आज मुस्लिम महिला का दिन आ गया दिखता है...

संपादकीय
17 अप्रैल 2017


देश में आज अचानक मुस्लिमों के तीन तलाक का मामला बहुत जोर पकड़ता दिख रहा है। उत्तरप्रदेश में, जहां कि देश की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी रहती है, वहां पर भाजपा को जितनी बड़ी जीत मिली है उसे देखते हुए भाजपा बहुत उत्साह में है, और चुनाव के पहले उसने मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक की बेइंसाफी से बचाने के लिए जो चुनावी वायदा किया था, अब उसे पूरा करने में उसके ऊपर किसी वायदाखिलाफी की बात भी नहीं आ सकती, क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि इस चुनाव में भाजपा को मुस्लिम-बहुल इलाकों से भी जो अभूतपूर्व और अप्रत्याशित बहुमत मिला है, वह मुस्लिम महिलाओं का है। हम इस बात पर कोई भरोसा नहीं करते कि उत्तरप्रदेश में भाजपा की जीत ईवीएम की दिलवाई हुई है, क्योंकि अगर ऐसा मुमकिन होता तो भाजपा बाकी राज्यों में अपने मुख्यमंत्री क्यों खोती, पंजाब में अपनी ऐसी दुर्गति क्यों करवाती? इसलिए मोदी के विरोधियों को भी यह समझ लेना चाहिए कि कौन सी बातों ने भाजपा को इतना जनमत दिलाया है।
हमारा मानना है कि मुस्लिम समाज को एक वोट बैंक मानकर चलना एक घिसीपिटी सोच है जो कि सच नहीं है। और खासकर तब जब मुस्लिम महिला के हक का मामला, और मुस्लिम आदमी की धाक का मामला आमने-सामने हो। इस देश में मुस्लिम महिला को उसका पति तीन बार तलाक कहकर छोड़ सकता है, और मुस्लिम समाज के जो धार्मिक ठेकेदार हैं, वे अपने लोगों, खासकर अपने मर्दों की इस तानाशाही को घटाने को तैयार नहीं हैं, और इक्कीसवीं सदी में आकर भी वे गुफा की तरह जीना चाहते हैं। ऐसे में जब भाजपा से मुस्लिम महिलाओं को यह उम्मीद दिखी कि वह ऐसे अमानवीय तलाक से उसे आजादी दिला सकती है, तो उन्होंने भाजपा को वोट दिया। बाकी राज्यों में मुस्लिम आबादी इतनी बड़ी नहीं थी कि वहां भाजपा को इसका कोई फायदा मिलता।
आज बाकी पार्टियों को भी यह समझने की जरूरत है कि कोई पहल अगर हिन्दुत्व वाली भाजपा कर रही है, तो उसका मतलब यह नहीं कि बाकी पार्टियां उसका विरोध करने लगें। अगर कोई मुद्दा सही है, तो आज भाजपा की तरह बाकी पार्टियों को भी खुलकर सामने आना पड़ेगा, और मुस्लिम महिला का साथ देना पड़ेगा। इस बात का कोई न्यायसंगत तर्क नहीं हो सकता कि मुस्लिम मर्द अपनी पत्नियों को अमानवीय हालत में रखते रहें, और अल्पसंख्यक नाराज न हों, इसलिए बाकी पार्टियां चुप बैठी रहें। वामपंथी हों या कांग्रेसी, उन्हें यह भी समझना होगा कि अल्पसंख्यक तो मुस्लिम महिला भी है, और वह मुस्लिम आबादी का आधा हिस्सा भी है, अगर उसे अपने साथ सदियों से चले आ रहे जुल्म से छुटकारा पाने का एक रास्ता दिखेगा तो वह उस तरफ जाएगी ही जाएगी।
कांग्रेस का पुराना इतिहास बहुत ही खराब रहा है, और विदेश में पढ़े हुए, पायलट रहे हुए, एक नौजवान प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने जिस तरह अपने ऐतिहासिक संसदीय-बाहुबल से एक अकेली शाहबानो का गला घोंट दिया था, और सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलटने के लिए संसद में संविधान संशोधन करवा दिया था, आज दिन उसका ठीक उल्टा दिख रहा है। आज अपने ऐतिहासिक बहुमत, और हैरान करने वाली लोकप्रियता के बीच नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी अगर तीन तलाक जैसी दकियानूसी बात से मुस्लिम महिला को आजाद कर सकते हैं, तो देश की महिलाएं, न सिर्फ मुस्लिम महिलाएं, बल्कि बाकी महिलाएं भी उनके साथ रहेंगी, और लोग आज इस साफगोई को पसंद कर रहे हैं कि जो कहा सो किया। आज बाकी राजनीतिक दलों को और सामाजिक संगठनों को मुस्लिम महिला का साथ देते हुए खुलकर सामने आना चाहिए। आज मुस्लिम महिला का दिन आ गया दिखता है। 

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