नवरात्रि का धार्मिक जमावड़ा जागरूकता फैलाने का मौका

संपादकीय
28 मार्च 2017


भारत के बहुत बड़े हिस्से में आज से 9 दिनों तक देवी की पूजा होगी, और समारोह चलते रहेंगे। करोड़ों लोग उपवास भी करेंगे, और देवी दर्शन के लिए जगह-जगह मंदिरों में भी जाएंगे। यह मौका धार्मिक भावनाओं से भरा होता है, और समाज के साथ-साथ सरकार को भी इसका इस्तेमाल करना चाहिए। एक तो भारत में महिलाओं की जो बुरी स्थिति है, उसे देखते हुए लोगों को यह याद दिलाने की जरूरत है कि इस देश की संस्कृति में महिलाओं के लिए कितना सम्मान रहते आया है, और आज जब समाज का एक बड़ा तबका अपनी सांस्कृतिक जड़ों को कायम रखने पर आमादा है,तब यह भी समझने की जरूरत है कि आज समाज में लड़कियों और महिलाओं के साथ जुल्म करते हुए, या जुल्म देखते हुए ऐसी किसी संस्कृति का कोई महत्व नहीं रह जाता। यह मौका देवियों की प्रतिमाओं की पूजा करने के साथ-साथ जीवित देवियों का सम्मान सिखाने का भी होना चाहिए।
लेकिन इसके साथ-साथ ऐसे हर धार्मिक या सामाजिक मौके पर कई और तरह की जागरूकता भी फैलाई जा सकती है। देवी-मंदिरों में पॉली बैग पर रोक लगाकर लोगों को ऐसे प्रदूषण के खिलाफ जागरूक किया जा सकता है। इस मौके पर लोगों को यह भी सिखाया जा सकता है कि किस तरह पूजा-पाठ के बाद का धार्मिक-कचरा सड़कों के किनारे न फेंका जाए, नदियों और तालाबों में ना डाला जाए। मंदिरों के बाहर लोगों में जागरूकता के पर्चे भी बांटे जा सकते हैं, और धर्मगुरूओं से भी अपील की जा सकती है कि वे जागरूकता के मुद्दों पर अपनी आवाज में रिकार्डिंग करवाएं, जिन्हें कि जगह-जगह सुनाया जा सके। जहां कहीं बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं, उनके बीच जनजागरण के लिए सरकार को भी पहले से तैयारी करके रखनी चाहिए, और छत्तीसगढ़ में राज्य सरकार जिस तरह प्रचार-वैन का इस्तेमाल कर रही है, उन्हें भी ऐसे मंदिरों के आस-पास लगाकर उनकी स्क्रीन पर जागरूकता के मुद्दों को दिखाया जा सकता है। आमतौर पर समाज या सरकार किसी नसीहत या सलाह को देने के लिए बड़ा खर्च करके ही लोगों तक पहुंच सकते हैं, लेकिन जब खुद होकर ऐसी भीड़ जुटती है, तो उसका मुफ्त इस्तेमाल समझदारी की बात होगी।
पिछले बरसों में छत्तीसगढ़ में कई जगहों पर ऐसे मौकों पर वन विभाग पौधे बांटने का काम करता है ताकि लोग लौटकर जाकर अपने घरों के आसपास पेड़ लगाएं। ऐसे मौकों पर स्वास्थ्य विभाग, म्युनिसिपल-विभाग भी साफ-सफाई के लिए पर्चे बांट सकते हैं। सरकार के हर विभाग के पास लोगों को समझाने के लिए, बताने के लिए कई बातें रहती हैं, और किसी भी धर्म या समाज के ऐसे आयोजनों के पहले विभागों को अपनी योजना बना लेनी चाहिए।

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