आधार कार्ड की जानकारी बुलबुले जितनी ही सुरक्षित

संपादकीय
30 मार्च 2017


क्रिकेट सितारे महेन्द्र सिंह धोनी के घर जाकर आधार कार्ड के लिए अंगूठा निशान लेने वाली एजेंसी ने कर्मचारी की तस्वीर तो ट्वीट की ही, धोनी के परिवार की जानकारी वाला गोपनीय फॉर्म भी ट्वीट कर दिया। जब इसे लेकर तस्वीर का प्रचार कर रहे केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद से धोनी की पत्नी, साक्षी धोनी, ने आपत्ति दर्ज कराई, तो वे शुरू में आपत्ति की वजह समझ भी नहीं पाए। बाद में वह फॉर्म ट्विटर से हटाया गया। अब हर दिन केन्द्र सरकार किसी न किसी काम के लिए आधार कार्ड का इस्तेमाल अनिवार्य करते जा रही है, और कुछ दिन बाद मोबाइल फोन के सिम कार्ड के लिए भी आधार अनिवार्य रहेगा। आधार कार्ड से लोगों के बैंक खाते जोड़ दिए गए हैं, उनके क्रेडिट कार्ड जोड़ दिए गए हैं, राशन कार्ड से लेकर ड्राइविंग लाइसेंस तक जुड़ गए हैं, ट्रेन या प्लेन की टिकटों के लिए कहीं-कहीं आधार जरूरी किया जा रहा है, और ऐसी नौबत दिख रही है कि जिसके पास आधार कार्ड न हो, उनका हिन्दुस्तान में रहना मुश्किल हो जाए।
पिछली मनमोहन सिंह सरकार की इस योजना का आज के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सहित उनके बहुत से मंत्रियों ने जमकर विरोध किया था, और इसे गोपनीयता के खिलाफ बताया था, और लोगों की निजी जिंदगी के अधिकार का उल्लंघन कहा था। लेकिन सरकार में आने के बाद अच्छी बात यह रही कि मोदी ने इसके पायदे महसूस किए, और इसे न सिर्फ जारी रखा, बल्कि इसके लिए लंबा-चौड़ा बजट भी दिया, और इसके इस्तेमाल को अधिक से अधिक जगहों पर अनिवार्य बनाना जारी रखा। नतीजा यह है कि अब केन्द्र सरकार की योजनाओं में रियायत पाने के अलावा बाकी तमाम बातों के लिए आधार की अनिवार्यता को सुप्रीम कोर्ट ने भी मंजूरी दे दी है। केवल जनकल्याण की अनुदान योजनाओं को अभी आधार से बाहर इसलिए रखा है कि इस कार्ड के न बन पाने पर कोई जरूरतमंद वंचित न रह जाए।
लेकिन अब सवाल यह उठता है कि जिस तरह धोनी के परिवार का फॉर्म पोस्ट कर दिया गया, उसी तरह देश में आज दसियों लाख गैरसरकारी लोग आधार कार्ड बनाने से जुड़े हुए हैं। ये लोग अपने कम्प्यूटरों पर हर किसी की तमाम जानकारियों को लेकर बैठे रहते हैं, और आज इसी देश में अगर देखें कि कई कारोबारी जिस तरह मोबाइल नंबरों पर संदेश भेजने के धंधे के लिए करोड़ों लोगों के नाम-पते और जात सहित उनके नंबर की जानकारी चुराकर रखते हैं, उस तरह से आधार की जानकारी तक पहुंचना भी मुश्किल नहीं है। आज दुनिया में सबसे विकसित कंपनियों के ई-मेल खातों में घुसपैठिये ऐसे घुस जाते हैं कि वे एक साथ दस-दस, बीस-बीस लाख लोगों के पासवर्ड चुरा लेते हैं, तो ऐसे में भारत सरकार की गली-गली फैली हुई आधार-जानकारी की भला क्या सुरक्षा हो सकती है। आज तो नए मोबाइल सिम बेचते हुए लोग फुटपाथ पर फिंगर प्रिंट स्केनर लेकर खड़े रहते हैं, और लोगों से अंगूठा लगवाकर पल भर में आधार-डाटाबेस से उसकी शिनाख्त करवा लेते हैं, और सिम कार्ड शुरू हो जाता है। जिस आधार-डाटाबेस तक पहुंचना इतना आसान हो गया है, उसमें घुसपैठ भला क्या मुश्किल होगी?
और आधार कार्ड बनवाने के लिए लोगों को अपने अंगूठे और उंगलियों के निशान देने पड़ते हैं। आज दुनिया में कहीं न कहीं ऐसी टेक्नालॉजी बन गई होगी जिससे लोगों के ऐसे डिजिटल निशानों को किसी जगह पर उतारा जा सके। अब अगर किसी हथियार पर, या किसी जुर्म की जगह पर लोगों के फिंगर प्रिंट लगाने की तकनीक किसी के हाथ आ गई, तो आज तो अदालतें ऐसे सुबूत को मानकर किसी को सजा दे ही देंगी। हमारा ख्याल है कि आधार कार्ड से होने वाली सहूलियतों को लेकर उसके सुरक्षा-खतरों को अनदेखा किया जा रहा है, और जिस दिन ऐसे खतरे सामने आएंगे, उस दिन तक तो साइबर-मुजरिमों के पास हिन्दुस्तान की पूरी आबादी की जानकारी, और उनके निशान होंगे। मुजरिमों और कारोबारियों से, खुफिया एजेंसियों और बदला लेने के लिए बदनाम नेताओं से जनता की निजी और गोपनीय जानकारी कब तक बचाई जा सकेगी, यह अंदाज नहीं लगाया जा सकता। आधार कार्ड के मार्फत सरकार पूरी आबादी की रोज की जिंदगी पर ऐसी निगरानी रख सकती है कि जिसे कोई अपराधकथा लेखक की बता सकते हैं। यह एक खतरनाक बुलबुला है, और किसी भी दिन इसके फूटने से हिन्दुस्तान की पूरी आबादी एक अकल्पनीय खतरे में घिरी हुई दिखेगी।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें