तुर्की में रूसी राजदूत की हत्या के मायने

संपादकीय
20 दिसंबर 2016


तुर्की में रूसी राजदूत को एक पुलिस वाले ने आर्ट गैलरी में सरे आम गोली मार दी। यह पुलिस अफसर ड्यूटी पर नहीं था, और राजदूत वहां एक भाषण दे रहे थे। इस नौजवान अफसर ने यह नारा लगाते हुए गोली मारी कि तुम्हारे लोग सीरिया के अलेप्पो में हमारे लोगों को मार रहे हैं, और यहां पर हम तुम्हें मारेंगे। उल्लेखनीय है कि सीरिया में चल रहे गृहयुद्ध में रूस अपनी खुली फौजी दखल से वहां की सरकार की मदद कर रहा है, और वहां के अलेप्पो शहर पर हुए हवाई हमलों में दसियों हजार लोगों को मारा गया है। दुनिया भर में ऐसी मौतों को लेकर बड़ी फिक्र हो रही है, और लोग इस बहस में लगे हुए हैं कि सरकारी फौजों और बागियों के बीच की हथियारबंद लड़ाई में देश की सरकार अपने ही लोगों पर हवाई हमले करके थोक में लोगों को कैसे मार सकती है।  तुर्की और अड़ोस-पड़ोस के कुछ देशों के बीच भी बेकसूर तुर्क लोगों की ऐसी बड़ी संख्या में मौतों को लेकर प्रदर्शन चल रहे हैं, और करोड़ों लोग इन मौतों को देखकर विचलित हैं। जाहिर है कि जिस नौजवान पुलिस अफसर ने यह कत्ल किया है, उसके लगाए हुए नारे, सीरिया को मत भूलो, अलेप्पो को मत भूलो, दुनिया के बहुत से लोगों की भावना को बताते हैं।
अब जब 2016 का साल खत्म होने जा रहा है, और बहुत से समाचार वेबसाइट सालभर की चुनिंदा तस्वीरों को पोस्ट कर रही हैं, तो यह देखकर हैरानी होती है कि यह पूरा साल किस कदर खूनी गुजरा है। चारों तरफ तबाही, चारों तरफ गृहयुद्ध और आतंकी हमले, चारों तरफ मजहब के नाम पर हिंसा और खून-खराबा, मानो पूरा साल महज तबाही ही छोड़ गया है। हम पहले भी यह बात लिखते आए हैं कि मुस्लिम देशों पर अमरीका या पश्चिम के ईसाई बहुल देश जिस तरह की फौजी कार्रवाई करते आए हैं, जिस तरह फिलीस्तीन पर इजरायल फौजी कार्रवाई करते आया है, उसके जख्म जल्द भरने वाले नहीं हैं, और ऐसी फौजी कार्रवाई से कोई स्थायी शांति नहीं आ सकती। तुर्की में रूसी राजदूत की यह ताजा हत्या उसी बेचैनी का एक सुबूत है, और दुनिया के ताकतवर देशों को यह सोचना पड़ेगा कि वे किस तरह बिना फौजी इस्तेमाल के बाकी रास्तों से आतंक को, गृहयुद्ध को खत्म कर सकते हैं, क्योंकि फौजी कार्रवाई में बेकसूर मौतों की प्रतिक्रिया बरसों तक होती रहेगी।

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