जब उन्हें ऐसे मौकों पर विदेश जाने का मौका नहीं मिलता, तो वे अटपटी की ऐसी नासमझ बातें बोलते हैं कि लोग उस पर हॅंस पड़ते हैं, और कांग्रेस का भला चाहने वाले लोग रो पड़ते हैं। लेकिन जिस राहुल के कंधों पर कांग्रेस ने अपना भविष्य टिका दिया है, वे कांग्रेस के लिए संभावना नहीं है, कांग्रेस के लिए महज एक आशंका हैं।
देश की राजनीति इस बात की गवाह है कि पिछले लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, उनकी पार्टी भाजपा, और एनडीए के दूसरे दलों को जब उम्मीद से बहुत अधिक सीटें मिलीं, और खुद भाजपा हक्का-बक्का रह गई, तो उसका एक बहुत बड़ा श्रेय राहुल गांधी को भी गया है। जब देश के मतदाताओं के सामने राहुल और मोदी के बीच तुलना करने की बात आई, तो मतदाताओं के पास सोचने-विचारने का कोई मौका बचा नहीं था। कांग्रेस पार्टी को अपने इस युवराज को राजनीति सिखाने में मेहनत करनी चाहिए, हो सकता है कि कुछ बरसों में वे बेहतर हो जाएं, और बेमौके पर बेतुकी बात कहने से बचें। फिलहाल कांग्रेस पार्टी को अपने ही घर के चिराग से एक बड़ा नुकसान हुआ है, और इस पार्टी में कोई इस नुकसान को गिना भी नहीं सकते।

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