लड़की या महिला की कामयाबी आसानी से गले नहीं उतर पाती

संपादकीय
31 मई 2017


भारतीय फिल्म अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा कल जर्मनी के बर्लिन में थीं, और अपनी हॉलीवुड की किसी फिल्म के प्रमोशन में पहुंची हुई थीं। वहीं पर भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी पहुंचे हुए थे, और उन्होंने अपने व्यस्त कार्यक्रम के बीच भी कुछ वक्त प्रियंका को दिया, जिसका आभार व्यक्त करते हुए प्रियंका ने फेसबुक पर इस मुलाकात की तस्वीर पोस्ट की हैं। वे एक आम पोशाक में थीं जिसमें उनके पैर दिख रहे थे, और कोई भी बात आपत्तिजनक नहीं थी, लेकिन हिन्दुस्तान में उन दकियानूसी लोगों की संस्कृति जाग गई जो घर बैठे परिवार के साथ तो टीवी पर हर तरह की फिल्में और सीरियल देख लेते हैं, लेकिन अपने नेताओं से यह उम्मीद करते हैं कि वे जरा भी खुली पोशाक से दूर रहें। मजे की बात यह है कि जिस जर्मनी में मोदी गए हुए हैं वहां पर चांसलर भी इसी तरह की पोशाक पहनती हैं, और ऐसी ही पोशाक में वे थीं भी।
लोगों के पैमाने आदमियों के लिए अलग हो जाते हैं, और औरतों के लिए अलग। जिस हिन्दुस्तान की इस संस्कृति में मंदिरों में पुजारी खुले बदन रहते हैं, नदी किनारे और कुंभ जैसे मेलों में साधू बिना कपड़ों के रहते हैं, और नागा साधू कहलाकर सम्मान भी पाते हैं, छत्तीसगढ़ जैसे राज्य में तो राजिम कुंभ जैसे सरकारी-धार्मिक मेले में इन नागा साधुओं के लिए पूरा इंतजाम सरकार करती है, और शायद नगद बिदाई भी देती है। लेकिन इसी देश में जगह-जगह जाति पंचायतें लड़कियों के जींस पर पहनने पर रोक लगाती हैं, उनके मोबाइल फोन को छीनने का हुक्म जारी करती हैं। जगह-जगह लड़कियों और महिलाओं के साथ इस देश में बलात्कार होता है और कोई नेता सुप्रीम कोर्ट से लात खाकर आने के बाद भी यह बयान जारी करता है कि लड़कियों को सुरक्षित रहना हो तो उनको घर बैठना चाहिए। जगह-जगह बलात्कार के लिए लड़कियों और महिलाओं को ही जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, उनकी फैशन को जिम्मेदार कहा जाता है। अब इस बलात्कारी देश में ऐसे मूर्खों के पास इस बात का क्या जवाब है कि चार-छह बरस की बच्ची से जब बलात्कार आए दिन होते रहते हैं, तो वह बच्ची कौन सा उत्तेजक फैशन कर लेती है? कौन से मोबाइल फोन का इस्तेमाल करती है, या जींस पहनकर घर से निकलती है?
लोगों को खुद तो देसी के अलावा विदेशी टीवी कार्यक्रम और फिल्मों में बदन देखना अच्छा लगता है, लेकिन जब देश का कोई नेता ऐसे किसी फैशनेबुल के करीब रहे तो लोगों को यह सार्वजनिक जीवन के शिष्टाचार के खिलाफ बात लगने लगती है। और हिन्दुस्तान के लोगों का आज-कल का मिजाज लगातार अधिक से अधिक पाखंडी होते चल रहा है क्योंकि यहां पर अब लोकतंत्र और न्याय, तर्क और हकीकत, इन सबसे लोगों को सोच-समझकर दूर ले जाया जा रहा है। जिस तरह से गाय के नाम पर पूरे देश में एक बवाल खड़ा किया जा रहा है, उससे यह देश और इसके भीतर के लोग बंटते हुए दिख रहे हैं। आजादी के वक्त भारत और पाकिस्तान के बीच विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था। अब भारत में खानपान के आधार पर एक हिंसक विभाजन चल रहा है जिसका लोकतंत्र से सीधा टकराव है, भारत के संविधान से सीधा टकराव है। जो सोच ऐसा टकराव खड़ा कर रही है, वही सोच जगह-जगह औरतों पर इतिहास की एक ऐसी हिंसक भारतीय संस्कृति लागू करना चाहती है, जो कि कभी थी ही नहीं।
प्रियंका चोपड़ा ने बिना किसी फिल्मी परिवार से आए हुए, अकेले अपने दम पर हिन्दुस्तान से लेकर हॉलीवुड तक लगातार फिल्मों में कामयाबी पाई है, और आज वह हिन्दुस्तान की सबसे मशहूर फिल्म कलाकार बनकर पूरी दुनिया में छा चुकी है। यह कामयाबी कारोबार के हिसाब से भी बहुत बड़ी है, और फिल्म-कला के हिसाब से भी अभूतपूर्व है। ऐसे में उसकी पोशाक को लेकर भद्दी बातें करके हिन्दुस्तानी यही जाहिर कर रहे हैं कि किसी लड़की या महिला की कामयाबी हिन्दुस्तानियों के गले आसानी से उतर नहीं पाती है। यह पूरी की पूरी सोच लैंगिक-हिंसा पर टिकी हुई है, और यह सोच हिन्दुस्तानी लोगों को जकड़कर रखेगी, पीछे घसीटेगी, और आगे बढऩे नहीं देगी।

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व तम्बाकू निषेध दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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