राजधानी के बीच बगीचे का शानदार ऐतिहासिक फैसला

संपादकीय
22 फरवरी 2017


छत्तीसगढ़ सरकार ने कल यह तय किया कि राजधानी रायपुर के एकदम बीच में मौजूद सरकारी कॉलोनी की जगह कोई नया निर्माण नहीं किया जाएगा, और चारों तरफ सड़कों के बीच की 19 एकड़ की इस जगह पर बगीचा बनाया जाएगा। अब तक रायपुर विकास प्राधिकरण इस जगह पर अरबों का बाजारू निर्माण करने पर आमादा था, और इस बात को भी पूरी तरह अनदेखा किया जा रहा था कि शहर का यह हिस्सा पूरे ही दिन चारों तरफ ट्रैफिक जाम का शिकार रहता है, और यहां पर लाखों फीट और निर्माण करके शहर के बीच एक नई मुसीबत खड़ी की जा रही थी। वैसे तो कहने के लिए इतने बड़े निर्माण के पहले केन्द्र सरकार के पर्यावरण नियमों के मुताबिक निर्माण के आसपास के इलाकों पर इससे होने वाले सभी तरह के प्रभाव का पहले से आंकलन जरूरी है, लेकिन इन सबको अनदेखा करके आरडीए इस निर्माण की जिद पर अड़ी हुई थी।
छत्तीसगढ़ जैसे बहुत से और राज्य होंगे जहां पर स्थानीय संस्थाएं अपनी घोषित कमाई को बढ़ाने के लिए, और इन संस्थाओं में ताकत पर काबिज लोग अघोषित कमाई करने के लिए अंधाधुंध निर्माण में लगे रहते हैं। शहरों में कोई भी खाली जमीन हो, उस पर निर्माण के लिए म्युनिसिपल, स्थानीय विकास प्राधिकरण, या कोई और स्थानीय संस्था अपनी पूरी ताकत झोंक देती हैं, और शहर के भीतर खुली जगह खत्म होती चलती है। जो निजी जमीनें हैं उन पर निर्माण तो सरकार के काबू के बाहर का रहता है, और उन पर महज कुछ नियम लागू किए जा सकते हैं, लेकिन दमघोंटू हो चुके शहरों के बीच की सरकारी खुली जमीन हो तो सरकार को बख्शना चाहिए और शहरों को फेंफड़े रखने की इजाजत देनी चाहिए। राजधानी रायपुर में पुरानी मंडी की इससे भी बड़ी जमीन खाली पड़ी हुई है, और बरसों से वहां बड़ा सा बाजारू निर्माण करने के लिए म्युनिसिपल या आरडीए लगे हुए हैं, वहां भी चारों तरफ पूरे दिन ट्रैफिक जाम रहता है, और वहां भी सरकार को अपना खुद का एक इंच भी नया निर्माण नहीं करना चाहिए। सरकार ने यह बहुत अच्छा फैसला लिया है, इससे आने वाली पीढिय़ों को सांस लेने का हक मिल सकेगा, और हम पहले भी कई बार यह बात लिख चुके हैं कि जब नई राजधानी बन चुकी है, तो सरकार को अपना हर निर्माण वहीं करना चाहिए, क्योंकि उस सुनसान वीरान इलाके को बसाना भी सरकार का सरदर्द बना हुआ है, और पुराने शहर में खुली जगह बची नहीं है। ऐसे में राज्य सरकार को एक नीतिगत फैसला यह लेना चाहिए कि बहुत ही जरूरी या इमरजेंसी जनसुविधाओं से परे ऐसा कोई निर्माण पुराने शहर में न किया जाए, जिसे यहां किए बिना इस शहर का काम न चल सके। आज भी ऐसा हो नहीं रहा है, और सरकार से लेकर स्थानीय संस्थाओं तक को देखा जा सकता है कि वे किसी तरह पुराने शहर में नए निर्माण के उत्साह से भरी हुई हैं। यह सिलसिला खत्म होना चाहिए, क्योंकि एक बार जहां इमारतें बन गईं, वहां पर दुबारा कोई मैदान या बगीचा नहीं बन सकते।
इसके अलावा सरकार को पुराने रायपुर शहर से लगे हुए नया रायपुर के हिस्से पर ऐसी योजनाएं तुरंत बनानी चाहिए जिससे कि शहर के लिए सुविधाओं के लिए वहां तक विस्तार हो सके, शहर का काम निकल सके, और नया रायपुर की वीरानी खत्म भी हो। इसके लिए पुराने शहर से लगे हुए हिस्सों पर सरकार कई तरह के तालाब, बगीचे, पिकनिक-स्पॉट, और शादी के मैदान बना सकती है, और इससे पुराने शहर और नई राजधानी के बीच का एक रिश्ता भी कायम हो सकेगा। फिलहाल सरकार का यह फैसला बहुत अच्छा है कि शहर के बीचोंबीच 19 एकड़ का एक बगीचा बनाया जाएगा, लेकिन सरकार को इसके बीच किसी संग्रहालय, या किसी भी इमारत को बनाने का काम बिल्कुल नहीं करना चाहिए, इस जगह पर महज पेड़ लगने चाहिए, और इससे शहर की तस्वीर एकदम ही बदल जाएगी। इस पर ऐसा बगीचा भी नहीं बनाना चाहिए जो कि मानवनिर्मित लगता हो, और जिसका महंगा रखरखाव हो, यहां पर खालिस देसी और स्थानीय नस्लों के पेड़ लगाने चाहिए, और लोगों को कुदरत के बीच कुछ सांस लेने का मौका मिलना चाहिए।

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