फ्रांस में एक अतिदक्षिणपंथी नेता के बेटे ने की बड़ी हिंसा

संपादकीय
17 मार्च 2017


फ्रांस के एक स्कूल में आज 16 बरस के एक लड़के ने बंदूक-पिस्तौल और हथगोले से लैस होकर प्रिंसिपल और दूसरे बच्चों पर गोलीबारी की, जिसमें कई लोग घायल हो गए, और यह लड़का भी गिरफ्तार कर लिया गया है। इसके फेसबुक पेज पर हिंसा और नफरत से भरी हुई तस्वीरें भरी पड़ी थीं, और उसे हथियारों से खास लगाव था। स्कूल में वह दूसरे बच्चों से अलग-थलग रहता था, और सबसे बड़ी बात यह है कि उसका पिता फ्रांस का एक अतिदक्षिणपंथी राजनेता है। योरप में ऐसे अतिदक्षिणपंथी लोग नस्लवादी हिंसा को बढ़ावा देने वाले माने जाते हैं, और आमतौर पर शरणार्थी, अप्रवासी, धार्मिक अल्पसंख्यक लोगों के खिलाफ मुद्दे उठाकर राजनीति करते हैं।
किसी एक मामले को लेकर बहुत लंबा-चौड़ा निष्कर्ष निकालना ठीक नहीं होता, लेकिन हम इसे न सिर्फ हिन्दुस्तान से, बल्कि दुनिया की बाकी जगहों से भी जोड़कर एक मोटी बात करना चाहते हैं। जो लोग नफरत और हिंसा की बात करते हैं, चाहे वे अमरीका में हों, फ्रांस या जर्मनी में हों, हॉलैंड या हिन्दुस्तान में हों, ऐसे लोग न सिर्फ मौजूदा हवा को खराब करते हैं, बल्कि वे विरासत में नफरत की ऐसी फसल छोड़कर जाते हैं जो कि आने वाली कई पीढिय़ों को अपने जहर से तबाह करती है। ये बातें परिवार के भीतर हिंसक बातों से लेकर, समाज और देश में सार्वजनिक रूप से हिंसा या नफरत की बातों तक फैली रहती हैं, और इनका खतरा तुरंत तो नहीं दिखता है, लेकिन बचपन से ही लोगों पर इसका असर पडऩे लगता है। जिन परिवारों में मां-बाप सिगरेट-तम्बाखू, या शराब-जुएं की लत रखते हैं, उन परिवारों में बच्चों का भी इस खतरे में पडऩा अधिक होता है। जहां पर मां-बाप जाति या धर्म के आधार पर, विचारधारा या रंग के आधार पर नफरत की बातें करते हैं, वहां पर बच्चे तुरंत ही नफरत को अपना लेते हैं, और उसे आगे भी बढ़ाते चलते हैं।
यह सिलसिला आने वाली दुनिया को अपने ही बच्चों के लिए एक अधिक खतरनाक जगह बनाकर छोड़कर जाने का रहता है, और इससे तमाम लोगों को बचना चाहिए। जिस तरह से कई बच्चे परिवार के पेशे को अपना लेते हैं, और अपने मां-बाप की तरह उन्हीं के काम को करने लगते हैं, उसी तरह हिंसा का सिलसिला भी अगली पीढ़ी तक आगे बढ़ता है, और हो सकता है कि वह अधिक खतरनाक दर्जे की हिंसा बनकर और आगे की पीढिय़ों तक जाने लगे। इसलिए लोगों को यह ध्यान रखना चाहिए कि विरासत में महज जमीन-जायदाद, या दौलत छोड़कर जाना काफी नहीं है, बल्कि अच्छी मिसालों और अच्छी सोच को छोड़कर जाना भी जरूरी है। दुनिया में नस्ल के आधार पर या रक्त के आधार पर कुछ नहीं होता, जो कुछ होता है वह पारिवारिक माहौल के आधार पर होता है, सामाजिक-पर्यावरण के आधार पर होता है, और चारों तरफ देखे-सुने के असर से होता है। इसलिए लोगों को अपनी जिंदगी में नफरत और हिंसा की बातें करते हुए यह ध्यान रखना चाहिए कि वे अपने बच्चों को एक बड़े खतरे में भी डाल रहे हैं, जिससे कि किसी दिन या तो वे हिंसा में मारे जा सकते हैं, या हिंसा करके दूसरों को मार सकते हैं। 

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