कुछ के तलुए सहलाना और कुछ को पैरोंतले कुचलना...

संपादकीय
20 मई 2017


छत्तीसगढ़ में जनता की दिक्कतों को जानने के लिए चल रहे लंबे लोकसुराज कार्यक्रम में अभी एक जिले में लगातार दो दिन वहां के कलेक्टर पर भाजपा के दो नेता बरसे। एक भूतपूर्व मंत्री थे, और एक वर्तमान मंत्री। इन दिनों हर किसी के हाथ में मोबाइल फोन रहता है इसलिए इन दोनों घटनाओं की वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर तैर रही है। कुछ लोगों को लग सकता है कि नेताओं ने अफसर के साथ बुरा सुलूक किया है, कुछ लोगों को यह लग सकता है कि जनता की दिक्कतों की बात करने वाले सत्तारूढ़ पार्टी के बड़े नेताओं के साथ बात करते हुए कलेक्टर का व्यवहार ठीक नहीं था। लेकिन इन दोनों में से जो भी बात सही हो, यह बात तो अपनी जगह सही है ही कि जिसके हाथ अधिक ताकत रहती है, उसका बर्ताव अपने से कमजोर लोगों के साथ अमूमन खराब रहता है। लोगों का बर्ताव अपने से बड़े ओहदे वाले, या कि अधिक ताकत वाले लोगों के साथ तो चाहते हुए, या कि मजबूरी में अच्छा रहता है, लेकिन जहां अपने से कमजोर लोग सामने आए, लोग अपने असली रंग में आने लगते हैं, और बदसलूकी शुरू हो जाती है।
आज ही महाराष्ट्र की एक खबर है कि किस तरह वहां जेल में बंद एक विधायक ने अदालत जाने के लिए गाड़ी लेट होने पर पुलिस को धमकाया और गालियां देते हुए कहा कि पुलिस उसे जानती नहीं है क्या? यह विधायक तीन सौ करोड़ के घोटाले में 19 महीने से जेल में है, लेकिन ऐंठ अभी तक गई नहीं है। पुरानी कहावत है कि रस्सी जल गई, लेकिन बल नहीं गया। ऐसा ही इस विधायक के बर्ताव से दिखाई पड़ता है, और महाराष्ट्र से परे कम से कम पूरे हिन्दुस्तान में तो यह दिखता ही है कि ताकत सिर चढ़कर बोलती है, और कमजोरी लोगों को पैरों पर गिरा देती है। अब अगर इसके पीछे की मानसिकता को देखें, तो इसकी एक बहुत अच्छी मिसाल इन दिनों हिन्दुस्तानी टीवी पर बड़े मशहूर हुए कपिल के कॉमेडी शो में देखने मिलती है।
जिन लोगों ने यह कार्यक्रम देखा है उन्होंने भी इस बात का एहसास नहीं किया होगा कि पूरे का पूरा कार्यक्रम इस सोच पर बनाया गया है कि इसका मुख्य किरदार कपिल शर्मा, अपने से कमजोर तमाम लोगों की खिल्ली उड़ाकर, उनको बेइज्जत करके, उनके साथ परले दर्जे की बदसलूकी करके लोगों को हंसाता है। दूसरी तरफ कार्यक्रम में आने वाले प्रमुख कलाकारों से वह शुरू से आखिर तक महज चापलूसी करता है, और मानो उनके तलुए सहलाता है। इस कार्यक्रम को अगर देखें तो यह इंसानी सोच के दो बिल्कुल अलग-अलग पहलुओं के बीच बना हुआ है। ताकतवर के तलुए सहलाओ, और कमजोर को पैरोंतले कुचलो। एक-दो बरस से लगातार यही करते-करते इस कामयाब कॉमेडियन की अपनी सोच यह हो गई कि कुछ महीने पहले उसने अपने ही साथियों से एक विमान में नशे में धुत्त होकर भारी बदसलूकी की, और उसके घमंड को देखकर वे कलाकार कार्यक्रम छोड़ गए।
शोहरत और कामयाबी की ताकत किस तरह सिर चढ़कर सब कुछ तबाह करती है, इसकी इससे बड़ी कोई मिसाल हाल के बरसों में हमें याद नहीं पड़ती। और कॉमेडी शो से लेकर राजनीति तक, सरकार तक, और सार्वजनिक जीवन तक लोगों का बर्ताव इन्हीं दो ध्रुवों के बीच कभी इधर तो कभी उधर खिसकते रहता है। बहुत से लोग तो ठीक इसी कॉमेडी शो की तरह, कुछ मिनट चापलूसी में लग जाते हैं, और कुछ मिनट दूसरे लोगों को दुत्कारने में। इसे देखते हुए ऐसा लगता है कि सरकार को सत्तारूढ़ नेताओं और सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों के बर्ताव तय करने के लिए मेहनत करनी चाहिए। अभी दो दिन पहले ही छत्तीसगढ़ के एक मंत्री महज तौलिया लपेटे हुए कुर्सी पर पसरे दिख रहे थे, और सामने उनके दरबार में बहुत सी बेबस महिलाएं अपनी अर्जियां लेकर खड़ी थीं। हमारा ख्याल है कि ऐसे बर्ताव चाहे वे मंत्रियों के हों, या कि अफसरों के हों, इसके खिलाफ जनता को भी उठ खड़ा होना चाहिए, और इसे जमकर धिक्कारना चाहिए, क्योंकि सरकारी कामकाज जनता के पैसों पर चलता है, वह किसी निजी टीवी कंपनी का बनाया हुआ कॉमेडी शो तो है नहीं। सरकार अगर खुद नहीं सुधरती, तो उसके लोगों की बदसलूकी के खिलाफ जनता को उठना चाहिए। सरकार की ताकत की ऐसी ही बददिमागी के चलते हुए दो दिन पहले बिलासपुर में एक गरीब औरत बच्चे को जन्म देने दो सरकारी अस्पतालों से भगा दिए जाने के बाद सड़क किनारे के किसी खंडहर में बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर हुई थीं। यह मामला खबरों से हटा नहीं है कि आज एक और तस्वीर छपी है कि किस तरह 92 बरस की एक बुजुर्ग महिला को वृद्धावस्था पेंशन पाने के लिए सरकारी दफ्तर में बुलाया गया, और उसके परिवार का एक आदमी उसे ठेले पर लिटाकर भरी धूप में वहां लेकर गया। सरकार अगर संवेदनशील नहीं होती, तो ऐसे मामलों को लोगों को उठाना चाहिए, और इनके लिए जिम्मेदार अफसरों या नेताओं के नाम दूसरों के सामने बार-बार दुहराने चाहिए।

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