रविशंकर प्रसाद की कही बातें और मुस्लिमों के जख्म हरे...

संपादकीय
22 अप्रैल 2017


देश में मुस्लिमों को लेकर भारतीय जनता पार्टी नेताओं और उनके सहयोगी संगठनों के लोगों की कही बातों से पैदा होने वाली गलतफहमियां खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। एक तरफ जब राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपने राज्य में कश्मीरी छात्रों पर बार-बार होने वाले हमलों को लेकर कड़ी कार्रवाई की बात कह रही हैं, और कश्मीरी बच्चों को अपना बच्चा कह रही हैं, तब दूसरी तरफ केन्द्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद खुद होकर मुस्लिमों के बारे में एक ऐसी बात कह रहे हैं जिससे खुद उनकी कही हुई बात के खिलाफ माहौल बन रहा है। राजस्थान की बात का लेकर केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी यह कहा है कि कश्मीर के लोग देश के परिवार के लोग हैं, और उन्हें पूरी सुरक्षा दी जाएगी, लेकिन ऐसे माहौल में रविशंकर प्रसाद की कही हुई एक बात से मुस्लिमों का फिर भड़कना, और उनके जख्म फिर हरे हो जाना तय है। कांग्रेस के एक बड़े मुस्लिम नेता सलमान खुर्शीद, और मुस्लिम राजनीति करने वाले ओवैसी ने रविशंकर प्रसाद के बयान पर कड़ा हमला किया है।
कल रविशंकर प्रसाद ने एक कार्यक्रम में मंच से यह कह दिया कि मुसलमान भारतीय जनता पार्टी के लिए वोट नहीं करते हैं, लेकिन भाजपा की सरकारें उन्हें पर्याप्त इज्जत देती हैं। उन्होंने कहा कि देश में भाजपा के 13 मुख्यमंत्री हैं, और देश पर भी भाजपा का राज है, लेकिन क्या कभी किसी नौकरीपेशा या व्यापार करने वाले सज्जन मुसलमान को प्रताडि़त किया गया है? रविशंकर प्रसाद सुप्रीम कोर्ट के एक बड़े नामी वकील हैं, और उनसे यह उम्मीद की जाती है कि उनकी कही बातें कम से कम तर्कसंगत और न्यायसंगत तो होनी ही चाहिए। लेकिन यहां पर वे चूक कर गए, और देश में आज घायल चल रही एक बिरादरी के बारे में उन्होंने गैरजिम्मेदारी की बात कही क्योंकि कोई वोट किसी को दे या न दे, निर्वाचित सरकार की यह संवैधानिक जिम्मेदारी होती है कि वह सबके साथ बराबरी का बर्ताव करे, और ऐसा करना किसी बड़प्पन की बात नहीं है, यह संवैधानिक जिम्मेदारी की बात है, और इसे गिनाना एक ओछेपन की बात है। फिर जब कभी ऐसी बात गिनाई जाती है तो कहने वाले की नीयत पर एक शक भी होता है कि क्या जुबानी जमाखर्च के लिए ऐसी सफाई दी जा रही है?
आज हम देख रहे हैं कि कश्मीर में एक स्थानीय मुस्लिम नौजवान को थलसेना के सैनिकों ने किस तरह गाड़ी पर सामने बांधकर बहुत से गांवों से गुजारा ताकि वहां सेना पर होने वाले आम पथराव से गाडिय़ों के काफिले को बचाया जा सके। आज देश में समझ न रखने वाले कई लोग सेना की इस बात को यह कहकर सही ठहरा रहे हैं कि जब कश्मीर के बहुत से नौजवान रात-दिन सैनिकों पर पथराव करते हैं, तो उसके जवाब में सैनिकों का ऐसा करना क्या गलत है? इसमें बुनियादी तौर पर गलत यह है कि कश्मीरी पत्थरबाजों ने संविधान की शपथ नहीं ली है, और न ही वे सरकारी नियमों से बंधे हुए हैं, इसलिए उनका जुर्म करना एक आम मुजरिम की तरह है, और उसके लिए वे सजा के हकदार भी हैं। दूसरी तरफ जब सेना देश के कानून के खिलाफ, मानवाधिकार के खिलाफ, इंसानियत के खिलाफ कोई कार्रवाई करती है, तो उससे पूरे लोकतंत्र की साख पर आंच आती है, सरकार की फजीहत होती है, और देश भर में जनता का भरोसा सेना पर से उठता है कि वह भी जुल्म और ज्यादती करने वाली एक फौज है। इसलिए जब आज देश में कहीं गाय के नाम पर किसी गौपालक मुस्लिम को सड़कों पर पीटकर मारा जा रहा है, कहीं मुस्लिम समाज के अपने धार्मिक नियमों के तहत प्रचलित तलाक की एक बुरी प्रथा को खत्म करने की कोशिश की जा रही है, तो ऐसे नाजुक माहौल में सरकार को, सत्ता से जुड़े हुए लोगों को बहुत जिम्मेदारी से काम लेना चाहिए, क्योंकि देश में अगर धार्मिक आधार पर लोगों को ऐसा लगने लगे कि उनके साथ भेदभाव हो रहा है, तो यह बहुत खतरनाक बात है।

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व पृथ्वी दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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