बजट का बढऩा काफी नहीं है, भ्रष्टाचार घटना भी जरूरी...

संपादकीय
6 मार्च 2017


छत्तीसगढ़ सरकार का बजट इस वक्त पेश हो रहा है, और वित्तमंत्री के रूप में  मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह एक बार फिर विधानसभा के सामने प्रदेश के अगले बरस की एक संभावित तस्वीर पेश कर रहे हैं। एक वक्त प्रदेश में वित्त मंत्री के काम को पूर्णकालिक से भी अधिक माना जाता था, लेकिन पिछले कई बरसों से रमन सिंह अपने कुछ और विभागों के साथ-साथ वित्त मंत्री का काम भी बखूबी कर रहे हैं, और इस बार का बजट सभी चुनाव निपट जाने के बाद का बजट है, फिर भी वह करीब-करीब हर विभाग में विस्तार और विकास का है, और राज्य भर में हर किस्म के बहुत से नए कामों का इसमें जिक्र है। ये लाईनें लिखते हुए अभी बजट आ ही रहा है इसलिए उसकी बारीकियों पर आज हम नहीं जा रहे, लेकिन पहली नजर में जो बातें दिख रही हैं, उनसे लगता है कि देश में कम ही राज्यों में ऐसी आर्थिक सम्पन्नता और उदारता के बजट आएंगे।
इस बजट के साथ-साथ आज हवा में यह बात भी तैर रही है कि राज्य में सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार पकड़ाते भी जा रहा है, और कम भी नहीं हो रहा है। आज जब राज्य विधानसभा की अधिकारी दीर्घा में सारे बड़े अफसर बैठकर मुख्यमंत्री को बजट पढ़ते देख रहे थे, तब एक प्रमुख सचिव बाबूलाल अग्रवाल दिल्ली की जेल में सीबीआई की गिरफ्तारी के बाद बैठे हुए हैं, और छत्तीसगढ़ सरकार में बड़े अफसरों के स्तर पर भ्रष्टाचार इस मामले को लेकर कुछ हफ्तों से खबरों में बना हुआ है। ऐसे में सरकार का बजट चाहे जितना हो, उसमें भ्रष्टाचार और चोरी-डकैती में कितना बड़ा हिस्सा चले जाएगा, इसका अंदाज लगाना हमारे लिए मुश्किल है, लेकिन सरकार के अलग-अलग विभागों में जो लोग काम करते हैं, उनके लिए यह अंदाज आसान भी है। हम पहले भी बजट के मौके पर इस जरूरत को गिना चुके हैं कि सरकार अपनी संपन्नता की वजह से आज अधिक किफायत की बात नहीं करती है, और कोयला-सम्पन्न राज्य होने की वजह से अगले तीस बरस तक इस राज्य में कमाई बरसनी है, लेकिन उसके साथ-साथ हम इस बात को बहुत महत्वपूर्ण मानते हैं कि सरकार अपने कामकाज में ईमानदारी लाने की कोशिश करे, भ्रष्टाचार को रोकने की कोशिश करे। ऐसा न होने पर बजट जितना बढ़ते चले जाएगा, भ्रष्ट लोग उतने ही अधिक संपन्न और ताकतवर होते चले जाएंगे।
न सिर्फ इस राज्य में, बल्कि बाकी देश में भी भ्रष्टाचार एक बहुत ही मजबूत खतरा बन गया है, और इसे दूर करने की जरूरत है। हमने दूसरे कई राज्यों में मुख्यमंत्रियों को जेल जाते देखा है, और कई राज्यों में बड़े-बड़े अफसर जेल में हैं, फरार हैं। छत्तीसगढ़ को यह तसल्ली हो सकती है कि यहां का भ्रष्टाचार इतना अधिक नहीं है, और ऐसी कोई नौबत यहां पर नहीं आई है, लेकिन फिर भी सरकार के भीतर के लोग ही इस बात की गारंटी लेते हैं कि राज्य सरकार के कामकाज में, केन्द्र सरकार की योजनाओं पर इस राज्य में अमल में परले दर्जे का भ्रष्टाचार है। पिछले बरसों में एक-एक अफसर के यहां छापे में जिस तरह से करोड़ों की नगदी बरामद हुई है, उससे यह साफ है कि सरकार के बजट का कितना बड़ा हिस्सा नेता-अफसर-ठेकेदार की जेब में जा रहा है। राज्य सरकार को एक ऐसा खुफिया निगरानी तंत्र बनाना चाहिए जो कि अफसरों के करोड़पति और अरबपति होने के पहले ही भ्रष्टाचार को रोक सके। जब पंछी खेत चर जाए, उसके बाद उसके पीछे दौडऩे से कुछ हासिल नहीं होता। सरकार को भ्रष्टाचार विरोधी मशीनरी को मजबूत करना चाहिए, और उसका विस्तार करना चाहिए। दूसरी तरफ सरकार के कामकाज के भीतर काम करने के तरीकों को ऐसा पारदर्शी बनाना चाहिए कि संगठित बड़ा भ्रष्टाचार टूट सके। जैसे-जैसे भ्रष्ट लोग मजबूत होते जाते हैं, वैसे-वैसे वे लोग राजनीतिक ताकत भी खरीदने लगते हैं। इस पूरे सिलसिले को थामने की जरूरत है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले बरसों में एक अच्छा काम यह किया था कि भ्रष्ट अफसरों की दौलत को जब्त करने के लिए एक अलग कानून बनाया, और उसके लिए अलग अदालती कार्रवाई भी तय की थी, लेकिन उस पर कोई अमल अब तक तो दिखा नहीं है। कानून तो बहुत से अच्छे होते हैं, लेकिन उन पर अमल की नीयत जब तक न हो, तब तक वे कानून न सिर्फ बेअसर हो जाते हैं, बल्कि लोग उनके खिलाफ एक दुस्साहस भी विकसित कर लेते हैं। राज्य सरकार को बहुत तेजी से उसके पास बरसों से पड़े हुए भ्रष्टाचार के मामलों को हर किस्म की अदालती कार्रवाई की मंजूरी देनी चाहिए, और संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई भी तेजी से करनी चाहिए। इसमें देर होने से सारी जमीन-जायदाद लोग दूसरों के नाम पर कर देते हैं और जनता के खजाने में कुछ लौट नहीं सकता। राज्य सरकार को इस नए कानून के साथ-साथ पहले से मौजूद कानूनों का इस्तेमाल तेजी से और बड़े पैमाने पर करना चाहिए, उसके बिना इस बढ़े हुए बजट से भ्रष्ट लोगों की कमाई और बढ़ जाएगी।
फिलहाल बजट की बारीक बातों के खुलासे तक, उसके विश्लेषण तक हम अभी अपनी इसी पुरानी सलाह को आज यहां दुहरा रहे हैं कि बजट के आकार का बढ़ते चले जाना काफी नहीं है, इसके साथ-साथ अगर भ्रष्टाचार का आकार घटना नहीं हो पाएगा, तो जनता तक फायदे नहीं पहुंच पाएंगे।

1 टिप्पणी:

  1. आपकी ब्लॉग पोस्ट को आज की ब्लॉग बुलेटिन प्रस्तुति ब्लॉग बुलेटिन - आप सभी को लठ्ठमार होली (बरसाना) की हार्दिक बधाई में शामिल किया गया है। सादर ... अभिनन्दन।।

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