औजार का गर समझदार इस्तेमाल न हो तो वह आत्मघाती हथियार

संपादकीय
4 दिसंबर 2016


इंटरनेट और मोबाइल फोन, सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर हुए एक विश्लेषण से पता लगता है कि भारत में स्मार्टफोन पर इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले लोग अधिकतर डाटा ऑनलाईन चैटिंग सोशल मीडिया, ऑनलाईन खरीददारी, फिल्मों और संगीत पर खर्च कर देते हैं। यह नतीजा केंद्र सरकार और इंटेल के एक सर्वे और विश्लेषण में सामने आया है। इंटेल ने इन नतीजों पर कहा है कि जब तक डाटा का रचनात्मक कामों में उपयोग नहीं होगा, तब तक इस टेक्नॉलॉजी का फायदा अर्थव्यवस्था को नहीं मिलेगा। इंटेल का यह भी कहना है कि जो लोग मोबाइल फोन के साथ-साथ कम्प्यूटर पर भी इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं, वे लोग इस सुविधा का रचनात्मक या सकारात्मक फायदा ज्यादा उठाते हैं। इस कंपनी का कहना है कि इसलिए भारत सरकार को मोबाइल फोन के साथ-साथ कम्प्यूटरों को भी बढ़ावा देना चाहिए।
अब इंटेल एक ऐसी कंपनी है जो कि कम्प्यूटरों के प्रोसेसर बनाती है, और इसलिए हो सकता है कि उसके इस सुझाव के पीछे उसका अपना कारोबारी हित भी जुड़ा हुआ हो। हो सकता है कि स्मार्टफोन या दूसरे मोबाइल फोन के प्रोसेसर दूसरी कंपनियां बनाती हों, और इंटेल का कारोबार उससे पिछड़ रहा हो। लेकिन हम इस विश्लेषण के पहले हिस्से पर जरूर बात करना चाहते हैं कि हिंदुस्तानी लोग अपने फोन पर इंटरनेट का कैसा इस्तेमाल अधिक करते हैं।
मनोरंजन और सामाजिक अंतरसंबंध, इन दोनों का जिंदगी में एक उपयोग तो है, लेकिन इनका जिंदगी में अनुपात क्या रहे, इस बारे में तो सोचना ही चाहिए। और बात महज इंटरनेट की नहीं है, उससे परे भी असल जिंदगी में लोगों को अपने वक्त, अपनी ऊर्जा, अपने ध्यान, और अपने साधनों का इस्तेमाल किस अनुपात में किन कामों पर करना चाहिए, यह अगर सावधानी से तय नहीं किया गया, तो लोगों का कभी न लौटने वाला वक्त भी बुरी तरह बर्बाद होता है, और वक्त के साथ-साथ अवसर भी खत्म हो जाता है। इसलिए वे ही लोग कामयाब होते हैं जो कि उन्हें मिली हुई सहूलियतों का सोच-समझकर इस्तेमाल करते हैं। आज तो सस्ते इंटरनेट की वजह से जो लोग चाहें, वे रात-दिन अपनी पसंद की फिल्में देख सकते हैं, अश्लील तस्वीरें देख सकते हैं, सामान छांटते हुए रात-दिन गुजार सकते हैं, और दोस्तों के लतीफे या उनके भेजे फोटो दूसरों को भेज सकते हैं। और दिन के आखिर में जाकर यह पता लगेगा कि डाटा तो मुफ्त का था, लेकिन वक्त तो अपना था, और वह भी पूरा का पूरा बर्बाद हो गया।
दूसरी तरफ इंटरनेट की सहूलियत पढ़ाई-लिखाई के लिए, कामकाज के लिए, अपनी जिंदगी को बेहतर बनाने के लिए की जा सकती है, अच्छे लोगों से अच्छे संबंध बनाए जा सकते हैं, जो कि जिंदगी को एक बेहतर दिशा में ले जा सकते हैं। दरअसल फोन हो, कम्प्यूटर हो, या कि इंटरनेट, ये तमाम चीजें एक औजार हैं, और इनका इस्तेमाल करने से ही इनका नफा या इनका नुकसान सामने आता है। अब चाकू से सब्जी भी काटी जा सकती है, किसी दूसरे का गला भी काटा जा सकता है, और अपने हाथों की नसें भी काटी जा सकती हैं। इस्तेमाल को देखकर कोई चाकू को हथियार भी कह सकते हैं, और कुछ लोग इसे जिंदगी के लिए जरूरी औजार भी साबित करते ही हैं। लोगों को अपनी जिंदगी, अपने वक्त, अपने ध्यान, और अपनी मौकों का इस्तेमाल करना सीखना चाहिए। अगर दिन भर में दो घंटे मुहल्ले की सीढिय़ों पर बैठे हुए ऐसी गप्प मारी जाए, जो किसी काम की न हो, तो वह बर्बादी लोगों को आगे बढऩे से रोकती ही है। हर पल का इस्तेमाल किसी मशीन की तरह करने की जरूरत नहीं है, लेकिन उसका बेहतर इस्तेमाल कैसे हो सकता है, यह जरूरी सोचना, समझना, या सीखना चाहिए।

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