गोवा के चुनाव प्रचार में प्रतिरक्षा मंत्री पर्रिकर की गैरजरूरी भड़काऊ बातें

संपादकीय
27 नवंबर 2016


भारत या पाकिस्तान जैसे देशों में जब कोई चुनाव होते हैं, तो एक-दूसरे पर निशानेबाजी कुछ अधिक होती है, और अक्सर गैरजरूरी होती है। इसी तरह जब राष्ट्रीय स्तर के कोई नेता अपने खुद के प्रदेश में चुनाव अभियान पर निकलते हैं, तो वे राष्ट्रीय स्तर के मामलों को अपने प्रदेश की जनता पर थोप देते हैं। बंगाल में बांग्लादेश का मुद्दा आ जाता है, और यही मुद्दा असम में भी आ जाता है। तमिलनाडू में श्रीलंका के तमिलों का मुद्दा आ जाता है, और आज गोवा के चुनाव प्रचार में पाकिस्तान का मुद्दा जोरों से हावी है। अब लोग यह सोच सकते हैं कि पाकिस्तानी सरहद से दूर बसे हुए गोवा का पाकिस्तान से क्या लेना-देना? तो जवाब यह है कि भारत के प्रतिरक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर गोवा से ही आते हैं, और आज उनके पास अपने प्रदेश में राज्य के चुनाव को लेकर कोई बड़ा मुद्दा नहीं है, इसलिए वे पाकिस्तान पर ऐसा जुबानी हमला कर रहे हैं कि मानो सरहद पर शहादत देते हुए खड़े हैं।
दरअसल भारतीय जनता पार्टी के पास गोवा में मुद्दों की कुछ कमी है। वहां के भाजपा मुख्यमंत्री गोमांस पर किसी भी तरह की रोक के सख्त खिलाफ हैं और बार-बार कह चुके हैं कि गोवा में गोमांस पर कोई रोक नहीं लगेगी। और यह घोषणा भाजपा की पूरे देश के लिए की गई घोषणा के ठीक खिलाफ है। दूसरी तरफ नोटबंदी को लेकर पूरे देश में मोदी सरकार से जो भी नाराजगी गरीब जनता की है, उससे नोटबंदी का मुद्दा भी चुनाव का आकर्षक मुद्दा नहीं रह गया है। ऐसे में मनोहर पर्रिकर को कोई भी लुभावना भाषण देने में दिक्कत होना स्वाभाविक है, और ऐसे में वे अगर अपने प्रदेश की जनता को याद दिलाना चाहते हैं कि वे देश के सबसे महत्वपूर्ण मंत्रियों में से एक हैं, और देश की हिफाजत उनके हवाले है, तो उन्हें पाकिस्तान पर हमला करना एक जायज मुद्दा लग रहा है।
अब पणजी की एक चुनावी सभा में मनोहर पर्रिकर ने कल यह घोषणा की कि वे अपनी बुलेट प्रूफ कार छोड़ रहे हैं, और दुश्मनों में अगर हिम्मत है तो वे उन्हें मारकर दिखाएं। पाकिस्तान और वहां से आने वाले आतंकियों की चर्चा करते हुए प्रतिरक्षा मंत्री ने कहा कि अब से वे बिना बुलेट प्रूफ कार में चलेंगे, और दुश्मन में अगर हिम्मत है तो उन्हें गोली मारकर दिखाएं, और ऐसा चाहने वालों को दिल्ली तक जिंदा नहीं पहुंचने दिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि भारत युद्ध नहीं चाहता है लेकिन उसे उकसाया गया तो वह दुश्मन की आंखें निकालकर उसके हाथ में रख देगा। उन्होंने कहा कि गोवा के लोग दुनिया को बता सकते हैं कि उन्होंने केन्द्र में एक ऐसे शख्स को भेजा था जिसने दुश्मन के गाल पर करारा तमाचा जड़ा।
ये सारी की सारी बातें निहायत गैरजरूरी भी हैं, और भारत-पाकिस्तान के संबंध खराब करने वाली भी हैं। आज इन दोनों देशों के बीच चाहे जितना भी तनाव हो, यह बात तो अपनी जगह बनी ही रहेगी कि तनाव के बीच से अमन का रास्ता भी निकलता है, और बेवजह भड़काऊ बातें करके तनाव को बढ़ाना समझदारी नहीं है। फिर एक बात यह भी है कि भारत की सरकारी व्यवस्था को जो लोग जरा भी समझते हैं, वे जानते हैं कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या मंत्री की हिफाजत उनकी मर्जी से नहीं चलती। इसका इंतजाम खुफिया एजेंसियों के अंदाज पर टिका रहता है कि किसे कितना खतरा है, और सुरक्षा एजेंसियां तमाम महत्वपूर्ण लोगों का इंतजाम अपनी मर्जी से करती हैं। ऐसे में भारत के प्रतिरक्षा मंत्री की ऐसी एकतरफा घोषणा एक चुनावी नारे से अधिक कुछ नहीं है, और कल तक जो आदमी अपनी सादगी और सज्जनता के लिए खबरों में रहता था, वह भी आज चुनाव के चलते भड़काऊ बातें करने, और गैरजिम्मेदारी दिखाने में फंस गया है।
पिछले बरसों में हमने लगातार यह देखा है कि भारत या पाकिस्तान के चुनाव एक-दूसरे देश के खिलाफ नफरत की बातों से भर जाते हैं, और यह सिलसिला दोनों ही तरफ खत्म होना चाहिए।

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