उत्तरप्रदेश के हाईवे पर फिर मुसाफिरों से गैंगरेप, हत्या

संपादकीय
25 मई 2017


उत्तरप्रदेश में कुछ महीने पहले एक हाईवे पर कार रोकी गई थी, और लूटने के अलावा मुजरिमों ने कार में सफर कर रही महिलाओं से बलात्कार भी किया था। उस वक्त वहां समाजवादी पार्टी का राज था, और उस पर अपराधों को लेकर बेअसर होने की तोहमतें लगी थीं। अब उत्तरप्रदेश में भाजपा का योगीराज है, और पुलिस के अफसर भी दर्जनों के भाव में बदले जा चुके हैं, लेकिन अभी फिर वैसा ही एक जुर्म हुआ, और एक गाड़ी के चक्के पर गोली मारकर उसे रोका गया, बंदूक की नोंक पर चार महिलाओं से बलात्कार हुआ, उन्हें लूटा गया, और साथ में चल रहे परिवार के एक आदमी ने जब विरोध किया, तो उसका कत्ल कर दिया गया।
यह नौबत देश के किसी भी हिस्से के लिए बहुत भयानक है, क्योंकि सड़कों के रास्ते जो लोग सफर करते हैं, वे तो रात-दिन किसी भी वक्त किसी भी प्रदेश से गुजरते हुए आते-जाते हैं, और अगर ऐसे जुर्म देश के बाकी हिस्सों में बाकी लोगों के साथ होने लगें, तो लोगों की आवाजाही ठप्प ही पड़ जाएगी। दूसरी तरफ हरियाणा में भाजपा के राज में ही पिछले बरस जब जाट आंदोलन चल रहा था, तो उसमें रास्ते रोके गए थे, और एक कार से महिलाओं को उतारकर ले जाकर खेत में उनके साथ बलात्कार किया गया था। सरकार ने सरकारी मिजाज के मुताबिक बहुत समय तक ऐसे बलात्कार का खंडन किया था, लेकिन आखिर में जाकर सभी तरह की जांच में यह कायम हुआ, और बलात्कार की शिकार महिलाएं अपनी शिकायत पर कायम भी रहीं।
समाज में कमजोर तबकों को सबक सिखाने के लिए, उनका अपमान करने के लिए, किसी जाति से टकराव के चलते, या किसी धर्म से नाराजगी की वजह से हिन्दुस्तान में जगह-जगह बलात्कार को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जाता है। इसे पारिवारिक बदला निकालने के लिए, या कि जमीन-जायदाद के झगड़े के चलते हुए भी हथियार बनाया जाता है। लोगों को याद होगा कि उत्तरप्रदेश में एक कुख्यात डकैत रही, और बाद में सांसद बनी फूलन की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी कि पहले उसके साथ बलात्कार किया गया था, और फिर इसका बदला चुकाने के लिए उसने डकैत गिरोह बनाकर बलात्कारी-समुदाय की महिलाओं से थोक में बलात्कार करवाया था, हत्याएं करवाई थीं। यह बात सिर्फ हिन्दुस्तान में हो, ऐसा भी नहीं है। बहुत से देशों के बीच जब लड़ाईयां होती हैं, तब दुश्मन कहे जाने वाले देश की महिलाओं के साथ फौजियों का ऐसा सुलूक आम है। जो दुश्मन नहीं हैं, उनके साथ भी कई बार फौज इसी तरह का बर्ताव करती हैं। फौज के अलावा सुरक्षा बलों पर भी ऐसे आरोप लगते हैं, और भारत में भी मणिपुर से लेकर मिजोरम तक, और कश्मीर से लेकर बस्तर तक सुरक्षा बलों पर बलात्कार के आरोप लगते हैं कि उन्होंने हथियारबंद आंदोलनकारियों के हमलों का हिसाब चुकता करने के लिए स्थानीय महिलाओं के साथ बलात्कार किया।
यह भारत और बाकी दुनिया की महिलाओं के प्रति सोच का एक सुबूत और संकेत है। महिलाओं को बदला लेने के लिए एक सामान की तरह इस्तेमाल किया जाता है, और हिसाब चुकता किया जाता है। लोकतंत्र तो आ गया, लोगों में यह खुशफहमी भी आ गई कि वे सभ्य हो गए हैं, लेकिन उनके भीतर की मर्दानी-हिंसा कहीं नहीं गई, और जगह-जगह बलात्कार हो रहे हैं। और तो और अभी हमने सीरिया और इराक जैसे देशों में यह देखा है कि ईश्वर और धर्म का नाम लेकर आतंक करने वाले इस्लामी संगठन लगातार महिलाओं को गुलाम बनाकर उनके साथ बरसों तक बलात्कार को धर्म के मुताबिक काम साबित करते हैं। और दुनिया भर में होने वाले ऐसे अनगिनत बलात्कार के पीछे धर्म की कायम की हुई उस व्यवस्था का भी बहुत बड़ा हाथ है जिसके तहत मर्द को औरत से बेहतर और ऊपर बताया जाता है। दुनिया में एक भी शंकराचार्य, एक भी पोप, एक भी मुल्ला-मौलवी महिला नहीं हैं, और धर्म ने महिलाओं को शोषण के सिवाय कुछ दिया भी नहीं है। यही वजह है कि धर्म को मानने वाले लोगों की नजरों में औरत हमेशा से ही दूसरे दर्जे की नागरिक रहती हैं, और यह सोच धीरे-धीरे बलात्कारी होने लगती है, जरूरी नहीं है कि यह धार्मिक रीति-रिवाज के साथ, और धर्म की चर्चा के साथ किया गया आईएस जैसा बलात्कार हो, किसी आम मुजरिम का किया हुआ बलात्कार भी धर्म से उपजी उसकी मर्दाना सोच की वजह से होता है, और जब तक दुनिया में धर्मान्धता को बढ़ाया जाता रहेगा, तब तक लोकतंत्र का, इंसाफ का, महिलाओं का इसी तरह का नुकसान जारी रहेगा।
उत्तरप्रदेश का यह ताजा सामूहिक बलात्कार बताता है कि वहां सरकार तो बदल गई है, लेकिन मुजरिमों के हौसले नहीं बदले हैं, वे उसी तरह कायम हैं, और अब कई और किस्म के धार्मिक मुजरिम बढ़ जरूर गए हैं जो कि अपने धर्म और संस्कृति को दूसरे लोगों पर थोपने के लिए उनके तरह-तरह के हिंसक और पाखंडी रूप का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की साख के लिए एक बड़ी चुनौती है, और इससे उत्तरप्रदेश की साख चौपट भी होती है, वहां जाने, बसने, काम करने के पहले लोग सौ बार सोचेंगे कि अपने परिवार को खतरे में क्यों डालें।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें