डोनाल्ड ट्रंप और जंग-जुनूनी पागल कुत्ता कहलाता रक्षामंत्री

संपादकीय
3 दिसंबर 2016


अमरीका ने अपने एक अजीब से चुनाव के तरीके के चलते, और उन्माद के भड़काए जाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति तो चुन लिया है, लेकिन उसके खतरे सामने आने लगे हैं। ट्रंप ने अपने मंत्रिमंडल को लेकर जिन नामों की मुनादी की है, उनमें इराक पर हुए हमले के मुखिया रह चुके एक फौजी जनरल को प्रतिरक्षा मंत्री घोषित किया है जिसका नाम ही खुद अमरीका में मैड डॉग है। जनरल जेम्स मैटिस के नाम की घोषणा करते हुए खुद ट्रंप ने इस जनरल के लिए प्रचलित अमरीकी नाम का इस्तेमाल किया, और इस अफसर को कभी अपने आपको पागल कुत्ता कहलाने में कोई आपत्ति भी नहीं रही।
जनरल मैटिस के बयानों को अगर देखें तो यह बुजुर्ग रिटायर्ड फौजी भयानक दर्जे का युद्धोन्मादी है। जंग का यह जुनूनी गोली मारने को मजेदार मानता है, तनाव पसंद करता है, और खुलकर यह कहता है कि हर उस शख्स को मारने का प्लान भी दिमाग में रखना चाहिए जिससे कि आप मिलते हैं। जनरल मैटिस इरान के साथ समझौते के बहुत खिलाफ रहे, और उसके खिलाफ एक कड़े रवैये के हिमायती हैं। अफगानिस्तान समेत बहुत से विदेशी मोर्चों पर इस अफसर ने बहुत खूंखार मिलिट्री कार्रवाई की अगुवाई की थी। और ऐसे आदमी को प्रतिरक्षा मंत्री बनाना विश्व शांति के लिए बहुत बड़ा खतरा तो है ही, खुद अमरीका की प्राथमिकताएं बाकी दुनिया के साथ मिलकर चलने के बजाय जंग छेडऩे, और दूसरे देशों पर कब्जा करने की होने का आसार सामने है।
अमरीकी राष्ट्रपति के रूप में डोनाल्ड ट्रंप अब तक जितने लोगों को मंत्रिमंडल के लिए घोषित कर चुके हैं वे सारे के सारे बड़े-बड़े कारोबारी, और खरबपति लोग हैं। हम भारत में भी संसद और विधानसभाओं में लगातार करोड़पतियों और अरबपतियों के बढ़ते हुए अनुपात को देख रहे हैं, और उसी का नतीजा है कि लोकसभा में बहुमत वाले एनडीए के सांसदों को नोटबंदी जैसे फैसले से जनता को होने वाली दिक्कत का अंदाज नहीं रह गया, और मोदी मंत्रिमंडल के भीतर नोटबंदी पर शायद किसी तरह की चर्चा नहीं हुई, कोई विरोध नहीं हुआ, इससे होने वाले खतरों की आशंका भी शायद किसी को इसलिए नहीं थी कि गरीब जनता की तकलीफों से दौलतमंद सांसदों का संपर्क टूटना तय रहता है। जब वित्तमंत्री खुद अरबपति-खरबपति हैं, तो जाहिर है कि देश की तीन चौथाई गरीब आबादी के दुख-दर्द की उनकी समझ आंकड़ों जितनी ही रहेगी।
अमरीका में डोनाल्ड ट्रंप के आने से बाकी दुनिया के बहुत से देशों पर बहुत बड़ा खतरा खड़ा हो गया है, उन पर आर्थिक प्रतिबंध लगना तय सा माना जा रहा है, उनके लोगों को अमरीका में काम करने की इजाजत मिलना मुश्किल होता जाएगा, और खुद अमरीका के भीतर हर किस्म के अल्पसंख्यकों, कमजोर लोगों, और गरीबों का जीना मुश्किल होना तय है। लोकतंत्र के सामने दिक्कत यह है कि वह निर्वाचित लोगों से परे कोई हस्ती नहीं रखता। भारत में ही मोदी एक ऐतिहासिक बहुमत से प्रधानमंत्री बने हैं, और इस बहुमत के आगे वे हर किसी को अनसुना करके चल सकते हैं, चल रहे हैं। जिस-जिस देश में इस तरह का बहुमत पाकर लोग सत्ता में आएंगे, वहां इसी तरह के मनमाने फैसले होंगे, और सबसे गरीब सबसे अधिक मुसीबत झेलेंगे। अमरीका के साथ यह बात भी जुड़ी हुई है कि वहां की सरकार अपने देश की सरहदों के बाहर भी दुनिया के बहुत बड़े हिस्से पर अपनी मर्जी थोपने की ताकत रखती है, और थोपती है। ऐसे में डोनाल्ड ट्रंप और पागल कुत्ता कहे जाने वाले उनके फौजी अफसर दुनिया में कहां-कहां बम नहीं बरसाएँगे, यह अंदाज लगाना खासा मुश्किल है।

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