एनडीटीवी पर कार्रवाई से सरकार का बड़ा नुकसान

संपादकीय
7 नवम्बर 2016  
देश के एक प्रमुख समाचार चैनल एनडीटीवी पर केन्द्र सरकार ने एक दिन की रोक लगाई है कि इस चैनल ने कश्मीर में सुरक्षा बलों की कार्रवाई के प्रसारण में संवेदनशील सूचनाएं दिखाई थीं। इसके बाद से देश भर के मीडिया के संगठन, और विपक्षी दलों के नेता लगातार सरकार की इस बात के लिए गंभीर आलोचना कर रहे हैं। इस चैनल का कहना है कि उसने कोई भी ऐसी जानकारी नहीं दिखाई जो कि बाकी सारे मीडिया पर नहीं चल रही थी। यह अपने किस्म का पहला मौका है जब देश के एक प्रमुख समाचार चैनल को चौबीस घंटे बंद रखने के लिए कहा गया है, और यह आज के माहौल में अधिक महत्वपूर्ण इसलिए भी हो जाता है कि एनडीटीवी अपनी रीति-नीति की वजह से लगातार केन्द्र सरकार की आलोचना करते आ रहा था, और आज जिस तरह मीडिया दो खेमों में बंटा हुआ सा दिखता है, उसमें एनडीटीवी मोदी सरकार, भाजपा, और संघ परिवार के एजेंडा के आलोचक के रूप में एक बड़ी प्रमुख आवाज के रूप में स्थापित है। इसके साथ-साथ एनडीटीवी देश के सबसे विश्वसनीय समाचार चैनल के रूप में भी जाना जाता है, और इस विश्वसनीयता की वजह से वह देश के स्वघोषित राष्ट्रवादी, और साम्प्रदायिक ताकतों की आंखों की किरकिरी भी बना हुआ है।
अब यहां पर दो सवाल उठते हैं। हम केन्द्र सरकार के इस अधिकार को चुनौती नहीं देते कि अगर कोई समाचार चैनल या अखबार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नुकसान पहुंचाने वाले किसी कवरेज का कुसूरवार ठहराया जाता है तो उस पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। जब किसी कार्रवाई का कानून बना है तो वह कानून या तो जायज होगा, या उस कानून को ही चुनौती दी जानी चाहिए। लेकिन जब उस कानून के तहत कोई कार्रवाई की जा रही है, तो हम उसे अपने आपमें इमरजेंसी की सेंसरशिप जैसा कहना नहीं चाहते। एनडीटीवी के पास अदालत में जाकर सरकार के इस आदेश को खारिज करवाने की अपील का हक है, और यह चैनल सुप्रीम कोर्ट चले भी गया है। दूसरी तरफ मुम्बई पर आतंकी हमले के वक्त से लगातार यह बात भी चली आ रही थी कि समाचार चैनल अपने जीवंत प्रसारणों में कई बार ऐसी बातें दिखाते हैं जो कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई को ही खतरे में डाल देती है। हम इसमें से कोई बात इस चैनल को लेकर नहीं कर रहे हैं, लेकिन फिर भी अगर बहस के लिए मान भी लिया जाए कि एनडीटीवी ने ऐसी खतरनाक और सवंदेनशील बातों या तस्वीरों को प्रसारित किया था, तो भी उस पर यह कार्रवाई एक समझदार सरकार को नहीं करनी चाहिए थी।
भारत में टीवी की दर्शक संख्या को जानने वाले लोग यह भी जानते हैं कि एनडीटीवी शुरू के दर्जन भर चैनलों जितनी कमाई नहीं करता है, और उसे देखने वाले भी कम हैं। लेकिन पिछले चार दिनों से देश के मीडिया पर केवल एनडीटीवी का नाम चल रहा है, और हमारा ख्याल है कि एक दिन प्रसारण बंद रहने से इसे जो नुकसान होगा उससे सौ गुना या हजार गुना अधिक फायदा इन चार दिनों में हो चुका है। दूसरी बात यह कि केन्द्र सरकार को पिछले चार दिनों में लगातार यह तोहमत झेलनी पड़ रही है कि वह मीडिया का गला घोंटने की कोशिश कर रही है। कोई सरकार अगर ऐसा करने की नीयत रखती भी है, तो भी हमारा ख्याल है कि वह ऐसी तोहमत से बचती है। और एक ही दिन पहले तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सार्वजनिक मंच से माईक पर देश को यह याद दिलाया था कि अब इमरजेंसी जैसी कोई सरकार कभी नहीं आनी चाहिए। और इसके अगले ही दिन केन्द्र सरकार का लगाया गया यह प्रतिबंध एनडीटीवी को हीरो बना गया है। राजनीतिक रूप से भी हमारा ख्याल है कि मोदी सरकार को इससे बड़ा नुकसान हुआ है, और एनडीटीवी को अभूतपूर्व हमदर्दी भी मिली है, और यह चैनल सुर्खियों में आ गया है, और बना रहेगा। इसने देश के मीडिया के लगभग पूरे तबके को एक होने का मौका दिया है, और हर प्रदेश या बड़े शहरों में पत्रकारों के संगठन बैठक करके एनडीटीवी के साथ खड़े हो रहे हैं, और मोदी सरकार की आलोचना कर रहे हैं। हमारा ख्याल है कि केन्द्र सरकार ऐसी किसी गलती, अगर हुई भी है तो, पर किसी चैनल या अखबार को एक चेतावनी दे सकती थी, और वही कार्रवाई राजनीतिक समझदारी की भी होती। एनडीटीवी बाकी बहुत से चैनलों के मुकाबले बहुत ही पेशेवर और जिम्मेदार चैनल है, और उस पर की गई कार्रवाई को जनता भी अच्छी नजर से नहीं देखेगी। यह एक टालने लायक गलती है, या गलत काम है, और किसी भी सरकार को इससे बचना चाहिए। फिलहाल एनडीटीवी को इससे बड़ा फायदा हो रहा है, और मीडिया के बीच एक जिंदा बहस भी छिड़ी है। 

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