ठगी-जालसाजी वाले गांवों पर भी शिकंजा क्यों नहीं?

संपादकीय
9 अप्रैल 2017


पिछले कुछ दिनों से लगातार ये खबरें आ रही हैं कि किस तरह देश के कुछ गिने-चुने शहरों में बैठकर पूरे देश में फोन करके लोगों को ठगने और बैंक-जालसाजी करने वाले लोग पकड़ में आ रहे हैं। लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि झारखंड के किसी एक गांव में अगर हजारों लोग यही काम कर रहे हैं, तो मोबाइल फोन पर धोखा देने के इस संगठित जुर्म को पकडऩे के लिए अलग-अलग राज्यों की पुलिस को क्यों मेहनत करनी पड़ रही है, जहां के लोग ठगे जा रहे हैं? केन्द्र सरकार या स्थानीय राज्य ऐसे संगठित अपराध पर सीधे कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रहे?
आज हिन्दुस्तान में जिस रफ्तार से लोगों का मोबाइल का इस्तेमाल बढ़ा है, बैंक और उनकी बाकी सुविधाओं को आधार कार्ड से जिस रफ्तार से जोड़ा जा रहा है, और लोगों की तकनीकी समझ अब तक जितनी सीमित है, इन सबके चलते एक खतरनाक नौबत आकर खड़ी हो गई है, और बैंकवाला बनकर ठग लोगों को फोन करते हैं, उनके नंबर पूछ लेते हैं, और उनके खातों से रकम निकाल लेते हैं। आज केन्द्र सरकार नगदी को घटाकर लोगों के हर तरह के कामकाज में बैंक खाते को जिस आक्रामक तरीके से बढ़ावा दे रही है, उतनी आक्रामकता न तो लोगों को जागरूक करने में दिखती, और न ही ऐसे साइबर क्राईम को पकडऩे की तैयारी में दिखती। हम पहले भी यह बात लिखते आए हैं कि भारत में ठगी और जालसाजी जैसे आर्थिक अपराधों की रिपोर्ट होने के बाद उनकी जांच और कार्रवाई में बहुत देर हो जाती है, और तब तक लोग तो लुट चुके रहते हैं। ऐसे में आर्थिक अपराधों के लिए एक खुफिया निगरानी तंत्र होना चाहिए जो कि ऐसे अपराध होने के पहले ही, या होना शुरू होते ही उन्हें रोक सके ताकि लुटने वाले लोगों की गिनती न बढ़े।
अब जब टेलीफोन नंबरों की शिनाख्त के बाद उनके इलाके को जाना जा सकता है, तब यह बात हमारी समझ से परे है कि एक-दो गिने-चुने बदनाम गांव-कस्बे ऐसे कैसे हो सकते हैं कि जहां हजारों लोगों का पेशा ही ठगी-जालसाजी, और साइबर जुर्म हो? ऐसे गांव पर कार्रवाई आसान हो सकती है, वहां के नंबरों से होने वाले कॉल की रिकॉर्डिंग हो सकती है, वहां से चलने वाले बैंक खातों पर नजर रखी जा सकती है, और अगर सरकार ऐसा नहीं कर पाती है, तो उसे डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने का कोई अधिकार भी नहीं है। डिजिटल इंडिया जैसे-जैसे शक्ल लेता जाएगा, वैसे-वैसे बेकसूर लोग और भी अधिक शिकार होते जाएंगे। इस सिलसिले को तुरंत रोकने की जरूरत है, और यह मामला ऐसा है जिसमें भारत के बाहर बसे हुए साइबर-विशेषज्ञ भारतवंशी लोग भी मदद कर सकते हैं। भारत सरकार को बिना देर किए एक अभियान इसी पर चलाना चाहिए, और उसे आगे भी जारी रखना पड़ेगा क्योंकि साइबर-सुरक्षा में सरकार जितना भी आगे बढ़ेगी, मुजरिम उससे चार कदम आगे चलने के रास्ते निकालते ही रहेंगे।

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जन्म दिवस - राहुल सांकृत्यायन जी और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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