बैंकों में लगातार छुट्टियां, और हड़ताल से बुरा हाल

संपादकीय
27 फरवरी 2017


दो दिनों के बाद आज बैंक खुले, तो कल फिर बैंक हड़ताल की घोषणा सामने खड़ी हुई है। पिछले साल भर से भारतीय बैंकों में महीने में दो शनिवार बैंक बंद रहने लगे हैं, और नतीजा यह है कि जो कारोबार ऑनलाईन नहीं होते हैं, उन सबको बड़ी दिक्कत हो रही है। बैंकों का अधिक दिन बंद रहना, या लगातार बंद रहना, उन देशों में तो ठीक है जहां पर अधिकतर लोग क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, या फिर ऑनलाईन बैंकिंग से सब काम हो जाता है। भारत जैसे देश में जहां लोग बैंकों में रोज नगदी जमा करते हैं, वहां पर बैंक के काऊंटर न खुलने पर कारोबार में बड़ी दिक्कत आ रही है। एक दिक्कत यह भी है कि बैंक को किसी भी दूसरे सरकारी दफ्तर की तरह मानकर सरकार ने हफ्ते में दो बार दो-दो दिनों के लिए बंद रखना शुरू कर दिया है, और बैंक कर्मचारी ऐसे ही दिनों के अगल-बगल के दिन हड़ताल के लिए चुन लेते हैं। साथ-साथ कई बार ऐसे शनिवार-इतवार से लगे हुए कोई त्यौहार आ जाते हैं, और बैंक तीन-चार दिन तक बंद रहते हैं।
चूंकि देश का कारोबार और छोटे-बड़े सभी तरह के लोगों की जिंदगी बैंकों पर जितनी टिकी हुई है, उसे डिजिटल इंडिया के नाम पर रातों-रात नहीं बदला जा सकता। ऐसे में बैंक की कुछ न्यूनतम सेवाओं को ऐसी छुट्टियों से परे रखने की जरूरत है, बल्कि देश के हित में यह भी होगा कि मामूली लेन-देन वाले बहुत से कामों के लिए बैंकों की कुछ शाखाओं में शाम या रात को भी कामकाज हो सके। ऐसा होने पर बैंकों तक आने-जाने वाले लोगों की भीड़ भी शहरी सड़कों को दिन में व्यस्त नहीं रखेगी, और लोग इत्मिनान से शाम को भी बैंकिंग कर सकेंगे। दिन की भारी भीड़ में बैंकों का बर्ताव भी बिगड़ जाता है, और लोग सार्वजनिक रूप से भारत के बैंकों के खिलाफ लिखने को मजबूर होते हैं, खासकर एसबीआई जैसे बैंक में लंच के लंबे घंटे लगातार आलोचना झेलते हैं।
भारत की अर्थव्यवस्था आज मंदी की शिकार भी है। अधिकतर कारोबारी ऐसे हैं जिनके पास रोज का काम चलाने के लिए भी रकम नहीं रहती है। ऐसे में जब मामूली चेक दो-चार दिन तक खाते में नहीं आ पाते, तो लोगों का कामकाज चौपट हो जाता है। अगर संख्या में गिनें, तो भारत में दो-चार फीसदी लोग भी ऑनलाईन बैंकिंग नहीं करते होंगे, और ऐसे लोगों को जब दो-चार दिन लगातार बैंक बंद मिलते हैं, तो भारत की बैंक सुविधा की साख भी चौपट होती है। जिस तरह अस्पताल, फायर ब्रिगेड, या पुलिस की सेवा लोगों के लिए छुट्टी के दिन भी जरूरी है, उसी तरह बैंकों की कुछ सीमित सुविधाएं छुट्टियों के दिन भी चलनी चाहिए, और इसके लिए हर बैंक की हर शाखा का खुला रहना जरूरी नहीं हैं, अलग-अलग इलाकों में अलग-अलग बैंकों को शाम-रात के लिए या छुट्टी के लिए खोलने का इंतजाम किया जाना चाहिए। दिन के व्यस्त घंटों से परे शाम के घंटों का कामकाज बैंकों के अलावा भी कई दूसरी जगहों पर शुरू करने की जरूरत है ताकि शहरी ट्रैफिक घट सके, लेकिन बैंकों में यह काम तुरंत सोचना चाहिए। लोगों के पास अपने खुद के पैसों तक पहुंच अगर अधिक रहेगी, तो उससे भारत की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा भी मिलेगा। 

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