भारत-पाकिस्तान तनाव के बीच मौत की एक सजा का तनाव और

संपादकीय
12 अप्रैल 2017


भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर एक बड़ा तनाव खड़ा हो गया है, वहां पर गिरफ्तार किए गए भारत के एक रिटायर्ड नौसेना अफसर को भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के लिए पाकिस्तान में जासूसी करने के आरोप में वहां की एक फौजी अदालत ने मौत की सजा सुनाई है। पाकिस्तान का कहना है कि कुलभूषण नाम का यह भारतीय वहां पर जासूसी कर रहा था, और पिछले बरसों में कुलभूषण के कुछ ऐसे वीडियो भी पाकिस्तान में जारी किए थे जिसमें वह इस काम का जुर्म मानते हुए दिखाई देता है।
भारत की संसद इस मुद्दे को लेकर उबल पड़ी है, और सत्ता पक्ष और विपक्ष में इस पर एकता का हाल यह है कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कांग्रेस पार्टी के अंतरराष्ट्रीय मामलों के बड़े जानकार शशि थरूर से भारत के विरोध-प्रस्ताव को तैयार करने का अनुरोध किया है। भारत के किसी व्यक्ति को पाकिस्तान में मौत की सजा हो, तो भारत के लोगों का उबलना स्वाभाविक है। लेकिन क्या यह उबलना जायज भी है, इस बारे में सोचने की जरूरत है। भारत का कहना है कि पिछले बरसों में पाकिस्तान में मौजूद उसके राजनयिकों ने एक दर्जन से अधिक बार वहां की सरकार से यह अपील की थी कि भारत के इस नागरिक से उन्हें जेल में मिलने का मौका दिया जाए, लेकिन एक बार भी उन्हें यह मौका नहीं मिला। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक संबंधों के तहत शायद पाकिस्तान की यह मनाही जायज नहीं थी, और भारत अपने एक नागरिक की मदद नहीं कर सका। दूसरी तरफ अब भारत का यह कहना है कि पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किए गए कुलभूषण पर वहां मुकदमा एक फौजी अदालत में चलाया गया, और उस पर फौज का कोई आरोप नहीं था, और यह अदालती कार्रवाई जायज नहीं थी। भारत ने यह भी कहा है कि वह लीक से हटकर भी कार्रवाई करेगा ताकि अपने इस नागरिक को बचा सके। पाकिस्तान का यह कहना है कि कुलभूषण के पास अभी वहां की ऊंची अदालत में अपील करने के लिए छह महीने का समय है, और उसे इस मौके का इस्तेमाल करना चाहिए।
भारत और पाकिस्तान के बीच लोगों पर कार्रवाई इस बात पर टिकी रहती है कि दोनों सरकारों के बीच संबंध कैसे हैं? अगर संबंध अच्छे रहते हैं तो गलती से सरहद पार करके आ गए बच्चे या बड़े भी वापिस पहुंचा दिए जाते हैं, या कि एक-दूसरे की समुद्री सरहद में पकड़ाए गए मछुआरे लौटा दिए जाते हैं। लेकिन जब सरकारों में तनातनी चलती रहती है, तो न तो क्रिकेट हो पाती है, न फिल्में रिलीज हो पाती हैं, और न ही एक-दूसरे देश में जाकर फिल्मी कलाकार काम कर पाते हैं। आम नागरिकों को भी तीर्थयात्रा के लिए, या कि रिश्तेदारी में आने-जाने के लिए मौका नहीं मिलता है, क्योंकि दोनों ही देश वीजा देने के मामले में तंगदिली दिखाने लगते हैं। और अभी कुल पौन सदी पहले तक तो दोनों ही देश एक थे, और दोनों के बीच रिश्तेदारी से लेकर कारोबार तक, और खेल से लेकर कला तक, इस तरह के जटिल अंतरसंबंध बने हुए हैं कि सरकारों के बीच की सारी तनातनी के बावजूद वे कायम रहते हैं।
हमारा ख्याल है कि कुलभूषण के मामले को अलग-थलग करके देखना मुमकिन नहीं होगा, और दोनों देशों की सरकारों को तनाव कम भी करने होंगे। जब आपस में टकराव अधिक रहता है, तो उसका नतीजा सरहद के दोनों तरफ की जमीन पर भी दिखता है। पिछली चौथाई सदी में सबसे कम मतदान भारत के कश्मीर में अभी इसी हफ्ते दिखाई पड़ा है। कश्मीर में तनाव का सीधा रिश्ता भारत और पाकिस्तान के तनाव से रहता है, और सरहद के इस राज्य की हकीकत को अनदेखा नहीं करना चाहिए। आज भारत और पाकिस्तान दोनों को यह भी समझना चाहिए कि दुनिया की दो बड़ी फौजी ताकतें, अमरीका और चीन, भारत और पाकिस्तान के बीच दखल देकर, और दोनों तरफ अलग-अलग भी अपनी ताकत बढ़ाने में लगी हुई हैं, इससे इन दोनों देशों के बीच आपसी मतभेदों को आपस में निपटाने की चली आ रही लंबी और पुरानी सहमति भी खत्म होने का एक खतरा है, और दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ अंधाधुंध फौजी खर्च भी कर रहे हैं। अगर रिश्ते ठीक रहें तो यह खर्च घटेगा, और कारोबार से दोनों ही देशों की कमाई भी बढ़ेगी। यह एक मौका आया है जब दोनों देशों को तनाव घटाने की एक और कोशिश करनी चाहिए, क्योंकि जनता के हित में शांति के अलावा और कुछ नहीं हो सकता।

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