छेडख़ानी और बलात्कार करने वालों के घरों में मां-बहन...

संपादकीय
28 मई 2017


उत्तरप्रदेश के रामपुर से एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसमें दर्जन भर लड़के दो लड़कियों को छेड़ते हुए, उनके बदन से बदसलूकी करते हुए, और उसका वीडियो बनाते हुए दिख रहे हैं। इसके बाद उनका हौसला है कि वे ऐसे वीडियो को पोस्ट भी कर रहे हैं जिनमें सबके चेहरे उजागर है। पुलिस ने गिरफ्तारियां शुरू कर दी हैं, लेकिन यह फिक्र की बात है कि गुंडों का इतना हौसला है, और शायद वे इतने बेवकूफ भी हैं कि अपने जुर्म के सुबूत खुद ही छोड़ते चल रहे हैं। लेकिन इन दोनों में से जो भी बात हो, बड़ी बात यह है कि उत्तर भारत के बहुत से प्रदेशों में लड़कियां बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं। लोगों को याद होगा कि इसी उत्तरप्रदेश में जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने तो बड़े जोर-शोर से भाजपा के चुनावी घोषणापत्र के मुताबिक रोमियो दस्ते बनाए गए थे जो कि प्रेम करने वाले लड़के-लड़कियों को रोकने के लिए थे। ऐसे दस्तों की पुलिस ने लोगों के साथ बदतमीजी, बदसलूकी, और गुंडागर्दी शुरू कर दी थी। भाई-बहनों को पीटा जाने लगा था, और हालत यह हो गई थी कि एक परिवार के दो हमउम्र लड़के-लड़कियां भी बाहर निकलने की हिम्मत नहीं कर पा रहे थे। जब यह उत्पात बर्दाश्त के बाहर बढ़ा, तो खुद सरकार ने चुपचाप इसे दफन कर दिया। लेकिन गुंडों के हौसले कम नहीं हुए। उत्तर भारत में रोजाना ही कहीं न कहीं कोई लड़की छेडख़ानी से थककर खुदकुशी करती है, और कहीं न कहीं ऐसे नए वीडियो सामने आते हैं, और बहुत से मामलों में तो ऐसे वीडियो सामने नहीं आते होंगे, और महज ब्लैकमेलिंग के काम लाए जाते होंगे।
यहां पर दो बातें मिलीजुली हैं। एक तो यह कि लड़कियों या महिलाओं के प्रति समाज का नजरिया अभी भी किस हद तक हिकारत और हिंसा का है। और यह समाज सिर्फ आम लोगों का समाज नहीं है, यह सत्ता की कुर्सियों पर बैठे हुए नेताओं और अफसरों का समाज भी है जिसके बारे में हम आए दिन लिखते रहते हैं। लेकिन दूसरी बात भी बहुत गंभीर है कि लोग अपने ही जुर्म के साइबर-सुबूत इस तरह से बनाते और छोड़ते चल रहे हैं कि उनका जेल जाना तय हो जाता है। यह एक तरह से अच्छी नौबत भी है कि पुलिस की मेहनत बचती है, और अदालतों से मुजरिमों के छूटने का खतरा घटता है। लेकिन लोगों को यह समझना चाहिए कि उनके घर के लड़के अगर ऐसी गुंडागर्दी करते हैं, तो उनको घर से कैसी बातें सिखाई गई हैं? सबसे अधिक सीख और नसीहत परिवार से ही मिल सकती है, और जब भी किसी परिवार के लड़के छेडख़ानी से लेकर बलात्कार तक के जुर्म में फंसते हैं, तो वे तो जेल चले जाते हैं, लेकिन जेल के बाहर बच गया परिवार बदनामी झेलते रहता है। ऐसा भी नहीं है कि परिवार की जानकारी में आए बिना लड़कों का हौसला इस हद तक बढ़ जाता हो। घर के भीतर ही अगर लड़कियों की इज्जत करना सिखाया जाए, तो लड़कों के बाहर निकलकर ऐसी हरकतें करने का खतरा घट जाता है। यह समझना चाहिए कि अगर ये लड़के घर पर ही अपनी मां और बहन की इज्जत होते देखते, तो शायद वे घर के बाहर के लड़कियों को भी इज्जत के लायक समझते। उनका सुलूक यह भी साबित करता है कि उनके परिवारों में मां-बहन की इज्जत नहीं होती होगी। जब ऐसे लड़के जेल चले जाएं तो उनके लिए रोने के बजाय पहले से ही परिवारों को अपने भीतर का माहौल ठीक करना चाहिए ताकि बाकी दुनिया की महिलाएं और लड़कियां सुरक्षित रह सकें।

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