छंटनी के इन दिनों में कर्मचारियों को सलाह

संपादकीय
24 मई 2017


भारत में सरकार के दावे चाहे जो हों चारों तरफ से छंटनी की खबरें आ रही हैं। कुछ तो अमरीका की वजह से आईटी से जुड़ी नौकरियां वहां भी कम हो रही हैं, और उसके असर से हिन्दुस्तान में भी कम हो रही हैं, लेकिन वही अकेली जगह नहीं हैं। आज खबर आई है कि टाटा मोटर्स मैनेजमेंट के स्तर पर पंद्रह सौ लोगों की छंटनी कर रहा है। और यह छंटनी मजदूरों की नहीं है, मैनेजरों की है। इससे परे भी बहुत सी छोटी और मझली कंपनियों और दूसरे तरह के कारोबार में लगातार नौकरियां घट रही हैं, बढ़ तो कहीं नहीं रहीं। ऐसे में सभी कामगारों को अपने काम को बचाने की फिक्र करनी चाहिए।
दरअसल किसी भी संस्थान में जब किसी को नौकरी से हटाने की बात आती है, तो जो सबसे निकम्मे कर्मचारी रहते हैं, उनकी बारी सबसे पहले आती है। इसलिए सारे कामगारों को इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि अगर नौकरी उनके लिए मायने रखती है, तो उनको मेहनत और ईमानदारी से मैनेजमेंट के सामने अपनी ऐसी साख बनाए रखना चाहिए कि उनकी नौकरी जाने की बारी सबसे आखिर में आए। अब अगर किसी कंपनी ने उत्पादन ही घट जाए, कारोबार ठंडा हो जाए, तो एक अलग बात है, लेकिन ऐसा न होने पर काबिल लोगों को निकालने के बारे में कोई मैनेजमेंट नहीं सोचता है। नौकरी के साथ, और खासकर भारत जैसे देश में जहां पर लोग रातों-रात हटाए नहीं जा सकते, वहां पर कर्मचारियों की सोच नौकरी के हमेशा जारी रहने की हो जाती है। और ऐसा होता नहीं है। देश के मजदूर कानून बहुत मजबूत नहीं है, तो कमजोर भी नहीं है। लेकिन कानूनों पर अमल इतना कमजोर है कि मैनेजमेंट लोगों को आसानी से निकाल देता है, और बरसों तक कर्मचारी अपना बकाया भी वसूल नहीं कर पाते, मुआवजा तो दूर की बात है।
नौकरी लंबी होने से और उसकी निश्चिंतता होने से एक दिक्कत यह होती है कि कर्मचारी अपने काम को बेहतर बनाने को भूल ही जाते हैं। आज किसी भी कामकाज में टेक्नालॉजी का दखल इतना बढ़ रहा है, और लगातार बदल रहा है, कि जो लोग नई मशीनों पर, नए कम्प्यूटरों पर काम करना नहीं सीख पाते, उन्हें मैनेजमेंट अपनी छाती पर बोझ मानकर चलता है। यह सिलसिला बहुत लंबा नहीं चल पाता और ऐसे लोग जो कि वक्त के साथ कदम मिलाकर नहीं चल पाते हैं, वे नौकरी खो बैठने का खतरा पाले रखते हैं। आज दुनिया में तेल का भाव जमीन पर है, इसलिए बाकी बहुत से कारोबार अभी भी ऊंचाई पर हैं। अगर पेट्रोलियम महंगा होगा, तो भारत की अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी, और ऐसे बुरे वक्त के लिए लोगों को तैयार रहना चाहिए, नौकरी देने वालों को भी, और नौकरी पाने वालों को भी। बुरे वक्त में अच्छे-अच्छे मालिक का हौसला जवाब दे जाता है, और कर्मचारियों को कहीं भी काम नहीं मिल पाता। इसलिए हर किसी को अपने काम को बेहतर बनाकर अपनी नौकरी की गारंटी बनाकर रखना चाहिए।

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