आतंक की फंडिंग और पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वालों का धर्म

संपादकीय
16 अप्रैल 2017


छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में कल कुछ लोगों को गिरफ्तार किया गया जिनके बारे में पुलिस ने कहा कि ये लोग कश्मीर के आतंकियों के लिए आने वाली पैसों के खाते सम्हालते थे, और इनके खातों में बाहर से बड़ी रकम आती थी, और ये लोग उन्हें आतंकियों तक पहुंचाने का काम करते थे। पुलिस ने यह बात गिरफ्तार लोगों के बयानों की बुनियाद पर कही है, और बैंकों के खातों की जानकारी भी निकाल ली है। पुलिस का यह भी कहना है कि छत्तीसगढ़ के ही कुछ और लोग इसी आतंक-फंडिंग के जुर्म में फरार हैं, और उनकी तलाश की जा रही है। कश्मीर में ये लोग आतंकियों तक पैसा पहुंचाने के लिए जिन लोगों तक रकम पहुंचाते थे, उनमें से दो लोगों के नाम सामने आए हैं, और हैरान करने वाली बात यह है कि ये सारे के सारे नाम हिन्दू नाम हैं, और इनके बारे में पुलिस ने बताया है कि ये लोग पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के लिए जासूसी का काम करते थे।
लोगों को याद होगा कि अभी कुछ महीने पहले ही मध्यप्रदेश की पुलिस ने वहां के एक भाजपा पदाधिकारी सहित कुछ दूसरे लोगों को गिरफ्तार किया कि वे लोग पाकिस्तान की आईएसआई के लिए जासूसी कर रहे थे। इसमें भाजपा का जो पदाधिकारी पकड़ाया था, उसकी तस्वीरें भी पार्टी के बड़े-बड़े नेताओं के साथ उसके फेसबुक पेज पर सजी हुई थीं। इन दोनों ही राज्यों में भाजपा की सरकार है, और ऐसा मानने का कोई कारण नहीं है कि यहां की पुलिस हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए उन पर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने और आतंकियों तक पैसे पहुंचाने का झूठा आरोप लगाकर उनके खिलाफ झूठे केस बनाएगी। और ये सारे नाम हैरान करने वाले भी हैं, क्योंकि अगर ये नाम मुस्लिमों के होते तो उन्हें गद्दार कहते हुए उन्हें फांसी देने, चौराहों पर पत्थरों से मारने, और पाकिस्तान भेज देने जैसी मांग उठने लगती। अब चूंकि भाजपा की पुलिस ने ही इन्हें गिरफ्तार किया है, इसलिए ऐसे हिन्दुओं के खिलाफ पाकिस्तानपरस्त होने की बात भी नहीं उठ रही है।
लोगों को यह समझना चाहिए कि धार्मिक कट्टरता और आतंक के लोग किसी मजहब से जुड़े हो सकते हैं, किसी धर्म से जुड़े हो सकते हैं, लेकिन यह भी हो सकता है कि वे उस आतंक के पैसों के हाथ बिके हुए हों जो कि किसी दूसरे धर्म का है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के ये मामले इसी बात का सुबूत हैं, और इन दोनों ही राज्यों में इतने लंबे समय से भाजपा की सरकारें चली आ रही हैं कि ऐसे हिन्दुओं के खिलाफ कोई झूठे सुबूत गढऩे का वक्त भी इन बरसों में किसी को नहीं मिला होगा, न ही किसी को सूझा होगा, और न ही इन सुबूतों में कोई कमी दिख रही। इस बात पर चर्चा आज इसलिए जरूरी है कि सोशल मीडिया सहित भारतीय राजनीति में बहुत से लोग लगातार एक सवाल उठाते हैं कि जहां कहीं आतंकी हमला होता है, वहां पर उसमें कोई मुस्लिम शामिल क्यों पाया जाता है। हमारे इन दो राज्यों से परे भी देश में जगह-जगह भाजपा की सरकारों वाले राज्यों में ऐसे अनगिनत हिन्दू गिरफ्तार हुए हैं जो कि तरह-तरह के आतंक में लगे हुए थे। कर्नाटक में जब भाजपा की सरकार थी, वहां पर पाकिस्तान के झंडे फहराकर साम्प्रदायिक दंगा करवाने की कोशिश में कुछ हिन्दुओं को, और हिन्दू संगठनों के सक्रिय लोगों को भाजपा की ही पुलिस ने गिरफ्तार किया था जिन पर अभी मुकदमा चल ही रहा है। अभी-अभी राजस्थान का एक फैसला आया है जिसमें अजमेर दरगाह पर बम विस्फोट करने के जुर्म में कुछ लोगों को सजा हुई है, और ये तमाम हिन्दू लोग निकले हैं, और अदालत के बाहर की जो तस्वीरें आई हैं उनमें वे भगवा पहने हुए भी दिख रहे हैं, माथे पर तिलक लगाए हुए भी दिख रहे हैं।
इसलिए विविधताओं से भरे हुए इस देश में किसी धर्म या किसी जाति, किसी क्षेत्र या किसी भाषा के लोगों को किसी पूर्वाग्रह के साथ देखना और दिखाना ठीक नहीं है। और यह भी समझने की जरूरत है कि लगातार हिन्दू संगठनों में सक्रिय रहने वाले लोग भी मुस्लिम आतंकी संगठनों, मुस्लिम देश की आईएसआई जैसी खुफिया एजेंसी के हाथों कैसे बिक जाते हैं, और यह भी समझने की जरूरत है कि इनमें से कोई भी भूख से मरते हुए हिन्दू नहीं थे कि जिनके सामने जिंदा रहने के लिए जासूसी करना या आतंक का साथ देना जरूरी रहा हो। इसी सिलसिले में एक आखिरी बात यह कि जो लोग सोशल मीडिया पर हिंसक बातों को करने के लिए रात-दिन सक्रिय रहते हैं, वे लोग अपने धर्म के लोगों की गिरफ्तारी के बाद जुबान क्यों सिल लेते हैं?

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