स्मृति अवकाशों की समाप्ति की योगी की राय सही

संपादकीय
15 अप्रैल 2017


उत्तरप्रदेश के नए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंबेडकर जयंती के एक समारोह में कहा कि महान लोगों के जन्मदिन पर स्कूलों में होने वाली छुट्टियों को खत्म करना चाहिए क्योंकि ऐसी छुट्टियां इतनी बढ़ती जा रही हैं कि साल में कुल सवा सौ दिन पढ़ाई हो पाती है, जबकि सरकारी लक्ष्य सवा दो सौ दिनों का है। योगी की और कई बातों से असहमत हुआ जा सकता है, लेकिन यह एक बात उन्होंने पते की की है जिससे स्कूलों की हालत सुधर भी सकती है। आज तो गुजर चुके महान लोगों का सम्मान करने के नाम पर कहीं चबूतरों पर उनकी प्रतिमाएं खड़ी कर दी जाती हैं, जिनमें जनता का पैसा लगता है, तो कहीं पर उनके जन्मदिन पर या पुण्यतिथि पर स्कूल-कॉलेज बंद रहते हैं, और कुछ तारीखें ऐसी भी रहती हैं जिनमें सरकारी दफ्तर भी बंद रहते हैं। यह सिलसिला खत्म करना बहुत जरूरी इसलिए है कि ऐसे दिनों पर छुट्टी से इन महान लोगों के सम्मान बढऩे का, या कि उन्हें याद करने का कोई काम नहीं होता बल्कि लोग ऐसे तमाम काम करने लगते हैं जो उजागर हो जाएं तो महान लोगों का अपमान होने लगे। फिर स्कूल और कॉलेज को धार्मिक, राजनीतिक, और जातिगत वजहों से शुरू की गई ऐसी छुट्टियों से आजाद रखना चाहिए, और ऐसी बातों को उनकी किताबों से भी बाहर रखना चाहिए। ऐसा न होने पर सत्ता में आई राजनीतिक पार्टी अपनी मर्जी से पढ़ाई के दिन घटाती जाएगी, और किताबों को ऐसे पाठों से लादती जाएगी।
दरअसल भारत में स्कूली पढ़ाई को, स्कूलों को, और स्कूली किताबों को तय करने का काम शिक्षा के जानकार लोगों के बजाय सत्तारूढ़ नेता और सत्ता चला रहे अफसर करते हैं। न तो इनके पास शिक्षा की जरूरतों की समझ होती, और न ही बाल मनोविज्ञान की कोई जानकारी होती। ऐसे में आए दिन यह भी देखने मिलता है कि कोई भी अफसर अपनी मर्जी से स्कूली बच्चों के जुलूस निकालकर उन्हें जानवरों के रेवड़ की तरह हांकने का काम करने लगते हैं, किसी भी मंत्री-मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में स्कूलों से निकालकर बच्चों को झोंक दिया जाता है। अभी कुछ दिन पहले ही छत्तीसगढ़ में प्रौढ़ साक्षरता का इम्तिहान चल रहा था, और परीक्षा दे रही महिलाओं को वहां से निकालकर किसी मंत्री के कार्यक्रम में भेज दिया गया था।
किसी भी महान व्यक्ति की स्मृति में उनके जन्मदिन या उनकी पुण्यतिथि पर स्कूल-कॉलेज में बच्चों के बीच दस-पन्द्रह मिनट का कोई भाषण हो सकता है जिससे कि उन्हें जानकारी मिल जाए। छुट्टी से न किसी की जानकारी में कोई इजाफा होता, और न ही कोई सम्मान बढ़ता। सम्मान करने के नाम पर उत्पादकता को खत्म करने का सिलसिला पूरी तरह गलत है। और हम इस बात को पढ़ाई को बढ़ाने के लिए नहीं कह रहे, स्कूलों में पढ़ाई कितनी हो, खेलकूद कितना हो, और बाकी काम कितने हों, इसे तय करना विशेषज्ञों का जिम्मा होना चाहिए। हम सिर्फ यह कह रहे हैं कि स्कूलों में जाने के दिन बढऩे चाहिए, और स्मृति-अवकाश का सिलसिला खत्म किया जाना चाहिए। इस देश में स्थानीय परंपराओं के मुताबिक त्यौहार, और स्वतंत्रता दिवस, गणतंत्र दिवस जैसे दो मौके काफी हैं, इनसे परे की छुट्टियां खत्म होनी चाहिए।

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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  2. सही है महान व्यक्तियों की जानकारी एक-दो घंटे में दिया जाना चाहिए। पूरे दिन की छुट्टी का गहराई से सोचे तो कोई औचित्य नहीं है ?

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