योगी के आने से बढ़े हौसले से घिरे हरियाणा और राजस्थान भी

संपादकीय
29 मार्च 2017


उत्तरप्रदेश में योगी सरकार आने के बाद अवैध बूचडख़ाने को रातों-रात बंद करवाने की सरकार की कार्रवाई से अब उन लोगों का हौसला बढ़ते चल रहा है जो लोग खानपान के अपने तरीकों, और अपनी धार्मिक मान्यताओं को बाकी तमाम लोगों पर हमलावर तरीके से थोपना चाहते हैं। आज दिल्ली के राजधानी क्षेत्र के एक हिस्से, और हरियाणा में आने वाले गुडग़ांव में शिवसैनिकों ने नवरात्रि की वजह से मांस की तीन सौ दुकानें बंद करवा दीं। इस हरियाणा में भी भाजपा की सरकार है, और भाजपा के समर्थक-साथी दल-संगठन बड़े उत्साह में हैं। उत्तरप्रदेश में योगी सरकार ने प्रेमी-प्रेमिका या दोस्त लड़के-लड़कियों का साथ तोडऩे के लिए जो रोमियो दस्ते बनाए हैं, वे भाई-बहन को भी पकड़कर मार रहे हैं, और वहां की पुलिस के एक अफसर ने मीडिया को यह बात बड़े फख्र के साथ बताई है कि अब जवान लड़की को लाने या छोडऩे घरवाले उसके भाई को साथ नहीं भेजते, घर के किसी बुजुर्ग को जाना पड़ता है। मानो इसी से उत्साह पाकर राजस्थान में बीती रात पुलिस ने फिल्म देखकर घर लौटते पति-पत्नी को पकड़ा, और उनसे शादीशुदा होने का सर्टिफिकेट पेश करने को कहा, महिला के बाल पकड़कर उसे घसीटा जो कि पास के किसी सीसी टीवी कैमरे में कैद भी हुआ है।
यह पूरा सिलसिला देश को कुछ सदियों पहले ले जाने का है जब न आजादी थी, न संविधान था, न लोगों के मौलिक अधिकार थे, और जो राज करते थे, उनकी सोच को मार-मारकर लागू करवा दिया जाता था। हमने पिछले दिनों ही इसी जगह नई-नई बनी योगी सरकार के रोमियो दस्ते के बारे में लिखा भी था कि यह रोमियो नाम को बदनाम करने का एक नाजायज काम है, और इक्कीसवीं सदी में ऐसी बंदिशें थोपना सरकार के संवैधानिक अधिकारों से परे की बात है, और संवैधानिक जिम्मेदारी के खिलाफ भी है। लेकिन जहां कहीं लोकतंत्र के ऊपर धार्मिक सोच लादी जाती है, वहां पर इस तरह के गैरकानूनी काम सरकारी फैसलों के तहत ही होने लगते हैं। जिस नवरात्रि का नाम लेकर गुडग़ांव में मांस की दुकानों को गुंडागर्दी से बंद करवाया गया है, वहां ऐसी गुंडागर्दी करने वाले लोगों के हिन्दू धर्म के लोग ही देश में कई प्रदेशों और कई जगहों पर देवी पूजा करते हुए जानवरों की बलि देते हैं। हिन्दू धर्म के भीतर भी बड़ी संख्या में लोग मांसाहारी हैं, और कुछ जगहों पर देवी के प्रसाद के रूप में मांस दिया और खाया भी जाता है।
संस्कृति और धर्म के नाम पर आज चारों तरफ जिस तरह की दहशत फैलाई जा रही है, वह देश में अलग-अलग तबकों को एक-दूसरे से दूर धकेलने का काम कर रही है। भारत की जिस मिलीजुली संस्कृति, और उसकी वजह से भारत की जिस ताकत का जिक्र अभी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दो दिन पहले ही किया है, और जो इतिहास में अकबर के वक्त से लेकर अभी तक लगातार दर्ज हुआ है, उसे सत्ता में आते ही कुछ हफ्तों के भीतर खत्म कर देने की यह हड़बड़ी इस देश में कभी न सुधरने वाला नुकसान कर रही है। एक धर्म, एक रंग, एक किस्म का खानपान, एक किस्म का रहन-सहन, एक किस्म की पोशाक, एक आकार का परिवार, इस तरह की अनगिनत बातों को चुनावी-बहुमत की ताकत से जब लोकतंत्र के ऊपर हावी किया जा रहा है, तो उससे होने वाले नुकसान की भरपाई पांच बरस बाद भी, नई और किसी दूसरी सरकार के आ जाने के बाद भी नहीं हो पाएगी। और हमारा ख्याल है कि दुनिया में जहां कहीं से भी भारत पूंजीनिवेश की उम्मीद करता है, वहां से भी भारत को अपने ऐसे घरेलू हमलों के चलते निराशा मिल सकती है। इसके साथ-साथ घरेलू मोर्चे पर जब इतनी ज्यादा बेचैनी रहेगी, इतनी ज्यादा नफरत रहेगी, तो देश की भीतरी अर्थव्यवस्था भी खराब होगी। आज तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता मिलने से देश का घरेलू आर्थिक मोर्चा ठीक दिख रहा है, लेकिन धीरे-धीरे करके पर्यटकों को बेचैन करना, लोगों के पेशेवर कामकाज को तबाह करना, और रोजगार को नुकसान करना, इन सबका कुल मिलाकर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। मोदी को अपने साथियों पर काबू करना होगा, वरना चुनावी जीत से बढ़े हुए उनके कद को नुकसान उनके घर के भीतर से ही हो रहा है।

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन ब्लॉग बुलेटिन - १६० वर्ष पहले आज भड़की थी प्रथम भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की ज्वाला में शामिल किया गया है।कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. अति सर्वत्र वर्जयेत्

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