आजादी का अधिकार बिना जिम्मेदारी नहीं

संपादकीय
21 अप्रैल 2017


उत्तरप्रदेश की वाराणसी की खबर है कि जिला प्रशासन ने आदेश निकाला है कि वाट्सएप के ग्रुप में जो बातें उसके सदस्य पोस्ट करते हैं, उसके लिए ग्रुप के एडमिन जिम्मेदार होंगे। अभी यह एक अफसर का आदेश है और आगे चलकर इसे अदालतों में चुनौती भी मिलेगी, लेकिन तब तक उन लोगों को इस बारे में सोचना चाहिए जो कि आज मुफ्त के इस संचार-औजार का इस्तेमाल कर रहे हैं, जमकर कर रहे हैं।
लोगों को अपने समूह में मनचाही बातें करने, लिखने, और भेजने की आजादी तो है, लेकिन कोई भी आजादी कुछ जिम्मेदारियों के साथ ही आती है। बीती रात दिल्ली में एक स्कूली छात्र ने कार से सड़क किनारे सोए लोगों को कुचल डाला, एक की मौत हो गई, कई जख्मी हो गए। अब उसके परिवार के खिलाफ भी जुर्म दर्ज हो रहा है जिसके नाम कार थी? बिना ड्राइविंग लाइसेंस यह लड़का गाड़ी चला रहा था। एक गाड़ी कुछ शर्तों के साथ मिलती है, सड़क पर उसे चलाने के कुछ नियम रहते हैं, और कुछ बुनियादी जिम्मेदारियां भी रहती हैं। कार एक मशीनी औजार है जिसके इस्तेमाल का हक जिम्मेदारी की शर्तों के बिना नहीं मिलता। यह ठीक वैसा ही है कि पिस्तौल का लाइसेंस इस शर्त के साथ आता है कि कोई दूसरा उसे इस्तेमाल न करे, उसका बेजा इस्तेमाल न हो।
वाट्सएप जैसी संचार-सुविधा से आज पल भर में दुनिया भर में कोई वीडियो, कोई तस्वीर, या कोई लेखन फैलाया जा सकता है, और उसका विस्तार फिर बेकाबू हो जाता है। इसलिए ऐसे समूहों में जो पोस्ट होता है उसकी जिम्मेदारी किसी को तो लेनी ही होगी। कोई अपनी लाइसेंसी बंदूक चौराहे पर छोड़कर जिम्मेदारी से बच तो नहीं सकते। इसलिए सरकारों के भारत के बहुत कड़े आईटी कानून के तहत यह गारंटी करनी चाहिए कि ऐसे समूहों में पोस्ट होने वाली बातों के लिए उनके एडमिन को जवाबदेह और जिम्मेदार बनाया जाए। आज हिंदुस्तान में अचानक नफरत और बर्बादी पर भरोसा रखने वाले लोग रातों रात अभिव्यक्ति की एक ऐसी स्वतंत्रता का इस्तेमाल कर रहे हैं। जिनकी सोच इस देश के कानून के ठीक खिलाफ है। नए औजार और नई तकनीक किसी को लोकतंत्र और इंसानियत को तबाह करने का हक नहीं दे देते। इसलिए देश के कानून को अपनी जिम्मेदारी कड़ाई से पूरी करनी चाहिए। संचार साधनों पर एक बार किए गए पोस्ट का सुबूत जुटाना आसान रहता है, सरकारी एजेंसियां कुछ सौ लोगों को सजा दिला देंगी तो बाकी को भी सबक मिलेगा। आज सोशल मीडिया और ऐसे समूहों पर रात-दिन लोगों को हत्या और बलात्कार की धमकी दी जा रही है, और सरकारें अपना जिम्मा पूरा नहीं कर रही हैं।

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